पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष दिन-ब-दिन और भयावह होता जा रहा है। अमेरिका और इस्राइल के भीषण हमलों से दहक रहे मोर्चे पर ईरान भी इस्राइल और खाड़ी देशों में मैजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जोरदार पलटवार कर रहा है। मिसाइलों और ड्रोन की गरज के बीच यह संघर्ष अब अपने 31वें दिन में प्रवेश कर चुका है और पूरे क्षेत्र में तनाव अब भी चरम पर है। इसी उग्र हालात के बीच अब अमेरिका और ईरान की बातचीत को लेकर व्हाइट हाउस का बड़ा दावा सामने आया है।
इस बात को ऐसे समझा जा सकता है कि व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत को लेकर सोमवार को सकारात्मक संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि भले ही ईरान की ओर से सार्वजनिक रूप से सख्त बयान दिए जा रहे हों, लेकिन पर्दे के पीछे दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है और सही दिशा में आगे बढ़ रही है।
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ईरान हालात से परेशान- लेविट
अपने बयान में व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव ने आगे बताया कि ईरान की सरकार के कुछ हिस्से अब हालात से परेशान होकर बातचीत के लिए तैयार दिख रहे हैं। उनके अनुसार, ईरान समझता है कि अगर अभी बातचीत नहीं हुई तो उसे और ज्यादा नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि मीडिया में जो खबरें या बयान सामने आ रहे हैं, वे पूरी सच्चाई नहीं दिखाते। असल में निजी तौर पर जो बातचीत हो रही है, वह सार्वजनिक बयानों से काफी अलग है।
तेहरान को सख्त चेतावनी भी दी
करोलिन लेविट ने आगे चेतावनी भी दी कि अगर ईरान समझौता करने से इनकार करता है, तो अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के पास कई विकल्प मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका यह सुनिश्चित करेगा कि ईरान को किसी न किसी रूप में इसकी भारी कीमत चुकानी पड़े।
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ईरान का रुख भी समझिए
हालांकि दूसरी तरफ, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने अमेरिका के दावों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका की तरफ से रखी गई 15 शर्तें बहुत ज्यादा, अवास्तविक और अस्वीकार्य हैं। यह बयान डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे के खिलाफ है, जिसमें उन्होंने कहा था कि ईरान इन शर्तों में से ज्यादातर मानने के लिए तैयार है। कुल मिलाकर, एक तरफ अमेरिका बातचीत को सकारात्मक बता रहा है, जबकि दूसरी तरफ ईरान सार्वजनिक रूप से सख्त रुख दिखा रहा है। ऐसे में दोनों देशों के बीच स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है, लेकिन बातचीत जारी रहने की वजह से समाधान की उम्मीद भी बनी हुई है।