पाकिस्तान ने बलूचिस्तान की मानवाधिकार कार्यकर्ता महरंग बलूच का नाम आतंकी सूची में शामिल किया है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार के इस फैसले पर महरंग ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने वालों को दबाने के लिए यह कदम उठाया गया है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि यह पाकिस्तान में कमजोर लोकतंत्र को दर्शाता है।
महरंग अक्सर बलूचिस्तान में गायब हुए लोगों के मुद्दे को लेकर पाकिस्तान सरकार को घेरती रहती है। वह बलूचिस्तान के लोगों के हक के लिए दशकों से लड़ रही हैं। आइये जानते हैं कि कौन हैं महरंग जो कि पाकिस्तान की बलूचों पर जुर्म की नीतियों के खिलाफ उसके गले की हड्डी बन गई हैं। आखिर पाकिस्तान सरकार उनसे परेशान क्यों है और आखिर महरंग ने अब तक क्या-क्या किया है।
गौरतलब है कि पाकिस्तान सरकार के खिलाफ बलूचिस्तान में शुरू हुआ गतिरोध शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। इस गतिरोध का मुख्य चेहरा महरंग बलूच ही है, जो बलूचिस्तान में मानवाधिकार के लिए आवाज उठाकर वह सुर्खियों में आईं। बलूचिस्तान लोगों का चेहरा बनीं महरंग बलूच के बारे में यहां विस्तार से जानेंगे।
कौन है महरंग बलूच
1993 में जन्मीं महरंग के पिता अब्दुल गफ्फार लैंगोव एक मजदूर थे। पहले उनका परिवार क्वेटा में रहता था लेकिन मां की बीमारी के इलाज के लिए कराची स्थानांतरित हो गया। महरंग का अब तक का सफर चुनौतियों से भरा रहा है। उनके मानवधिकार कार्यकर्ता बनने के पीछे भी दर्दनाक कहानी है। दरअसल, दिसंबर 2009 में उनके पिता को कराची में अस्पताल ले जाते समय पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने जबरन अपहरण कर लिया था। 16 साल की उम्र में महरंग ने तुरंत पिता को वापस लाने के लिए विरोध करना शुरू कर दिया और छात्र आंदोलनों में जाने लगीं। हालांकि, जुलाई 2011 में उनके पिता को मार दिया गया।
2017 में उनके भाई को भी अगवा कर लिया गया था। इस घटना ने महरंग की पूरी जिंदगी ही बदल दी। अपने भाई को वापस लाने के लिए उन्होंने पाकिस्तान सरकार के खिलाफ आंदोलन शुरू कर दिया। इसके एक साल बाद उनके भाई को वापस कर दिया था। साल 2019 में महरंग ने बलूच यकजेहती समिति (बीवाईसी) की स्थापना की। महरंग पेशे से एक डॉक्टर भी हैं। बलूचिस्तान में उन्हें खूब पसंद किया जाता है। उनकी रैलियों में लाखों की संख्या में लोग शामिल होते हैं। महरंग ने स्कूलों और लोगों के घरों में जाकर अभियान चलाया।
बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना पर लोगों को जबरन गायब करने का आरोप
पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के लोग खुद को पाकिस्तान का हिस्सा नहीं मानते हैं, इसकी वजह से वहां पाकिस्तानी सेना लोगों पर जुल्म करती है। बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना पर लोगों को जबरन गायब करने और उनके फेक एनकाउंटर करने के आरोप लगते रहते हैं। बलूचिस्तान में जबरन गायब करने के मामले 1970 के दशक से सामने आ रहे हैं। हालांकि, 2000 के दशक की शुरुआत से जबरन गायब करना और कथित न्यायेतर हत्याएं बलूचिस्तान में तेज हो गईं। बीते दो दशकों के दौरान, पीड़ित परिवारों को कभी-कभी सहानुभूति तो मिली, लेकिन कभी न्याय नहीं मिला। पिछले कुछ वर्षों में, कई बलूच महिलाओं ने अपने लापता प्रियजन के लिए न्याय की मांग करते हुए इस मुद्दे को वैश्विक रूप से उठाने की कोशिश की है।