Warren Buffett Retires: निवेश के जादूगर वॉरेन बफेट ने भले ही आधिकारिक रूप से बर्कशायर हैथवे के सीईओ का पद छोड़ दिया है, लेकिन वह गैर-कार्यकारी चेयरमैन की भूमिका में कंपनी पर अपनी नजर रखेंगे और सलाह देते रहेंगे।
दुनिया के सबसे सफल एवं ताकतवर निवेशकों में शुमार और मार्केट गुरु वॉरेफ बफेट ने 60 साल बाद अपनी कंपनी बर्कशायर हैथवे के सीईओ पद से हटने की घोषणा कर चौंका दिया। बुधवार बतौर बर्कशायर हैथवे सीईओ उनका आखिर दिन था। ओरेकल ऑफ ओमाहा के नाम से विख्यात 95 वर्षीय बफेट के रिटायर होने के साथ ही अमेरिकी पूंजीवाद को खड़ा करने वाले एक ऐतिहासिक युग का अंत हो गया।
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दिलचस्प बात यह है कि अमीरों की सूची में लंबे समय तक शीर्ष में बने रहने वाले बफेट ने कोई भी बड़ा उद्योग खड़ा नहीं किया, बल्कि अपनी परख के दम पर सिर्फ कंपनियों में निवेश कर दुनिया में बड़ा मुकाम हासिल किया। आज बर्कशायर हैथवे के पास सैकड़ों कंपनियां हैं। इनमें इंश्योरेंस कंपनी गीको, बैटरी बनाने वाली कंपनी ड्यूरासेल और रेस्टोरेंट चेन डेयरी क्वीन शामिल हैं।
कभी पैसा न खोएं: इसका अर्थ है जोखिम प्रबंधन। निवेश करने से पहले यह देखें कि नीचे गिरने की आशंका कितनी है। अगर मूलधन सुरक्षित है, तो मुनाफा अपने आप आएगा।
सर्कल ऑफ कॉम्पिटेंस में रहें: बफेट कहते हैं कि आपको हर चीज का विशेषज्ञ होने की जरूरत नहीं है। बस यह पता होना चाहिए कि आप क्या जानते हैं और क्या नहीं। उन्हीं व्यवसायों में निवेश करें, जिन्हें आप समझते हैं।
लंबी अवधि के लिए निवेश करें: बफेट मानते हैं कि अगर आप किसी स्टॉक को 10 साल तक रखने को तैयार नहीं हैं, तो उसे 10 मिनट के लिए भी न खरीदें। कंपाउंडिंग की ताकत पर भरोसा करें। धन धीरे-धीरे बढ़ता है, रातों-रात नहीं।
वैल्यू और प्राइस का अंतर समझेंः वैल्यू इन्वेस्टिंग के जनक के मुताबिक, प्राइस वह राशि है, जो आप चुकाते हैं। वैल्यू वह गुणवत्ता या फायदा है, जो आपको मिलता है।
अब ग्रेग संभालेंगे 36 लाख करोड़ की तिजोरी
ग्रेग एबल नए साल की शुरुआत यानी गुरुवार से बर्कशायर हैथवे के विशाल साम्राज्य को संभालेंगे। 62 साल के एबल पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं और पिछले कई दशकों से बर्कशायर के बैकस्टेज हीरो रहे हैं। बफेट उन्हें अपनी ऊर्जा मशीन कहते हैं। 1.09 लाख करोड़ डॉलर के नेटवर्थ वाली कंपनी बर्कशायर के तिजोरी में इस वक्त करीब 400 अरब डॉलर (करीब 35.9 लाख करोड़ रुपये) की भारी-भरकम नकदी पड़ी है। मुसीबत यह है कि जब तक ब्याज दरें ज्यादा थीं, यह पैसा खुद बढ़ रहा था। अब दरें गिर रही हैं। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि क्या एबल में भी बफेट जैसी पारखी नजर है, जो संकट को अवसर में बदल देती थी।
बफेट ने इसलिए लिया रिटायरमेंट
बफेट ने पहली बार मई, 2025 में बर्कशायर की सालाना बैठक में रिटायरमेंट योजना का खुलासा किया था। उन्होंने स्वीकार किया था कि अब उनकी याददाश्त धोखा दे जाती है और ऊर्जा भी पहले जैसी नहीं रही। अब कंपनी मेरे बिना भी दौड़ने को तैयार है।