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Pakistan: ईरान-यूएस मध्यस्थता की 'कीमत' लेगा पाकिस्तान? अमेरिका से मांगा 10 अरब डॉलर का आपातकालीन पैकेज

Thu, 23 Jul 2026 06:04 AM IST
प्रशांत तिवारी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला

सार

गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा पाकिस्तान अमेरिका से 10 अरब डॉलर की आपातकालीन विदेशी मुद्रा सहायता मांग रहा है। उसका कहना है कि इससे विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत होगा और आईएमएफ पर निर्भरता कम होगी। फिलहाल पाकिस्तान 7 अरब डॉलर के आईएमएफ बेलआउट कार्यक्रम के तहत कड़े आर्थिक सुधारों और बढ़े हुए टैक्स का सामना कर रहा है।
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पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ - फोटो : ANI
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विस्तार
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गंभीर आर्थिक संकट और दिवालियापन के खतरे से जूझ रहा पाकिस्तान एक बार फिर वैश्विक समुदाय के सामने आर्थिक मदद की गुहार लगा रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता की अपनी भूमिका के बीच पाकिस्तान अब अमेरिकी वित्त मंत्रालय से 10 अरब डॉलर (करीब 83,000 करोड़ रुपये) की एक्सचेंज स्टेबलाइजेशन फैसिलिटी (आपातकालीन विदेशी मुद्रा सहायता) मांगने की तैयारी में है। यदि अमेरिका इस प्रस्ताव को मंजूरी देता है, तो पाकिस्तान की लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था को बड़ी राहत मिल सकती है।

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पाकिस्तान के किसके सामने रखी अपनी मांग?
सूत्रों के मुताबिक, इस संबंध में पाकिस्तान ने अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के समक्ष औपचारिक रूप से अपनी मांग रखी है। पाकिस्तान चाहता है कि उसे पांच वर्षों के लिए यह आर्थिक सुविधा उपलब्ध कराई जाए, ताकि उसका विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत हो, पाकिस्तानी रुपये पर दबाव कम हो और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) पर उसकी निर्भरता घट सके। फिलहाल पाकिस्तान 7 अरब डॉलर के आईएमएफ कार्यक्रम के तहत सख्त आर्थिक सुधार लागू कर रहा है। इसके तहत टैक्स बढ़ाए गए हैं।  

पाकिस्तान ने अमेरिका के सामने कैसी मांग रखी है?
पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने हाल ही में वाशिंगटन में अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट से मुलाकात कर अमेरिकी वित्त मंत्रालय से द्विपक्षीय एक्सचेंज स्टेबलाइजेशन फैसिलिटी उपलब्ध कराने की मांग की है। पाकिस्तान का मानना है कि इससे उसे अंतरराष्ट्रीय पूंजी बाजारों में भरोसा मिलेगा और कर्ज के दबाव से कुछ राहत मिल सकेगी।
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पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर आईएमएफ का कितना दबाव है?
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था लंबे समय से गंभीर संकट का सामना कर रही है। वर्ष 2023 में देश दिवालिया होने की कगार पर पहुंच गया था। इसके बाद आईएमएफ ने उसे 7 अरब डॉलर का बेलआउट पैकेज दिया, लेकिन इसके बदले टैक्स बढ़ाने, सरकारी खर्चों में कटौती और कई कड़े आर्थिक सुधार लागू करने की शर्तें रखीं। इन कदमों से आम लोगों पर टैक्स का बोझ और बढ़ गया है।

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