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US: ‘साजिश में ईरान शामिल, लेकिन हमारे पास सबूत नहीं’, इस्राइल पर हमास के हमले को लेकर बोला अमेरिका

Tue, 10 Oct 2023 07:48 AM IST
काव्या मिश्रा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन

सार

व्हाइट हाउस ने कहा कि ईरान लंबे समय से हमास और अन्य आतंकवादी नेटवर्कों को समर्थन देता रहा है। इसलिए स्पष्ट रूप से ईरान शामिल है, लेकिन इसका सबूत नहीं है।
 
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व्हाइट हाउस के राष्ट्रीय सुरक्षा प्रवक्ता जॉन किर्बी हमास-इस्राइल पर बोलते। - फोटो : social media
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विस्तार
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फलस्तीन के आतंकी संगठन हमास के अचानक सात अक्तूबर को इस्राइल पर हमले किए जाने के बाद तनाव बढ़ता जा रहा है। कुछ लोगों का मानना था कि इन हमलों में ईरान की भागीदारी हो सकती है। हालांकि, अब अमेरिका ने स्पष्ट रूप से कहा है कि उसके पास ऐसी कोई खुफिया जानकारी या सबूत नहीं है, जो हमलों में ईरान के शामिल होने की ओर इशारा करता हो। 

व्हाइट हाउस के राष्ट्रीय सुरक्षा प्रवक्ता जॉन किर्बी ने कहा, 'ईरान लंबे समय से हमास और अन्य आतंकवादी नेटवर्कों को समर्थन देता रहा है। इसलिए स्पष्ट रूप से ईरान शामिल है, लेकिन अगर आप सबूतों की बात करते हैं तो हमारे पास कुछ भी नहीं है।’ 

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हिजबुल्ला ने भी की थी पुष्टि

हिजबुल्ला के वरिष्ठ सदस्यों ने भी हाल ही में एक दावा किया है। उसका कहना है कि इस्राइल पर हमला करने में हमास की मदद ईरान ने की है। हिजबुल्ला ने वॉल स्ट्रीट जर्नल को बताया कि ईरान ने इस्राइल पर फलस्तीनी आतंकवादी समूह हमास के हमले की योजना बनाने में मदद की।

पिछले हफ्ते लेबनान की राजधानी बेरूत में एक बैठक के दौरान हमले के लिए मंजूरी दी गई थी। उसने बताया कि देश की सबसे शक्तिशाली सेना इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के अधिकारी अगस्त से हमास के साथ काम कर रहे थे ताकि जमीन, हवा और समुद्र के रास्ते इस्राइल पर हमले की योजना बनाई जा सके।

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बेरूत में कई बैठकों के दौरान इस्राइल पर हमला करने के बारे में चर्चा की गई। इस बैठक में आईआरजीसी के अधिकारियों, हमास और हिजबुल्ला सहित चार ईरान समर्थित आतंकवादी समूहों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। वॉल स्ट्रीट जर्नल की खबर के अनुसार, गाजा पट्टी पर हमास का, जबकि लेबनान में हिजबुल्ला का नियंत्रण है।

हमास और हिजबुल्ला के सदस्यों के अनुसार, ईरानी विदेश मंत्री हुसैन आमिर-अब्दुलाहियान ने अगस्त के बाद से कम से कम दो बैठकों में भाग लिया। इस्राइल पर हमला उस समय किया गया, जब देश में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार को लेकर राजनीतिक कलह चल रही थी। उन्होंने आगे बताया कि हमले का उद्देश्य सऊदी अरब-इस्राइल संबंधों को सामान्य बनाने के लिए अमेरिका की मध्यस्थता वाली वार्ता को बाधित करना भी था क्योंकि ईरान इसे खतरे के रूप में देखता था।

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