दक्षिण अफ्रीका के उपराष्ट्रपति पॉल माशातिले ने जी-20 देशों से बहुपक्षवाद को रोकने की अपील की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यह वैश्विक विकास और स्थिरता के लिए बड़ा खतरा है।
प्रिटोरिया में थिंक 20 (टी20) अफ्रीका उच्च स्तरीय वार्ता में अफ्रीकी विचार नेताओं की सभा को संबोधित करते हुए माशातिले ने कहा कि बहुपक्षवाद गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है, जो वैश्विक गतिशीलता और रिश्तों को नया आकार दे रहे हैं। इसलिए हमें बहुपक्षवाद के कटाव को गंभीरता से लेना चाहिए और इसका विरोध करना चाहिए, क्योंकि यह वैश्विक विकास और स्थिरता के लिए संभावित खतरा पैदा करता है।
वैश्विक व्यवस्था के भीतर जी-20 में अफ्रीकी एजेंसी को मजबूत करना विषय पर हुए संवाद के जरिये दक्षिण अफ्रीका 2025 की जी-20 बैठक की तैयारी कर रहा है। माशातिले ने कहा कि आर्थिक स्थिरता और सतत विकास के लिए निष्पक्ष, पारदर्शी, न्यायसंगत और समावेशी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था आवश्यक है। उन्होंने भू-राजनीतिक अस्थिरता, जलवायु परिवर्तन, बढ़ते राष्ट्रवाद और व्यापार युद्ध के कारण होने वाली कठिनाइयों के बारे में भी बात की।
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उन्होंने कहा कि वैश्विक आर्थिक विकास धीमा है, कई अर्थव्यवस्थाएं, विशेष रूप से अफ्रीका, अस्थिर ऋण स्तरों के बोझ तले दबी हुई हैं, जबकि अरबों लोग अविकसितता, असमानता, गरीबी और बेरोजगारी से प्रभावित हैं। तमाम चुनौतियां हैं जो हमारी वैश्विक मानवता और राष्ट्रों के बीच एकजुटता की परीक्षा ले रही हैं।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि दक्षिण अफ्रीका अपनी जी-20 अध्यक्षता का उपयोग रोजगार सृजन, लिंग-संवेदनशील नीतियों, अवसरों तक समान पहुंच और वैश्विक वित्तीय प्रणाली में सुधार को प्राथमिकता देने के लिए करेगा। इसमें निष्पक्ष क्रेडिट रेटिंग प्रणाली, सुलभ जलवायु वित्तपोषण और निम्न आय वाले देशों के लिए ऋण राहत शामिल है।
उन्होंने अफ्रीकी संघ को जी-20 के स्थायी सदस्य के रूप में शामिल किए जाने का स्वागत किया तथा इसे वैश्विक शासन में परिवर्तनकारी क्षण बताया। उन्होंने कहा कि जी-20 को पहले से सहमत वैश्विक प्रतिबद्धताओं को पूरा करना चाहिए तथा प्रगति में तेजी लानी चाहिए। दक्षिण अफ्रीका अपने राष्ट्रपति काल के दौरान रंगभेद के तहत अपने ऐतिहासिक अनुभवों से सीख लेते हुए शांतिपूर्ण संघर्ष समाधान को बढ़ावा देगा।
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माशातिले ने कहा कि मेरा मानना है कि एक निष्पक्ष, समावेशी वैश्विक व्यवस्था संभव है, लेकिन इसके लिए समानता, जिम्मेदारी और सहयोग पर आधारित नेतृत्व की आवश्यकता है। जी-20 की ताकत इसकी विविधता और समावेशिता में निहित है। इस ढांचे के भीतर अफ्रीकी एजेंसी को मजबूत करने से न केवल अफ्रीकी राज्य सशक्त होते हैं, बल्कि वैश्विक शासन की विश्वसनीयता और प्रभावकारिता भी बढ़ती है।