डब्ल्यूएचओ के प्रमुख टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस
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विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के प्रमुख टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने विश्व के शक्तिशाली देशों से कहा है कि वे कोरोना रोधी टीकों का बूस्टर डोज देने की योजना दो माह के लिए टाल दें। उन्होंने कहा कि ऐसा करना बेहद जरूरी है ताकि वैक्सीन उपलब्धता में वैश्विक असमानता को कम किया जा सके। साथ ही कोरोना के नए वैरिएंट को फैलने से रोका जा सके।
डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने हंगरी की राजधानी बुडापोस्ट में मीडिया से चर्चा में कहा कि विश्व में कोरोना रोधी टीकाकरण अभियान को लेकर वे बहुत हताश हैं। जब महामारी से जूझ रहे विश्व के कई देश अपनी आबादी को वैक्सीन की पहली और दूसरी खुराक देने के लिए जूझ रहे हैं तब सशक्त देश इन वैक्सीन का बड़े पैमाने पर भंडारण कर तीसरी खुराक देने जा रहे हैं। यह वैश्विक आपदा की चुनौती के दौर में उचित नहीं है। उन्होंने वैक्सीन की बूस्टर खुराक देने की तैयारी कर रहे देशों से गुहार लगाई कि वे बूस्टर डोज के तौर पर इस्तेमाल होने वाली खुराक जरूरतमंद देशों को प्रदान करें, ताकि वहां के लोगों का टीकाकरण किया जा सके।
ये देश कर रहे बूस्टर डोज की तैयारी
घेबरेयेसस द्वारा यह गुहार ऐसे वक्त में की गई है जब अमेरिका, इस्राइल, ब्रिटेन और हंगरी के साथ-साथ दुनिया के कई देश अपने देश की जनता को कोविड-19 रोधी टीके का बूस्टर डोज देने की तैयारी कर रहे हैं। इसकी घोषणा वे कर चुके हैं। कुछ दिनों पूर्व ही अमेरिका में वैक्सीन की तीसरी खुराक बूस्टर डोज देने का फैसला किया गया है।
अमीर व गरीबों देशों में वैक्सीनेशन का भारी अंतर
डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने इससे पहले कहा था कि अमीर देशों में प्रति 100 लोगों को अब तक टीके की करीब 100 डोज दी जा चुकी है जबकि कमजोर आय वाले देशों में प्रति 100 व्यक्तियों पर सिर्फ 1.5 डोज ही दी जा सकी है। बीते दिनों उन्होंने कहा था कि डब्ल्यूएचओ बूस्टर डोज दिए जाने पर कम से कम सितंबर के अंत तक रोक लगाने की गुजारिश कर रहा है ताकि दुनिया की कम से कम 10 फीसद आबादी को वैक्सीन लगा दी जाए।