पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष में दुनिया के कई देश भी शामिल हो रहे हैं। अमेरिका चाहता है कि उसके सहयोगी देश, जैसे जापान, ब्रिटेन, फ्रांस, अपने युद्धपोत भेजें ताकि होर्मुज रास्ते को सुरक्षित बनाया जा सके। वहीं, जापान ने कहा है कि वह सीधे युद्ध में नहीं उतरेगा, लेकिन अगर युद्धविराम होता है तो वह माइंस (समुद्री बारूदी सुरंग) हटाने में मदद कर सकता है। जापान के लिए यह मामला बहुत गंभीर है, क्योंकि उसका करीब 90% तेल इसी रास्ते से आता है। इसलिए अगर यह रास्ता बंद रहता है, तो दुनियाभर में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं और बड़ा आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है।
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होर्मुज जलडमरूमध्य में अभी क्या हो रहा है?
होर्मुज जलडमरूमध्य इस समय दुनिया के लिए सबसे बड़ा चिंता का विषय बन गया है। यह एक बहुत अहम समुद्री रास्ता है, जहां से दुनिया का करीब 20% तेल और गैस गुजरता है। लेकिन अभी हालात ऐसे हैं कि यहां से जहाजों की आवाजाही लगभग रुक गई है। ईरान ने कहा है कि यह रास्ता पूरी तरह बंद नहीं है, लेकिन उसने एक बड़ी शर्त रख दी है। ईरान के मुताबिक, सिर्फ वही जहाज यहां से गुजर सकते हैं जो उसके दुश्मन देशों से जुड़े नहीं हैं। साथ ही, उन्हें पहले ईरान के साथ सुरक्षा और समन्वय करना होगा। यानी बिना ईरान की मंजूरी अब कोई जहाज आसानी से नहीं निकल सकता।
ट्रंप ने ईरान को दी सख्त चेतावनी
इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि अगर 48 घंटे के अंदर यह रास्ता पूरी तरह नहीं खुला, तो अमेरिका ईरान के पावर इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला कर सकता है। इससे पूरे क्षेत्र में युद्ध का खतरा और बढ़ गया है। ईरान का कहना है कि वह बातचीत के लिए तैयार है और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ मिलकर जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना चाहता है। लेकिन उसने साफ कहा कि असली समस्या अमेरिका और इस्राइल की कार्रवाई है, जिसकी वजह से यह स्थिति बनी है।
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ईरानी संसद का दावा- जहाजों से लिए जा रहे शुल्क
इसी बीच एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है। ईरान के एक सांसद ने दावा किया है कि कुछ जहाजों से होर्मुज से गुजरने के लिए 20 लाख डॉलर (करीब 16-17 करोड़ रुपये) तक का शुल्क लिया जा रहा है। यानी अब यह सिर्फ सुरक्षा नहीं, बल्कि आर्थिक दबाव का भी खेल बन गया है।
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