नंबर कितने भरोसेमंद?
पशु सरक्षंण के लिए अभियान चलाने वाले कहते हैं कि ऐसी भी कई प्रजातियां हैं जिनके बारे में कहा गया कि वे
विलुप्त हो चुकी हैं, लेकिन बाद में उनकी मौजूदगी दर्ज की गई। जैसे ब्राजील में होने वाला खास किस्म का नीला तोता जिसके विलुप्त होने की घोषणा कर दी गई थी। लेकिन साल 2016 में उस नस्ल के एक तोते को देखा गया। इसीलिए कई वैज्ञानिकों का कहना है कि जब किसी जीव के विलुप्त होने के खतरे की बात हो तो सिर्फ नंबरों को देखना ठीक नहीं।
कैसे तय होता है कि कोई प्रजाति विलुप्त होने के खतरे में है?
- एक नस्ल के सभी जीव जब एक जगह रहने लगें। ऐसे में माना जाता है कि किसी एक बीमारी या आपदा के कारण सभी की मौत हो सकती है।
- देखा जाता है कि भौगोलिक रूप से कोई प्रजाति कितने बड़े इलाके में फैली है।
- उनका प्रजनन चक्र कितना लंबा है? और क्या वो जोड़े में बच्चों को जन्म देते हैं या एक बार में एक ही बच्चा देने की क्षमता है।
- वो किस तरह के खतरों का सामना कर रहे हैं?
- क्या उस नस्ल की जनसंख्या में आनुवंशिक रूप से विविधता है?
- उनका आवास किस तरह के खतरे में है और कितने खतरे में है?
आप सरल शब्दों में इसे ऐसे समझ सकते हैं कि किसी एक नस्ल के सिर्फ पांच सौ
जानवर बचे हैं और वहीं दूसरी किसी नस्ल के सिर्फ तीन सौ। लेकिन तीन सौ जानवर अगर बड़े भौगोलिक इलाके में फैले हैं और पांच सौ किसी एक छोटी जगह तक सीमित हैं, तो पांच सौ जानवरों वाली नस्ल को पहले विलुप्तप्राय घोषित किया जाएगा। उष्णकटिबंधीय वर्षा वनों में रहने वाली नस्लों और तेज गर्मी वाले जंगलों में रहने वाली नस्लों के बीच तुलना की जाती है।