भारत ने सबसे पहले खाड़ी से निकासी पर ध्यान इसलिए केंद्रित किया, क्योंकि यूएई का रवैया अपने देश में फंसे विदेशी नागरिकों से कतई मित्रवत नहीं था। वह कोविड-19 के बढ़ते प्रकोप के बाद अन्य देशों की सरकारों से अपने नागरिकों को ले जाने का दबाव बनाने लगी थी। मालदीव से 1 हजार भारतीयों को समंदर के रास्ते लाए जाने की तैयारी की गई है। विदेशों से जिन लोगों को देश में वापस लाया जाएगा उन्हें क्वारंटीन सेंटर्स में रखा जाएगा। यहां रहने का खर्च भी इन नागरिकों को खुद ही उठाना होगा।
एयर इंडिया की हालत किसी से छिपी नहीं है। लगातार घाटा झेल रही इस सरकारी एयरलाइंस की हिस्सेदारी तक बेचने का फैसला लिया गया। एयरलाइंस सेक्टर में लगातार बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण एयर इंडिया की सेहत बिगड़ने लगी। अब जब सरकार ने यह घोषणा कर दी है कि इस एयरलिफ्ट का खर्चा नागरिकों से ही वसूला जाएगा तो एयर इंडिया भी अपनी इन उड़ानों के लिए वाणिज्यिक किराया वसूल रही है। यूएस और यूके के टिकटों पर क्रमशः 1 लाख और 50,000 रुपये का खर्च आएगा। ढाका-दिल्ली उड़ान के लिए किराया सीमा 12,000 रुपये से शुरू होगा। दुबई-कोच्चि इस मिशन के उच्चतम मांग मार्गों में से एक हैं, इसका प्रति व्यक्ति किराया 15,000 रुपये होगा। इसके अलावा, कोई भी उड़ान खाली नहीं आएगी-जाएगी क्योंकि कमर्शियल फ्लाइट्स बंद हो जाने के कारण कोई भी भारतीय, विदेशी या एनआरआई इस सेवा का लाभ उठा सकता है। 64 उड़ानों में यूएई से 10 उड़ानें, कतर- 2, सऊदी अरब- 5, यूके- 7, सिंगापुर- 5, यूनाइटेड स्टेट्स -7, फिलीपींस- 5, बांग्लादेश- 7, बहरीन - 2, मलेशिया-7, कुवैत- 5, और ओमान से 2 उड़ाने संचालित होंगी।