इसके साथ ही अमेरिका के ओरेगॉन में बूटलेग वाइल्टफायर ने भी भीषण रूप अख्तियार कर लिया है। इसके चलते धुंआ महाद्वीप के एक छोर से दूसरे छोर (करीब 3000 मील) तक पहुंच रहा है। बुधवार को न्यूयॉर्क की सुबह तेज लाल सूर्योदय, वाइल्डफायर की महक और गाढ़े भूरे धुंए के साथ हुई थी।
वहीं, कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया में भी वाइल्डफायर की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। तीनों देशों में जंगलों में लगी भीषण वाइल्डफायर को काबू करने के लिए पानी की धाराओं से एक लगभग असंभव लड़ाई लड़ रहे हैं। इन घटनाओं ने वन्य जीवों की कई प्रजातियों पर भी संकट खड़ा कर दिया है।
मंगलवार को साइबेरिया के युकुतिया में धुंआ इतना गहरा था कि टोही पायलट स्व्यातोस्लाव कोलेसोव अपना काम नहीं कर पाए। इतनी कम दृश्यता में विमान को उड़ा पाना संभव ही नहीं थी। उल्लेखनीय है कि साइबेरिया के इस हिस्से में वाइल्डफायर आम है क्योंकि यहां के बड़े हिस्से में जंगल हैं।
इस बार पहले से अलग है साइबेरिया में वाइल्डफायर
लेकिन, सीएनएन के अनुसार वरिष्ठ एयर ऑब्जर्वेशन पोस्ट पायलट कोलेसोव ने कहा कि इस साल की आग की लपटें पहले से अलग हैं। उन्होंने कहा, 'याकूतिया के उत्तर में नई आग दिखाई दी है, उन जगहों पर जहां पिछले साल कोई आग नहीं लगी थी और जहां यह पहले बिल्कुल भी नहीं जली थी।
लंदन स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स में एनवायरनमेंटल जियोग्राफी में सहायक प्रोफेसर थॉमस स्मिथ कहते हैं कि आग का यह सीजन लंबा होता जा रहा है, आग अधिक समय तक जल रही है। जंगल पहले के मुकाबले कहीं अधिक तेजी से जल रहे हैं और यह उन स्थानों पर भी हो रहा है जहां नहीं होना चाहिए।
उल्लेखनीय है कि वैज्ञानिक इस बारे में सालों से चेतावनी दे रहे हैं। वाइल्डफायर बढ़ रही हैं और ऐसे स्थानों पर भी जंगलों में आग लग रही है जहां नहीं लगनी चाहिए। वहीं, इसकी रफ्तार और अवधि में भी इजाफा हुआ है। जलवायु परिवर्तन की समस्या को इसके पीछे का सबके बड़ा कारण बताया जा रहा है।