उत्तर कोरिया ने गुरुवार को कहा कि वह एकतरफा तरीके से अपने परमाणु हथियार बनाना तब तक नहीं छोड़ेगा जब तक अमेरिका परमाणु हथियारों को लेकर अपनी धमकियां बंद नहीं कर देता। उत्तर कोरिया की ओर से आए इस बयान के बाद अब इस बात पर संदेह और अधिक बढ़ गया है कि क्या तानाशाह किम जोंग उन कभी परमाणु हथियार का सहारा छोड़ पाएगा, जिसे वह अपने लिए सबसे जरूरी मानता है।
उत्तर कोरिया की कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी की ओर से ये बयान उस समय आया है जब 12 जून को सिंगापुर में हुई किम और ट्रंप की परमाणु वार्ता में कई वादे किए गए थे। जिसमें उत्तर कोरिया पर से अतंरराष्ट्रीय प्रतिबंध हटाने की बात भी कही गई थी।
सिंगापुर में हुई इस मुलाकात का केवल एक उद्देश्य था, "पूर्ण रूप से निरस्त्रीकरण"। जिसमें कहा गया था कि उत्तर कोरिया कोरियन पेनिनसुएला से सभी हथियार नष्ट कर देगा, लेकिन ऐसा कब और कैसे होगा, इस बारे में कुछ नहीं कहा गया था।
वहीं अमेरिका में भी कई रिपोर्टों में इस बात का खुलासा हुआ था कि प्रतिबंधों के बाद भी उत्तर कोरिया मान नहीं रहा है और परमाणु हथियार बना रहा है। गुरुवार को भी अपने बयान में उत्तर कोरिया ने परमाणु पर अपने पारंपरिक रुख को दोहराया और अमेरिका पर सिंगापुर में हुई सहमति को लेकर भी भ्रामक करने वाले आरोप लगाए।
बयान में कहा गया है, "संयुक्त राज्य अमेरिका को अब कोरियाई प्रायद्वीप के परमाणुकरण के सही अर्थ को पहचानना चाहिए, और खासतौर पर भूगोल का भी सही तरीके से अध्ययन करना चाहिए।"
बयान में आगे कहा गया है, "जब हम कोरियन पेनिनसुएला की बात करते हैं, तो उसमें हमारे गणराज्य का क्षेत्रफल और पूरा क्षेत्र (साउथ कोरिया) भी शामिल है। जहां अमेरिका ने अपना आक्रामक बल तैनात किया है, जिसमें परमाणु शस्त्र भी शामिल है। जब कोरियन पेनिनसुएला में पूर्ण निरस्त्रीकरण की बात करते हैं तो उसका मतलब परमाणु खतरे के सभी स्रोतों को हटाना है, न केवल उत्तर और दक्षिण.. बल्कि कोरियाई प्रायद्वीप के पड़ोसी क्षेत्रों से भी।" बता दें अमेरिका ने दक्षिण कोरिया से अपने सामरिक परमाणु हथियार साल 1990 में ही हटा लिए थे।