अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप की जीत के साथ ही बीते कई महीने से चल रही चुनावी उठा-पटक शांत हो गई है। हालांकि अब ट्रंप की जीत और कमला हैरिस की हार के कारणों की समीक्षा भी शुरू हो गई है। भारतवंशी अमेरिकी सांसद श्री थानेदार ने बताया कि कमला हैरिस की हार की क्या वजह रही और अमेरिकी जनता ने किन मुद्दों पर वोट किया।
कमला हैरिस एक अच्छी नेता
श्री थानेदार ने कहा कि 'कमला हैरिस की हार दिल तोड़ने वाली है। ये कुछ ऐसा है, जिसकी हम उम्मीद नहीं कर रहे थे, लेकिन अब डेमोक्रेटिक पार्टी को हार की समीक्षा करनी चाहिए और ये समझना चाहिए कि लोग क्या कहना चाहते हैं।' थानेदार ने कमला हैरिस की तारीफ की और कहा कि उन्होंने बहुत अच्छा चुनाव लड़ा। उन्हें प्रचार के लिए कम समय मिला, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने पूरे देश की यात्रा की और लोगों को प्रेरित किया। उन्होंने कभी हार न मानने का जज्बा दिखाया। वो बेशक हार गई हैं, लेकिन ये लड़ाई लंबी चलेगी और आखिर में हम ही इसे जीतेंगे। कमला हैरिस ने अपनी हार स्वीकारी और ट्रंप को जीत की बधाई भी दी। उन्होंने दिखाया कि वह एक अच्छी नेता हैं।
कमला हैरिस की हार की ये रही वजह
भारतवंशी सांसद ने अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में डेमोक्रेट पार्टी की हार की वजह बताते हुए कहा कि 'लोग बढ़ती महंगाई से परेशान हैं। खासकर कामकाजी वर्ग बढ़ती महंगाई और अपने खर्चों से काफी परेशान है। लोगों को अपने परिवार का पालन पोषण करने और बच्चों की पढ़ाई में काफी आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। लोगों की खरीददारी की क्षमता कमजोर हुई है और लोगों को लगा कि इसकी वजह बाइडन-कमला हैरिस सरकार है। डोनाल्ड ट्रंप ने लोगों की परेशानी समझी और लोगों को यह यकीन दिलाने की कोशिश की कि वे बदलाव ला सकते हैं, जिसकी वजह से लोगों ने उनका समर्थन किया।'
रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर भी लोगों में नाराजगी
डेमोक्रेट पार्टी से मिशिगन से सांसद थानेदार ने कहा कि 'कोरोना के बाद देश में आर्थिक हालात थोड़े खराब हुए। लोग बढ़ती महंगाई, आपूर्ति की समस्या से परेशान रहे। लोगों ने देश में बढ़ती अवैध अप्रवासियों की समस्या के लिए भी बाइडन-हैरिस प्रशासन को जिम्मेदार माना। साथ ही यूक्रेन- इस्राइल युद्ध से भी लोग नाराज थे। डोनाल्ड ट्रंप ने इस समस्याओं को जमकर जनता के सामने उछाला और लोगों को लगा कि ट्रंप इन समस्याओं से छुटकारा दिला सकते हैं।' हालांकि उन्होंने कहा कि ट्रंप के सामने चुनौतियां भी कम नहीं हैं क्योंकि जो उन्होंने जनता से वादे किए हैं, अब उन्हें वो पूरे करने होंगे और अगर वो ऐसा नहीं कर पाए तो दो साल बाद फिर से संसद के चुनाव होंगे और लोग उन्हें भी दंड देंगे।
भारत अमेरिका संबंधों पर क्या बोले भारतवंशी सांसद
डोनाल्ड ट्रंप की जीत के बाद भारत-अमेरिका के संबंधों पर पड़ने वाले असर पर थानेदार ने कहा कि 'ट्रंप के कार्यकाल में भारत के साथ अमेरिका के संबंध मजबूत हो सकते हैं, लेकिन ट्रंप ने भारत, चीन और अन्य देशों पर टैरिफ लगाने की बात भी कही थी। इसका आर्थिक तौर पर और दोनों देशों के बीच होने वाले व्यापार पर असर जरूर पड़ेगा। साथ ही ये भी सवाल रहेगा कि क्या ट्रंप अल्पसंख्यकों और पूरे विश्व में हिंदुओं के मानवाधिकारों की सुरक्षा कर सकेंगे? ये देखने वाली बात होगी।'