ईरान रेड क्रेसेंट सोसायटी के अध्यक्ष पीरहुसैन कोलिवंद ने अमेरिका और इस्राइल पर बड़े आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि ईरान के खिलाफ अपनी कार्रवाई में इन दोनों देशों ने 80,000 से ज्यादा नागरिक ठिकानों को निशाना बनाया है। कोलिवंद ने विदेशी मीडिया से बात करते हुए कहा कि इन हमलों में अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों का उल्लंघन हुआ है।
क्या बोले अधिकारी?
कोलिवंद के अनुसार, 20,000 से ज्यादा हमले अकेले तेहरान में हुए हैं। बाकी 60,000 हमले देश के अन्य इलाकों में हुए। इन हमलों में लगभग 18,790 व्यापारिक संस्थान, 266 मेडिकल सेंटर और 498 स्कूलों को नुकसान पहुंचाया गया है। उन्होंने बताया कि इन हमलों में ईरान के 12 स्वास्थ्यकर्मियों की मौत हुई है और 90 से ज्यादा घायल हुए हैं।
उन्होंने कहा, युद्ध शुरू होने से अब तक सैकड़ों लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। इनमें बच्चे और 231 महिलाएं भी शामिल हैं। कुछ मीडिया रिपोर्टों का दावा है कि इस युद्ध में अब तक 1,500 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं।
ये भी पढ़ें: US: 1971 में बंगाली हिंदुओं पर हुए अत्याचार को 'नरसंहार' घोषित करने की मांग, अमेरिकी संसद में पेश हुआ प्रस्ताव
आईआरजीसी ने किया दावा
इसी बीच, ईरान की सेना (आईआरजीसी) ने दावा किया है कि उसने देश के मध्य हवाई क्षेत्र में इस्राइल के एक एफ-16 लड़ाकू विमान को मार गिराया है। सरकारी मीडिया के मुताबिक, तेहरान की सेना ने तेल अवीव के पास बेन गुरियन एयरपोर्ट पर सैन्य विमानों के ईंधन टैंकों पर भी हमला किया है।
ईरानी प्रवक्ता इब्राहिम जोल्फागरी ने चेतावनी दी है कि अगर संयुक्त अरब अमीरात की जमीन से ईरान पर हमले हुए, तो वे रास अल-खैमाह पर कार्रवाई करेंगे। उन्होंने कहा कि ईरान अपनी संप्रभुता पर होने वाले हर हमले का जवाब उसी जगह देगा जहां से हमला हुआ है।
कैसे शुरू हुआ विवाद?
गौरतलब है कि 28 फरवरी को इस्राइल और अमेरिका ने तेहरान समेत कई शहरों पर हमला किया था। इस हमले में ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई, कई बड़े सैन्य अधिकारी और आम नागरिक मारे गए थे। इसके जवाब में ईरान ने इस्राइल और मध्य पूर्व में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए।
अन्य वीडियो-