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ट्रंप के 'कश्मीर' बयान पर व्हाइट हाउस ने दी सफाई, कहा- अटूट हैं भारत-अमेरिका के रिश्ते

Sat, 27 Jul 2019 03:20 AM IST
Avdhesh Kumar वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
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पीएम मोदी, डोनाल्ड ट्रंप (फाइल फोटो) - फोटो : ANI
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कश्मीर पर मध्यस्थता वाले बयान को लेकर माना जा रहा था कि इससे अमेरिका-भारत के रिश्तों में खटास आ सकती है लेकिन व्हाइट हाउस ने बृहस्पतिवार को इन आशंकाओं पर पूरी तरह विराम लगा दिया। व्हाइट हाउस ने दोनों देशों के बीच रिश्तों को अटूट बताते हुए कहा कि भारत के साथ अमेरिका के रिश्ते बेहद ही अच्छे हैं और ये संबंध लगातार मजबूत भी हो रहे हैं।
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व्हाइट हाउस की काउंसलर केलियाने कॉनवे ने कहा, हमारे (प्रधानमंत्री नरेंद्र) मोदी और भारत सरकार के साथ बहुत अच्छे संबंध हैं और ये संबंध और भी मजबूत हो रहे हैं। ट्रंप के कश्मीर पर बयान के बाद भारत और अमेरिका के रिश्तों के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में कॉनवे ने यह टिप्पणी की। 

हालांकि इसी बीच बृहस्पतिवार को ही विदेश मंत्रालय की अलग से हो रही बैठक में इस मुद्दे पर पूछे जाने पर अमेरिकी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मॉर्गन ओर्टागस ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, राष्ट्रपति के बयान पर फिलहाल मेरे पास कुछ भी कहने के लिए नहीं है। बता दें कि भारत सरकार ने ट्रंप की इस बात को सिरे से खारिज कर दिया है कि प्रधानमंत्री मोदी ने कश्मीर मामले पर उनसे मध्यस्थता का अनुरोध किया था।
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अमेरिकी मीडिया ने ट्रंप के कश्मीर वाले बयान को बताया गलत, कहा- हद दर्जे की कूटनीतिक भूल

अमेरिका के एक शीर्ष समाचार पत्र का मानना है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कश्मीर मामले पर मध्यस्थता की पेशकश संबंधी ‘बड़ी भूल’ करके भारत के साथ रिश्ते सुधारने के लिए पूर्व राष्ट्रपतियों की उपलब्धियों पर पानी फेर रहे हैं। समाचार पत्र के अनुसार ट्रंप ने ऐसा करके ‘हद दर्जे की कूटनीतिक गलती’ की है जो एक महत्वपूर्ण देश को और विमुख कर सकती है।

अमेरिका के राष्ट्रपति ने सोमवार को यह बयान देकर दुनिया को स्तब्ध कर दिया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापान के ओसाका में जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान कश्मीर मामले को सुलझाने में उनकी मदद मांगी थी। ट्रंप के इस बयान के तुरंत बाद भारत ने इसे खारिज करते हुए कहा कि मोदी ने ऐसा कोई अनुरोध नहीं किया और कश्मीर भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय मामला है।

‘द वॉशिंगटन पोस्ट’ की एक रिपोर्ट में कहा गया, ‘ट्रंप ने हद दर्जे की राजनयिक भूल की है।’ उसने कहा, ‘भारत के साथ व्यापार युद्ध के बाद, कश्मीर मामले पर उनकी भूल एक अहम देश को और विमुख कर देगी, जिसकी मित्रता की अमेरिका को चीन के उदय से मुकाबला करने के लिए आवश्यकता है।’ विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इस बात को सिरे से खारिज किया है कि मोदी ने ट्रंप से इस प्रकार का कभी कोई अनुरोध किया है। 

ट्रंप के बयान के बाद अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने अपनी भूल सुधारने की कोशिश करते हुए कहा कि वह कश्मीर को भारत एवं पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय मामला मानता है और वह तभी मदद के लिए तैयार होगा, जब दोनों देश चाहेंगे। शीर्ष अमेरिकी समाचार पत्र ने कहा, ‘राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश और बराक ओबामा ने भारत के साथ संबंधों में सुधार किया, ट्रंप कुछ गलत शब्दों से उनके किए पर पानी फेर रहे हैं।’ 

उसने कहा, वह अफगानिस्तान से अमेरिकी बलों को वापस लाने पर ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं और उन्हें लगता है कि यदि वह पाकिस्तान को खुश करते हैं, तो अमेरिका वहां से सम्मान से साथ निकल पाएगा।
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