सिन फेन पार्टी का संबंध विद्रोही संगठन आइरिश रिपब्लिकन आर्मी (आईआरए) से है जिसने एक समझौते के तहत 1979 में हथियार डाले थे। दरअसल सिन फेन का अतीत आतंकवाद और हिंसा से पटा पड़ा है। हालांकि, वह हमेशा से इससे इनकार करती रही है, मगर उसकी राजनीतिक शाखा आईआरए ने तीन दशक तक उत्तरी आयरलैंड से ब्रिटिश लोगों को बाहर करने और आयरलैंड को एकीकृत करने के लिए रक्तरंजित आंदोलन चलाया था।
इस दौरान 3,500 से ज्यादा लोग मारे गए थे। आईआरए ने अपने आंदोलन के लिए बमबाजी, गोलीबारी और हत्याएं करने का रास्ता अपनाया था। 1998 में सिन फेन के अध्यक्ष गैरी एडम्स ने समझौता कर आयरलैंड में शांति की राह प्रशस्त की थी।
सत्ता का गणित क्या?
आयरिश कानून के अनुसार, संसद के निचले सदन डैल में 160 सीटें हैं। जो पार्टी 80 सीटें जीतेगी, उसे ही नई सरकार बनाने का अधिकार होगा। बीते 14 जनवरी को भंग की गई पिछली डैल में फाइन गेल के पास सबसे अधिक सीटें 47 सीटें थीं, उसके बाद फियाना फेल के पास 45 और सिन फेन के पास 22 सीटें थीं।
दरअसल, आयरलैंड के इतिहास में यह पहली बार है जब तीन पार्टियां लगभग समान स्तर पर एक-दूसरे के साथ चुनावी मैदान में प्रतिस्पर्धा कर रही थीं। बताया जा रहा है कि नई सरकार बनाना मुश्किल होगा, क्योंकि फाइन गेल और फियाना फेल दोनों के नेताओं ने कहा था कि वे भविष्य में बनने वाली सरकार में सिन फेन के साथ गठबंधन नहीं करेंगे।
हालांकि, चुनाव परिणाम के बाद वराडकर (41) ने कहा, फिलहाल गठबंधन के लिए किसी भी तरफ से कोई दबाव नहीं है। भविष्य बताएगा कि सत्ता की सूरत क्या होगी और देश आगे के पांच साल किस तरह से चलेगा। उन्होंने सिन फेन पार्टी से गठबंधन की संभावना से इन्कार किया है। वहीं, फिएना फेल पार्टी के नेता माइकेल मार्टिन ने कहा है कि वह लोकतांत्रिक हैं और सत्ता में शामिल होने या न होने के बारे में लोगों की राय सुनेंगे।
कौन हैं वराडकर
वराडकर 2017 से आयरलैंड के प्रधानमंत्री हैं। वह चिकित्सक भारतीय पिता और आयरिश मां की संतान हैं। उन्होंने अपनी भारतीय पहचान कायम रखी है और मुंबई के किंग एडवर्ड मेमोरियल अस्पताल से उन्होंने मेडिकल प्रेक्टिशनर के रूप में इंटर्नशिप की है। वराडकर बीते दिसंबर में भारत आए थे और महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग जिले में स्थित पूर्वजों के गांव वराड गए थे।
तो यूरोपीय यूनियन से अलगाव की नीति से ब्रिटेन से बढ़ेगी तनातनी
चुनाव में सबसे आगे रही सिन फेन पार्टी ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन की यूरोपीय यूनियन से अलगाव की नीति की कट्टर विरोधी है। अगर वह सत्तारूढ़ होती है तो निश्चित रूप से ब्रिटेन और आयरलैंड में तनातनी बढ़ेगी। यूनाइटेड किंगडम में आयरलैंड ब्रिटेन का सहयोगी है।