नेपाल में जेल से फरार हुआ गुजरात का एक आरोपी आखिरकार अहमदाबाद में पुलिस के हत्थे चढ़ गया है। आरोपी की पहचान धर्मेश चुनारा के रूप में हुई है, जो अहमदाबाद के ठक्करबापा नगर रोड इलाके का रहने वाला है। पुलिस के मुताबिक, वह पिछले साल नेपाल में हुए जेन जेड विरोध प्रदर्शनों के दौरान काठमांडू की भद्र जेल से फरार हो गया था। पुलिस ने बताया कि धर्मेश चुनारा को अहमदाबाद क्राइम ब्रांच की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने पकड़ा है। वह जुलाई 2025 में बैंकॉक से नेपाल पहुंचा था, जहां उसे 13 किलो हाइब्रिड गांजा के साथ गिरफ्तार किया गया था। इस गांजे की कीमत करीब 13 करोड़ रुपये बताई गई थी। इसके बाद नेपाल की अदालत ने उसे भद्र जेल भेज दिया था।
सितंबर 2025 में नेपाल में सरकार द्वारा सोशल मीडिया पर प्रतिबंध के विरोध में बड़े पैमाने पर युवा आंदोलन हुए थे, जिन्हें ‘जेन जेड’ प्रदर्शन कहा गया। इसी दौरान प्रदर्शनकारियों ने भद्र जेल में तोड़फोड़ की, जिसके बाद वहां बंद सभी कैदी फरार हो गए। इनमें कुछ भारतीय नागरिक भी शामिल थे। नेपाल सरकार ने फरार कैदियों की सूची जारी की थी, जिसके आधार पर भारत के सभी राज्यों को अलर्ट किया गया। तकनीकी जांच और मानवीय सूचना के आधार पर पुलिस ने धर्मेश चुनारा को अहमदाबाद में ट्रेस कर गिरफ्तार कर लिया। फिलहाल आरोपी को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए हिरासत में रखा गया है।
ट्रंप ने दक्षिण कोरिया को दी टैरिफ बढ़ाने की धमकी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह दक्षिण कोरियाई वस्तुओं पर टैरिफ बढ़ा रहे हैं, क्योंकि वहां की नेशनल असेंबली ने अक्तूबर में तय हुए व्यापार ढांचे को अभी तक मंजूरी नहीं दी है। ट्रंप ने सोमवार को सोशल मीडिया पर कहा कि दक्षिण कोरिया से आयात होने वाली गाड़ियों, लकड़ी और दवाइयों पर आयात कर बढ़ाया जाएगा, जबकि अन्य वस्तुओं पर शुल्क की दर 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दी जाएगी।
संयुक्त राष्ट्र की मानवीय सहायता उत्तर-पूर्व सीरिया के कोबानी शहर पहुंची
संयुक्त राष्ट्र का मानवीय सहायता काफिला सोमवार को उत्तर-पूर्व सीरिया के घिरे हुए शहर कोबानी में पहुंचा। यह पहला काफिला है जो इस महीने शुरू हुए संघर्ष के बाद क्षेत्र में पहुंचा है, जिसमें सीरियाई सरकार और कुर्द नेतृत्व वाली सीरियाई डेमोक्रेटिक फोर्सेज (SDF) आमने-सामने हैं। सरकार ने हाल ही में एक आक्रामक अभियान शुरू किया, जिसमें उसने एसडीएफ के अधिग्रहित अधिकांश क्षेत्रों पर कब्जा कर लिया, जबकि कुर्द बहुलता वाले कुछ इलाके अभी भी एसडीएफ के नियंत्रण में हैं। मंगलवार को घोषित सीजफायर और शनिवार को इसे 15 और दिनों के लिए बढ़ाया गया, जो अब तक ज्यादातर पालन में है, हालांकि कभी-कभी हल्की झड़पें हुई हैं।
कोबानी के निवासियों ने बिजली और पानी की कटौती और रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं जैसे रोटी की कमी की जानकारी दी। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार समन्वय कार्यालय ने बताया कि 24 ट्रकों में ईंधन, भोजन, मेडिकल और सर्दियों के लिए आवश्यक सामग्री पहुंचाई गई। उत्तर-पूर्व सीरिया में संघर्ष के कारण 1,73,000 से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं। सीजफायर लागू होने के बाद कुछ लोग अपने घर लौटने लगे हैं।
सूडान में सेना ने RSF का घेरा तोड़ा
सूडान की सेना ने केंद्रीय कोरडोफान क्षेत्र में पैरामिलिट्री बल रैपिड सपोर्ट फोर्स (RSF) द्वारा डाले गए घेराबंदी को तोड़ दिया। सेना ने दक्षिण कोरडोफान के डिलिंग शहर तक रास्ता खोलकर RSF को भारी नुकसान पहुंचाया। RSF और सेना के बीच संघर्ष पिछले तीन वर्षों से जारी है। अप्रैल 2023 में सेना और RSF के बीच सत्ता संघर्ष ने खुली लड़ाई का रूप ले लिया। संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार, इस संघर्ष में अब तक 40,000 से अधिक लोगों की जान गई और 14 मिलियन लोग विस्थापित हुए हैं।
गुयाना: अमेरिकी प्रत्यर्पण के बावजूद एजरुद्दीन मोहम्मद बने विपक्षी नेता
दक्षिण अमेरिकी देश गुयाना में एजरुद्दीन मोहम्मद, जो सोने की तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में अमेरिकी प्रत्यर्पण का सामना कर रहे हैं, सोमवार को विपक्षी नेता चुने गए। छह महीने पहले उन्होंने वी इन्वेस्ट इन नेशनहुड (WIN) नामक राजनीतिक दल बनाया था, जो तेजी से देश का दूसरा सबसे बड़ा दल बन गया।
38 वर्षीय मोहम्मद को विपक्षी नेता बनाने के लिए WIN के 16 सांसदों और एक अन्य छोटे दल के सांसद ने मतदान किया। इस वोटिंग के साथ WIN संसद में दूसरा सबसे बड़ा दल बन गया। इस बीच, अमेरिकी प्रत्यर्पण मामले की सुनवाई एक मजिस्ट्रेट कोर्ट में चल रही है। मोहम्मद ने कहा एक व्यक्ति निर्दोष है जब तक दोष साबित न हो। मैं इस देश की जनता की सेवा के लिए तैयार हूं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी राजनीतिक सफलता के कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। हालांकि, स्पीकर हाउस मन्ज़ूर नादिर ने चुनाव पर चिंता जताई और कहा कि एक भगोड़े को विपक्षी नेता बनाने की प्रक्रिया कठिन स्थिति में है। इसके बावजूद उन्होंने मोहम्मद को उनके निर्वाचित होने पर बधाई दी।
वेनेजुएला: सैकड़ों कैदी अब भी बंद, हाल में दर्जनों रिहा
वेनेजुएला में पिछले दो दिनों में कई कैदियों को रिहा किया गया, जबकि सैकड़ों राजनीतिक विरोधियों को अभी भी जेल में रखा गया है। यह कदम अमेरिकी दबाव के बीच आया है, जो कार्यवाहक सरकार से बंदियों की रिहाई की मांग कर रहा है। मानवाधिकार समूहों के अनुसार, 8 जनवरी से अब तक 266 राजनीतिक कैदी रिहा किए गए हैं। इनमें एक विपक्षी कार्यकर्ता, एक मानवाधिकार वकील और एक पत्रकारिता छात्र शामिल हैं। हालांकि, कम से कम 600 विरोधी अभी भी जेल में हैं, जिनमें विपक्षी नेता और नोबेल पुरस्कार विजेता मारिया कोरीना मचाडो के पार्टी सदस्य भी शामिल हैं।