डब्ल्यूएचओ ने ईमेल में स्पष्ट किया है कि कफ सिरप में डायएथिलीन ग्लाइकोल (डीईजी) की पहचान आसान नहीं होती और इसकी पुष्टि में कई महीने लग सकते हैं। यह रसायन सामान्यतः एंटी-फ्रीज एजेंट के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, पर जब यह दवाओं में मिल जाता है तो किडनी फेल होने, लकवा और मौत तक का कारण बन सकता है। बता दें कि गांबिया में मौतों के छह माह बाद डीईजी की पुष्टि हुई थी।
क्या बाजार से दवाएं वापस लेने का चलाया अभियान
डब्ल्यूएचओ ने अमेरिकी रोग नियंत्रण केंद्र (सीडीसी) का हवाला देते हुए पूछा है कि क्या भारत में भी संक्रमित दवाओं की सार्वजनिक रिकॉल ड्राइव चलाई गई, जैसा कि 1937 में अमेरिका के एफडीए ने किया था जब 239 निरीक्षकों को तैनात कर हर दूषित बोतल वापस मंगाई गई थी।
विश्व में जेनेरिक दवाओं का सबसे बड़ा निर्यातक है भारत
भारत विश्व में कफ सिरप का सबसे बड़ा निर्यातक है। वैश्विक स्तर पर कुल जेनेरिक दवाओं का सर्वाधिक 20 फीसदी भारत से निर्यात होता है। भारत घरेलू उत्पादन का लगभग 80 फीसदी हिस्सा विदेश भेजता है, जिनमें कफ सिरप भी शामिल है। 14 अगस्त तक 4,008 कफ सिरप खेप भारत से निर्यात हुईं।
अनुमान है कि अगले 10 साल में भारत का फार्मा निर्यात 130 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है, जो मौजूदा स्तर से 10 गुना अधिक होगा। हालांकि, भारत निर्मित सिरप को पहले भी कई देशों में बच्चों की मौत से जोड़ा गया है। 2022 में गांबिया में 66, 2023 में उज्बेकिस्तान में 65 व कैमरून में 10 बच्चों की मौत के लिए कफ सिरप को जिम्मेदार ठहराया गया।