फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शाकाहार बना दुनिया की पहली पसंद, शाक-पात खाने वालों में हुआ 94 फीसदी का इजाफा

Sun, 30 Sep 2018 02:21 PM IST
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
शाकाहारी बनाम मांसाहारी
विज्ञापन
आप जो खाते हैं उसका प्रभाव आपकी सेहत पर सबसे ज्यादा पड़ता है। स्वस्थ रहने के लिए पौष्टिक और ताजा खाना हम सभी चाहते हैं चाहे वो मांसाहारी हो या शाकाहारी। शाकाहारी और मांसाहारी भोजन में क्या ज्यादा बेहतर है इसे लेकर अक्सर बहस होती है। लेकिन दुनिया भर में खाने-पीने का चलन कुछ इस तरह बदला है कि लोग ज्यादा मांसाहारी की बजाय शाकाहारी खाना ज्यादा पसंद कर रहे हैं।
विज्ञापन


अमेरिका में लोगों के वेज-नॉन वेज खाने की पसंद पर एक अध्ययन किया गया है। यहां के रेस्त्रां कंसलटेंसी ग्रुप 'बाैम व्हाइटमैन' की हालिया रिपोर्ट में साल 2018 के फूड ट्रेंड के बारे में बताया गया है। इस अध्ययन में खासतौर पर युवा पीढ़ी की पसंद-ना पसंद को शामिल किया गया है जिसमें चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। नेस्ले के आधिकारिक बयान के तहत सामने आया है कि 1980 के बाद की युवा जनरेशन तेजी से शाकाहार की ओर बढ़ी है। 

वहीं शाकाहार की ओर लोगों के बढ़ते चाव का आलम ये है कि हेल्दी वेजीटेरियन फूड्स की मांग में 94 फीसदी का इजाफा हुआ है। डेटा रिलीज करने वाली एक अन्य संस्था ग्रब हब की रिपोर्ट में भी सामने आया है कि वर्ष 2017 के पहली छमाही में वर्ष 2016 की पहली छमाही की तुलना में वेगन यानी की पूर्णत: शाकाहारी उत्पादों की मांग में 19 फीसदी का इजाफा हुआ है।
विज्ञापन


अध्ययन के तथ्य
3 सालों में अमेरिका के लोगों ने 600 फीसदी बार ज्यादा गूगल पर सर्च किया वेजिटेरियन उत्पादों के बारे में। 
2014 में जहां 1 फीसदी ग्राहक ही वेगन होने की बात कबूलते थे, वहीं 2017 में यह आंकड़ा बढ़कर 6 फीसदी हो गया। 
350 प्रतिशत का इजाफा शाकाहारी भोजन की मांग, यूके में इस एक दशक के दौरान देखा गया है। 
कनाडा सरकार ने जारी की फूड गाइड-2017, खासतौर से प्लांट बेस्ड फूड यानी की शाकाहारी को तवज्जो देने का ड्राफ्ट है शामिल ।
50 प्रतिशत मीट कंजम्प्शन की बात चीन सरकार की नई डाइटरी गाइडलाइन में भी कही गई है। 
चीन के वेगन मार्केट में वर्ष 2015 से 2020 के दौरान 17 फीसदी की बढ़त होगी। 
हांगकांग में करीब 22 फीसदी जनसंख्या शाकाहार से जुड़े उत्पादों की ओर आकर्षित हुई है। 
 

इस तरह 37.5 करोड़  वैश्विक जनसंख्या शाकाहार पर निर्भर है और पूरी तरह से शाकाहारी भी है। डेयरी से जुड़े उत्पादों पर काम करने वाली वैश्विक संस्था के अनुसार हालिया सालों में प्राकृतिक दूध की मांग में तेजी से इजाफा हुआ है। वर्ष 2018 में इसका बाजार 1160 अरब रुपए है, जबकि वर्ष 2010 में यह बाजार महज 430 अरब रुपए का था। ऑनलाइन ग्रॉसरी उपलब्धता में भी 222 फीसदी का इजाफा हुआ है। 

विज्ञापन

हरी सब्जियां
शाकाहार क्यों बेहतर 
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा 38,000 वयस्कों पर की गई एक रिसर्च में सामने आया कि मांसाहार खाने वालों की तुलना में शाकाहारियों का बॉडी मास इंडेक्स बेहद कम रहा। वहीं अमेरिकन जर्नल ऑफ क्लिनिकल में भी रिपोर्ट सामने आई जिसमें 10 हजार शाकाहारियों और मांसाहारियों पर शोध में पाया गया कि ओवरवेट लोग जिन्होंने शाकाहारी उत्पादाें का इस्तेमाल किया वे कम समय में अपना वजन घटा पाए। 

लोमा लिंडा यूनिवर्सिटी की एक रिसर्च में 70 हजार वयस्कों पर शोध किया गया। इसमें पाया गया कि 50 वर्ष से ऊपर के जिन लोगों ने लगातार 6 वर्ष तक शाकाहारी भाेजन किया, मांसाहारियों की तुलना में उनकी मौत का आंकड़ा 12 फीसदी कम था। इसी तरह अल्जाइमर भी शाकाहारियों की तुलना में मांसाहारियों में 3 गुना ज्यादा पाया गया। 

दुनिया में शाकाहारी
07%  अमेरिकी पूरी तरह से शाकाहार का सेवन कर रहे हैं।
31% भारतीय भी सिर्फ शाकाहार का सेवन ही करते हैं।
10% यूरोपियन लोगों ने भी कभी मांसाहारी भोजन का सेवन नहीं किया। 

मांसाहार का नुकसान
70 लाख जिंदगियां हर साल गंभीर बीमारी का शिकार हो जाती और उनकी मौत भी हो जाती है।ऑक्सफोर्ड मार्टिन स्कूल फ्यूचर ऑफ फूड प्रोग्राम में एक अध्यनकर्ता मार्को स्प्रिंगमैन के मुताबिक अगर मांसाहारी भोजन करना बंद कर दिया जाये तो खाद्य सामग्रियों से जुड़े उत्सर्जन में 60% की गिरावट आ जाएगी। यह रेड मीट से मुक्ति के कारण होगा क्योंकि रेड मीट मिथेन गैस उत्सर्सिज करने वाले पशुओं से मिलता है जो सेेहत के लिए हानिकारक होता है।
 
तो आप भी अगर ज्यादा मांसाहारी भोजन करते हैं तो इससे होने वाले नुकसान को लेकर सतर्क हो जायें। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें