फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स

Myanmar: क्या कामयाब होगी रोहिंग्या शरणार्थियों की घर वापसी की योजना? म्यांमार-बांग्लादेश की यह खास तैयारी

डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, यंगून Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Sun, 07 May 2023 06:47 PM IST

सार

बांग्लादेश और म्यांमार के अधिकारियों ने शरणार्थियों की घर वापसी के शुरुआती कार्यक्रम (पायलट प्रोजेक्ट) को कुछ समय पहले मंजूरी दी थी। इसके तहत लगभग 1,100 शरणार्थियों को स्वेच्छा से अपने घर लौटने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : यूएन हिंदी समाचार


सात लाख से ज्यादा रोहिंग्या शरणार्थी 2017 में रखाइन प्रांत स्थित गांवों से विस्थापित हो गए थे। तब म्यांमार की सेना ने इस समुदाय के खिलाफ वहां दमनकारी नीति अपना रखी थी। विस्थापित हुए ज्यादातर शरणार्थियों को बांग्लादेश में पनाह मिली। उसके बाद शुक्रवार ऐसा पहला दिन बना, जब कुछ शरणार्थियों ने अपने गांव लौट कर वहां अपने घर-बाड़ की स्थिति देखी।

 

बांग्लादेश और म्यांमार के अधिकारियों ने शरणार्थियों की घर वापसी के शुरुआती कार्यक्रम (पायलट प्रोजेक्ट) को कुछ समय पहले मंजूरी दी थी। इसके तहत लगभग 1,100 शरणार्थियों को स्वेच्छा से अपने घर लौटने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। शुक्रवार को पहुंचे दल ने उन सुविधाओं को अपनी आंखों से देखा, जो शरणार्थियों को घर लौटाने योजना के तहत निर्मित की गई हैँ। पायलट प्रोजेक्ट का मकसद शरणार्थियों में भरोसा पैदा करना है, ताकि वे रखाइन प्रांत लौटने की योजना बना सकें। 


बांग्लादेश सरकार के एक प्रतिनिधि ने ढाका में मीडियाकर्मियों को बताया कि दोनों देश जून में बरसात का सीजन शुरू होने से पहले शरणार्थियों की वापसी शुरू करना चाहते हैँ। इसके पहले दो बार शरणार्थियों को लौटाने की योजना फेल हो चुकी है। तब शरणार्थी रखाइन प्रांत वापस जाने को तैयर नहीं हुए थे। विश्लेषकों के मुताबिक नई योजना भी कामयाब होगी या नहीं, इस बारे में अभी कुछ कहना कठिन है। 


लाखों शरणार्थियों की देखभाल करने के लिए बांग्लादेश को भारी आर्थिक बोझ उठाना पड़ा है। साथ ही इससे बांग्लादेश में कुछ सामाजिक समस्याएं भी पैदा हुई हैं। इसलिए वह जल्द से जल्द उनकी घर वापसी कराना चाहता है। जबकि अमेरिका और यूरोपीय देशों ने इस योजना को लेकर चिंता जताई है। उनकी राय है कि म्यांमार की सत्ता पर सेना का शिकंजा बना हुआ है। यह सूरत रोहिंग्या समुदाय के लिए सुरक्षित नहीं है। 


इस बीच बांग्लादेश के अखबार द बिजनेस स्टैंडर्ड में छपी एक खास रिपोर्ट के मुताबिक बांग्लादेश और म्यांमार के बीच सहमति बनाने में चीन ने खास भूमिका निभाई है। अप्रैल के मध्य में उसने स्थिति पर दोनों पक्षों के बीच वार्ता कराने की पेशकश की थी। यह बैठक उसने चीन के यूनान प्रांत में कराने का प्रस्ताव रखा था। इस सिलसिले में ढाका स्थित चीनी राजदूत ने प्रधानमंत्री शेख हसीना वाजेद से भी मुलाकात की थी। 


शरणार्थियों की वापसी का माहौल बनाने के लिए म्यांमार ने इस वर्ष मार्च में रखाइन प्रांत में 11 देशों के राजदूतों या वाणिज्य दूतों की एक बैठक आयोजित की। उनमें भारत, बांग्लादेश, चीन और आठ आसियान देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इन प्रतिनिधियों ने विभिन्न स्थानों का दौरा किया और वहां सुरक्षा की स्थिति का जायजा लिया। बांग्लादेश के पर्यवेक्षकों के मुताबिक इन प्रयासों के ही परिणास्वरूप शुक्रवार को शरणार्थियों का दौरा संभव हो सका। 

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next