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सालों से संकट से जूझ रहा है वेनेजुएला, अब राष्ट्रपति ने मदद लेने के लिए दी मंजूरी

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: Shilpa Thakur Updated Wed, 17 Apr 2019 02:42 PM IST
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वेनेजुएला में संकट - फोटो : social media

दुनियाभर में एक अमीर लैटिन अमेरिकी देश के रूप में पहचान बनाने वाला वेनेजुएला सालों से मानवीय संकट का सामना कर रहा है। यहां की सरकार ने इतने सालों बाद अब जाकर मदद लेना स्वीकार किया है। सरकार ने रेड क्रॉस मानवीय सहायता को मंगलवार को चिकित्सा उपकरणों को भेजने की मंजूरी दे दी है। इतने सालों बाद इस देश में राहत कार्य शुरू हुआ है। जिससे ना केवल भूख से लड़ा जा सकेगा बल्कि बीमारी फैलने से रोकने में भी मदद मिलेगी। 

इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ द रेड क्रॉस एंड रेड क्रिसेंट सोसायटीज के अनुसार राजधानी काराकस में राहत के लिए पहला हेलिकॉप्टर पहुंच चुका है। इससे यहां मेडिकल सप्लाई के अलावा अस्पतालों के लिए पावर जेनेरेटर भी लाए गए हैं। जिससे वेनेजुएला के 6 लाख 50 हजार लोगों को फायदा होगा। माना जा रहा है कि ये सामान आने वाले दिनों में वितरित कर दिया जाएगा। 



यहां स्थानीय सहायता समूहों का कहना है कि जनसंख्या की आवश्यकता बढ़ने के बावजूद, मानवीय सहायता मिलना राष्ट्रपति निकोसल मादुरो और विपक्ष के बीच राजनीतिक लड़ाई बन जाता है। उनकी इस राजनीतिक लड़ाई से लोगों की जान जा रही है।

मंगलवार को यहां रेड क्रॉस के अध्यक्ष ने कहा कि इस मदद को राजनीतिक विवाद में नहीं उलझाया जाना चाहिए। अध्यक्ष ने राजनेताओं से सहयोग देने को कहा है। एजेंसी ने कहा कि सीरिया में गृह युद्ध की शुरुआत के बाद से वेनेजुएला में राहत अभियान उनका सबसे बड़ा अभियान होगा। 

यह भी पढ़ें- वेनेजुएला: बड़े राजनीतिक संकट में फंसा एक अमीर देश, 34 दिनों से ब्लैकआउट, लोग बेहाल 

हाल की में आई संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में ये बात सामने आई है कि वेनेजुएला की चौथाई जनसंख्या को भोजन और बुनियादी आपूर्ति की सख्त जरूरत है। और इस आवश्यकता के आगे और बढ़ने की संभावना है। 
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वहीं अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने भी ये अनुमान लगाया है कि इस साल वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था 25 फीसदी तक गिर सकती है। वहीं यहां बुनियादी ढांचे में भी नुकसान जारी रहेगा।

संयुक्त राष्ट्र का ये भी कहना है कि रोजाना वेनेजुएला के 5500 लोग देश छोड़कर जा रहे हैं। जो कि दुनियाभर के शरणार्थी संकटों में से एक है। यहां सहायक सामग्री पर नियंत्रण की कोशिश सत्ताधारी सरकार के साथ साथ विपक्ष भी करता रहा है। फरवरी में जब विपक्ष के नेता जुआन गुइदो ने सहायक सामग्री देश में लाने की कोशिश की तो भी मादुरो सरकार ने नाकेबंदी कर दी, जिससे सामान देश में नहीं आ सका था।

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वेनेजुएला में संकट - फोटो : social media
दुनियाभर में एक अमीर लैटिन अमेरिकी देश के रूप में पहचान बनाने वाला वेनेजुएला सालों से मानवीय संकट का सामना कर रहा है। यहां की सरकार ने इतने सालों बाद अब जाकर मदद लेना स्वीकार किया है। सरकार ने रेड क्रॉस मानवीय सहायता को मंगलवार को चिकित्सा उपकरणों को भेजने की मंजूरी दे दी है। इतने सालों बाद इस देश में राहत कार्य शुरू हुआ है। जिससे ना केवल भूख से लड़ा जा सकेगा बल्कि बीमारी फैलने से रोकने में भी मदद मिलेगी। 

इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ द रेड क्रॉस एंड रेड क्रिसेंट सोसायटीज के अनुसार राजधानी काराकस में राहत के लिए पहला हेलिकॉप्टर पहुंच चुका है। इससे यहां मेडिकल सप्लाई के अलावा अस्पतालों के लिए पावर जेनेरेटर भी लाए गए हैं। जिससे वेनेजुएला के 6 लाख 50 हजार लोगों को फायदा होगा। माना जा रहा है कि ये सामान आने वाले दिनों में वितरित कर दिया जाएगा। 

यहां स्थानीय सहायता समूहों का कहना है कि जनसंख्या की आवश्यकता बढ़ने के बावजूद, मानवीय सहायता मिलना राष्ट्रपति निकोसल मादुरो और विपक्ष के बीच राजनीतिक लड़ाई बन जाता है। उनकी इस राजनीतिक लड़ाई से लोगों की जान जा रही है।

मंगलवार को यहां रेड क्रॉस के अध्यक्ष ने कहा कि इस मदद को राजनीतिक विवाद में नहीं उलझाया जाना चाहिए। अध्यक्ष ने राजनेताओं से सहयोग देने को कहा है। एजेंसी ने कहा कि सीरिया में गृह युद्ध की शुरुआत के बाद से वेनेजुएला में राहत अभियान उनका सबसे बड़ा अभियान होगा। 

यह भी पढ़ें- वेनेजुएला: बड़े राजनीतिक संकट में फंसा एक अमीर देश, 34 दिनों से ब्लैकआउट, लोग बेहाल 

हाल की में आई संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में ये बात सामने आई है कि वेनेजुएला की चौथाई जनसंख्या को भोजन और बुनियादी आपूर्ति की सख्त जरूरत है। और इस आवश्यकता के आगे और बढ़ने की संभावना है। 

वहीं अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने भी ये अनुमान लगाया है कि इस साल वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था 25 फीसदी तक गिर सकती है। वहीं यहां बुनियादी ढांचे में भी नुकसान जारी रहेगा।

संयुक्त राष्ट्र का ये भी कहना है कि रोजाना वेनेजुएला के 5500 लोग देश छोड़कर जा रहे हैं। जो कि दुनियाभर के शरणार्थी संकटों में से एक है। यहां सहायक सामग्री पर नियंत्रण की कोशिश सत्ताधारी सरकार के साथ साथ विपक्ष भी करता रहा है। फरवरी में जब विपक्ष के नेता जुआन गुइदो ने सहायक सामग्री देश में लाने की कोशिश की तो भी मादुरो सरकार ने नाकेबंदी कर दी, जिससे सामान देश में नहीं आ सका था।

वेनेजुएला में संकट - फोटो : social media

क्या है कारण?

वेनेजुएला की इस हालत का जिम्मेदार और कोई नहीं बल्कि यहां के राजनेता हैं। वर्तमान में यहां निकोलस मादुरो की सरकार है। वह साल 2013 से देश के राष्ट्रपति का पद संभाल रहे हैं। बीते साल यहां राष्ट्रपति चुनाव हुए थे। इन चुनावों में भी निकोलस मादुरो ने जीत हासिल की। वह दूसरी बार देश के राष्ट्रपति बने। 

लेकिन मादुरो के चुनाव जीतने के बाद विपक्षी पार्टी के नेता जुआन गुइगो ने उनपर चुनावों में गड़बड़ी का आरोप लगाया। गुइदो ने एक विरोध प्रदर्शन के दौरान खुद को राष्ट्रपति घोषित कर दिया। गुइदो ने राजधानी कराकास में जब पहली रैली की थी, तो उसमें देशभर से 2.5 लाख लोग शामिल हुए थे। 

वहीं अमेरिका ने भी इस काम में गुइदो का साथ दिया। अमेरिका ने कहा कि 'पूर्व राष्ट्रपति मादुरो' के पास अब कोई अधिकार नहीं है। अमेरिका ने सेना से भी अपील करते हुए कहा कि गुइदो का ही समर्थन करें। 11 महीनों से दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक टकराव चल रहा है। सरकार ने गुइदो पर 15 साल का प्रतिबंध लगाया है। संविधान सभा में भी गुइदो के खिलाफ वोटिंग हुई है। 

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