हाल ही में ट्रंप की दमनकारी नीति को दर्शाता एक वाकया सामने आया था जब व्हाइट हाउस के बाहर शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे लोगों पर रबर की गोलियां और आंसू गैस के गोले छोड़े गए थे। यह कार्रवाई केवल इसलिए की गई थी कि ट्रंप चर्च पर जाकर तस्वीरें खिंचवा सकें। इस बात से दुखी जूनियर मिलर ने इस्तीफा दे दिया था और एक पत्र लिख कर ट्रंप और मार्क एस्पर का विरोध किया था। इसके बाद से शीर्ष अमेरिकी प्रशासन में ट्रंप के खिलाफ सुर उठने लगे हैं।
अपने ही नागरिकों के खिलाफ सेना का इस्तेमाल करने की धमकी देने के बाद ट्रंप की चारों ओर आलोचना हो रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि देश की सेना का देश के नागरिकों के बगैर कोई अस्तित्व नहीं है। लोग सेना के प्रति बहुत पवित्र भावना रखते हैं इसलिए सेना का जनता के ही खिलाफ इस्तेमाल राजनीतिक होगा और ऐसा नहीं होना चाहिए। वहीं कुछ सैन्य अधिकारी कह रहे हैं कि अगर ऐसा होता है तो लोगों का सेना पर से भरोसा उठ जाएगा।