भारत की सैन्य व्यवस्था की नकल करते हुए पाकिस्तान ने अपने रक्षा ढांचे में बड़ा बदलाव किया है, लेकिन इस कदम पर अब वहां सवाल उठने लगे हैं। सरकार ने संविधान में संशोधन कर ‘चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज’ नाम का नया पद बनाया है, जिसे सेना, नौसेना और वायुसेना के बीच बेहतर समन्वय के नाम पर लागू किया जा रहा है। आलोचकों का कहना है कि यह सुधार नहीं, बल्कि सत्ता और सैन्य नियंत्रण को प्रधानमंत्री कार्यालय के इर्द-गिर्द केंद्रित करने की कोशिश है।
27वें संविधान संशोधन के तहत राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह पर आर्मी चीफ और चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज की नियुक्ति करेंगे। यह अधिकारी आगे नेशनल स्ट्रैटेजिक कमांड का प्रमुख तय करेगा। हालांकि विपक्षी दलों और रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि इस संशोधन से सेना की स्वायत्तता घटेगी और राजनीतिक दखल बढ़ेगा। आलोचकों ने इसे सेना पर नियंत्रण की कवायद बताया है, न कि कोई वास्तविक सुधार।
इस संशोधन के तहत संयुक्त चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी का पद 27 नवंबर 2025 से समाप्त कर दिया जाएगा। यह वही पद था जो तीनों सेनाओं के बीच सामरिक समन्वय का संतुलित ढांचा बनाए रखता था। अब नया पद ‘चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज’ उसकी जगह लेगा, जिसके अधिकार कहीं अधिक होंगे। विपक्षी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के नेता ली जफर ने इसे जल्दबाजी में उठाया गया कदम बताया और कहा कि सरकार बिना चर्चा और समीक्षा के इस संशोधन को पारित करने पर तुली है।
पाकिस्तान में इस संशोधन को भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ पद की नकल माना जा रहा है। भारत ने यह पद सैन्य आधुनिकीकरण और समन्वय के लिए बनाया गया था, लेकिन पाकिस्तान में इसे असुरक्षा और राजनीतिक दबाव का परिणाम बताया जा रहा है। माना जा रहा है कि भारत के साथ मई में हुई चार दिवसीय झड़प के बाद पाकिस्तान सरकार अपने सैन्य ढांचे की कमजोरी छिपाने के लिए यह कदम उठा रही है।
ब्राजील में तूफान का कहर: छह की मौत और 400 से ज्यादा घायल, सरकार ने घोषित आपातकाल
ब्राजील के दक्षिणी राज्य पराना में शुक्रवार रात आए भयानक तूफान ने तबाही मचा दी। तेज हवाओं और भारी बारिश से छह लोगों की मौत हो गई, जबकि 400 से अधिक लोग घायल हुए। 250 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली हवाओं ने सैकड़ों घरों को क्षतिग्रस्त कर दिया और पेड़ उखड़ गए। राज्य सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में आपातकाल घोषित कर दिया है। अधिकारियों के मुताबिक, मृतकों में पांच वयस्क और एक 14 वर्षीय किशोरी शामिल है। करीब 437 लोगों को तत्काल चिकित्सा सहायता दी गई, जिनमें दस की सर्जरी करनी पड़ी और नौ की हालत गंभीर है। राष्ट्रपति लुईज इनासियो लूला दा सिल्वा ने सोशल मीडिया पर पीड़ितों के प्रति संवेदना व्यक्त की और राहत कार्य तेज करने के निर्देश दिए।
एच-1बी वीजा दुरुपयोग पर ट्रंप प्रशासन सख्त
ट्रंप प्रशासन ने एच-1बी वीजा के दुरुपयोग पर बड़ी कार्रवाई शुरू की है। अमेरिकी श्रम विभाग ने 175 जांचें शुरू की हैं, जिनमें कम वेतन, फर्जी कार्यस्थल और कर्मचारियों को बिना वेतन बेंच पर बैठाने जैसी गड़बड़ियां सामने आई हैं। विभाग ने कहा कि यह कदम अमेरिकी नौकरियों की सुरक्षा के लिए उठाया गया है। रिपोर्टों के मुताबिक, अब तक 1.5 करोड़ डॉलर से अधिक की बकाया मजदूरी का पता चला है। भारतीय पेशेवर, खासकर आईटी क्षेत्र के लोग, इस वीजा के बड़े उपयोगकर्ता हैं।
शटडाउन से अमेरिका में 800 से ज्यादा उड़ानें रद्द
अमेरिका में जारी शटडाउन का बुरा असर विमानन क्षेत्र पर पड़ रहा है। शुक्रवार (07 नवंबर) को पूरे अमेरिका में सैकड़ों उड़ानें रद्द कर दी गईं। फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (एफएफए) एयरलाइंस देश के सबसे व्यस्त हवाई अड्डों पर धीरे-धीरे उड़ानों में कटौती कर रही हैं। आदेश के अनुसार एफएए द्वारा उड़ानों में कटौती के लिए चुने गए 40 हवाई अड्डे दो दर्जन से अधिक राज्यों में फैले हुए हैं।
उड़ान व्यवधानों पर नजर रखने वाली वेबसाइट फ्लाइटअवेयर के अनुसार, देश भर में 800 से ज्यादा उड़ानें रद्द कर दी गईं, जो कि गुरुवार को रद्द की गई संख्या से चार गुना अधि है। फ्लाइटअवेयर के अनुसार शिकागो, अटलांटा, डेनवर, डलास और फीनिक्स के हवाई अड्डों पर सबसे ज्यादा व्यवधान हुए। एफएफए ने उड़ानों में कटौती की यह कदम एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स की कमी को कम करने के लिए उठाया है। बता दें कि कंट्रोलर्स एक महीने से ज्यादा समय से बिना वेतन के काम कर रहे हैं।
हंगरी को रूसी ऊर्जा प्रतिबंधों से छूट देने पर विचार कर रहे हैं ट्रंप
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को संकेत दिया कि वह हंगरी को रूसी ऊर्जा पर लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों से छूट देने पर विचार कर रहे हैं। ट्रंप ने यह बात व्हाइट हाउस में हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ऑर्बन के साथ बैठक के दौरान कही।
ट्रंप ने कहा, “हम इस पर विचार कर रहे हैं, क्योंकि उनके लिए तेल और गैस अन्य क्षेत्रों से प्राप्त करना बेहद कठिन है।” ऑर्बन ने कहा कि यह उनकी भूमि से घिरे देश के लिए एक “जीवन-मरण का मुद्दा” है। उन्होंने कहा कि अगर ये प्रतिबंध लागू हुए तो इसका हंगरी की जनता पर गंभीर असर पड़ेगा, और यही वह विषय है जिस पर वे ट्रंप से चर्चा करने आए हैं।
हंगरी के प्रधानमंत्री ने अपने बयान में कहा कि वे ट्रंप को कई सुझाव देंगे ताकि एक व्यावहारिक छूट व्यवस्था बनाई जा सके। उन्होंने कहा, “मैं किसी उपहार या विशेष रियायत की मांग नहीं कर रहा हूं। मैं सिर्फ यह चाहता हूं कि अमेरिका यह समझे कि रूस पर लगाए गए ऊर्जा प्रतिबंधों ने हंगरी जैसे देशों को, जिनके पास समुद्र तक पहुंच नहीं है, असंभव स्थिति में डाल दिया है।”