बच्चों को जन्म दिए जाने के बाद की स्थिति वाली 2,672 महिलाओं के साथ इंटरव्यू किए गए, लेकिन उनमें भी दुर्व्यवहार के ऐसे ही मामले देखने को मिले हैं। शोधकर्ताओं ने अपनी जांच में पाया कि सीजेरियन ऑपरेशन से बच्चे होने के ऐसे 35 मामले सामने आए जिनमें मां की सहमति नहीं ली गई थी, जबकि 2,611 केस ऐसे थे जिनमें बिना अनुमति के यौन अंग की जांच की गई।
अध्ययन में लगभग 752 महिलाओं ने किसी ना किसी रूप में शाब्दिक प्रताड़ना-चिल्लाने डांटे जाने और मखौल उड़ाए जाने का अनुभव किया है। 11 महिलाओं को उनकी नस्ल और जातीयता के आधार पर भेदभाव या कथित लांछन का सामना करना पड़ा है।
रोकथाम की रणनीति
यूएन स्वास्थ्य एजेंसी ने रणनीतियों का एक फ्रेमवर्क तैयार किया है जिसके तहत महिलाओं का इलाज करुणा और गरिमा के साथ किए जाने की अनुशंसा जारी की गई है। इसके लिए स्वास्थ्य प्रणालियों को जवाबदेह बनाने, गुणवत्तापरक स्वास्थ्य देखरेख के लिए पर्याप्त संसाधन सुनिश्चित करने और महिला अधिकारों के लिए स्पष्ट नीतियां बनाना अहम होगा।
- प्रसव वार्ड बनाते समय महिलाओं की जरूरतों का ध्यान रखा जाना
- चिकित्सा परीक्षणों के दौरान उनकी सहमति का ख्याल रखा जाना
- गुणवत्तापरक स्वास्थ्य सेवा के लिए स्वास्थ्यकर्मियों को मदद प्रदान करना
- प्रसव पीड़ा और शिशु के जन्म के समय किसी के साथ का अधिकार सुनिश्चित करना
- ऐसी गुणवत्तापरक मातृत्व सेवाएं उपलब्ध कराना जहां दुर्व्यवहार के मामले अस्वीकार्य हों