पाकिस्तान में कथित तौर पर बिना दस्तावेजों के रहने वाले अफगान शरणार्थियों को दूसरे देशों में भेजे जाने का क्रम लगातार बना हुआ है। हालांकि इन शरणार्थियों को पश्चिमी देशों में भेजने की समय सीमा आगे बढ़ा दी गई है। खबरों के अनुसार बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच पाकिस्तानी प्रशासन ने अफगान नागरिकों की स्वदेश वापसी की समय सीमा 29 फरवरी तक बढ़ा दी है। यह फैसला अमेरिका के विशेष प्रतिनिधि थॉमस वेस्ट के पाकिस्तान दौरे के बाद हुआ है।
थॉमस वेस्ट ने अमेरिका दौरे पर पाकिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री जलील अब्बास जिलानी से मुलाकात की। इसके एक सप्ताह के बाद कार्यवाहक सूचना मंत्री मुर्तजा सोलांगी ने कहा, अफगान शरणार्थियों के लिए तय समयसीमा 31 दिसंबर से बढ़ाकर 29 फरवरी, 2024 की गई है। उन्होंने कहा कि यह फैसला अफगान नागरिकों को किसी तीसरे देश में जाने का पर्याप्त समय देने के मकसद से लिया गया है। इस फैसले से शरणार्थियों को कानूनी दस्तावेज प्राप्त करने की मोहलत के साथ-साथ मदद भी मिलेगी। सरकार के मुताबिक शरणार्थियों की निकासी व्यवस्था को जल्द से जल्द अंतिम रूप देने का प्रयास किया जा रहा है।
डॉन अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान शरणार्थियों को दूसरे देशों में भेजने के लिए पुनर्वास योजना बना रहा है। बुधवार को इस संबंध में पाकिस्तान की कार्यवाहक कैबिनेट की बैठक भी हुई। रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिम की यात्रा के दौरान दोनों पक्षों (अमेरिका और पाकिस्तान) ने कई मुद्दों पर चर्चा की। इसमें बिना दस्तावेज वाले अफगानों के खिलाफ चल रहे अभियान भी शामिल है।
बता दें कि मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और संयुक्त राष्ट्र अधिकारियों ने बिना समुचित दस्तावेज के अफगान शरणार्थियों को जबरन पाकिस्तान से निकाले जाने की व्यापक आलोचना की है। आलोचना के कारण पाकिस्तान से विवादास्पद नीति पर पुनर्विचार करने का अंतरराष्ट्रीय दबाव बना और उसे समय सीमा बढ़ाने का फैसला लेना पड़ा।
बुधवार को पाकिस्तानी कैबिनेट ने यह भी फैसला लिया कि अफगान शरणार्थियों से पाकिस्तान में अधिक समय तक रहने के लिए अब 800 अमेरिकी डॉलर नहीं, 400 अमेरिकी डॉलर का जुर्माना वसूला जाएगा। जुर्माने का प्रावधान वैसे अफगान नागरिकों के लिए है, जो किसी तीसरे देश में जाना चाहते हैं, लेकिन उनके पास कानूनी दस्तावेज या प्रसंस्करण शुल्क नहीं है।
शरणार्थियों के लिए समयसीमा बढ़ाए जाने से से जुड़ी खबर के अनुसार, नियत तारीख के बाद, 800 अमेरिकी डॉलर की अधिकतम सीमा के साथ 100 अमेरिकी डॉलर प्रति माह की दर से जुर्माना लगाया जाएगा। पाकिस्तानी कैबिनेट के अनुसार, अब तक 4.50 लाख लोग अपने मूल देश वापस जा चुके हैं। अधिकांश लोग स्वेच्छा से गए हैं।
बता दें कि 1980 के दशक में सोवियत संघ ने अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद लाखों अफगानों ने पड़ोसी देश पाकिस्तान में शरण ली। 2021 में जब तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्ज़ा किया तो इनकी संख्या और बढ़ी। पाकिस्तानी हुकूमत के फरमान के अनुसार उचित दस्तावेजों के बिना पाकिस्तान में रहने वाल अफगान शरणार्थियों समेत किसी भी व्यक्ति को 31 अक्तूबर तक देश छोड़ने को कहा गया था।
अफगान शरणार्थियों की बड़ी संख्या में गिरफ्तारी की आशंका के कारण पाकिस्तान की दुनियाभर में आलोचना हुई। हालांकि, इस मामले से जुड़े पाकिस्तानी अधिकारियों ने कहा, शरणार्थियों के रूप में पंजीकृत लगभग 14 लाख अफगानों को चिंता करने की जरूरत नहीं। कार्रवाई केवल उचित दस्तावेज के बिना रहने वाले लोगों पर होगी।
पाकिस्तान में लगभग 1.7 मिलियन अवैध अफगान शरणार्थी
गौरतलब है कि पाकिस्तान में अवैध अफगान शरणार्थियों को बाहर निकालने का अभियान पहले भी चलाया जा चुका है। हालांकि, कुछ हफ्तों के बाद सरकार को इसमें पूरी सफलता नहीं मिली। सरकारी अनुमान के अनुसार, लगभग 1.7 मिलियन अवैध अफगान शरणार्थी पाकिस्तान में मौजूद हैं, जिनका पंजीकरण नहीं हुआ है। संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार, 1.3 मिलियन अफगान शरणार्थी पंजीकृत हैं। 8.80 लाख को पाकिस्तान में रहने का कानूनी अधिकार हासिल है। आत्मघाती हमलों के बाद पाकिस्तान सरकार और तालिबान शासन के बीच संबंध तनावपूर्ण हो गए हैं।