पीएम मोदी और जस्टिन ट्रूडो (फाइल तस्वीर)
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भारत और कनाडा के बीच के रिश्ते दिन पर दिन बिगड़ते जा रहे हैं। इसी क्रम में टोरंटो स्थित भारतीय महावाणिज्य दूतावास ने अपने कुछ निर्धारित वाणिज्य दूतावास शिविरों को रद्द कर दिया है। इसके पीछे की वजह कनाडा की ओर से पर्याप्त सुरक्षा न मुहैया कराया जाना बताई गई है। भारतीय दूतावास के मुताबिक, सुरक्षा एजेंसियों ने सामुदायिक शिविर आयोजकों को न्यूनतम सुरक्षा प्रदान करने में अपनी असमर्थता जताई है। इस वजह से हमें अपने कार्यक्रम रद्द करने पड़े हैं।
यह कदम ब्रैम्पटन में हिंदू सभा मंदिर और भारतीय वाणिज्य दूतावास द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित एक वाणिज्य दूतावास कार्यक्रम में खालिस्तानी झंडे लेकर पहुंचे प्रदर्शनकारियों के हमले की घटना के कुछ दिनों बाद उठाया गया। तीन नवंबर को ब्रैम्पटन में हिंदू सभा मंदिर में विरोध प्रदर्शन हुआ और सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में प्रदर्शनकारियों को खालिस्तान के समर्थन में बैनर थामे देखा जा सकता है। प्रदर्शनकारियों ने लोगों के साथ मारपीट की और वाणिज्य दूतावास के कार्यक्रम को बाधित किया।
यहां से और बिगड़ने लगे हालात
दरअसल, भारत और कनाडा के बीच उस वक्त और तल्खी आ गई, जब प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो सरकार के एक मंत्री ने दावा किया कि कनाडा में सिख अलगाववादियों पर एक्शन का आदेश अमित शाह की ओर से दिया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, कनाडा के विदेश उप-मंत्री डेविड मॉरिसन ने एक संसदीय पैनल में यह बयान दिया था।
बिना किसी सबूत के दावा करने की बात स्वीकारी
हालांकि, बाद में मॉरिसन ने राष्ट्रीय सुरक्षा समिति की पूछताछ में स्वीकार किया कि उन्होंने ही बिना किसी सबूत के वाशिंगटन पोस्ट के पत्रकार को शाह के नाम की जानकारी लीक की थी। इस अखबार ने लिखा था कि अमित शाह ने कनाडा में सिख अलगाववादियों को निशाना बनाकर हिंसा, धमकी और खुफिया जानकारी जुटाने का अभियान चलाने का आदेश दिया।
भारत ने जताया था विरोध
अमित शाह के खिलाफ लगाए गए आरोपों को लेकर भारत ने नाराजगी जताई थी। मामले में सख्त रुख अपनाते हुए भारत ने कनाडाई अधिकारी को तलब किया था। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था कि हमने कल कनाडाई उच्चायोग के प्रतिनिधि को तलब किया। भारत सरकार कनाडा सरकार में मंत्री डेविड मॉरिसन की ओर से समिति के समक्ष भारत के केंद्रीय गृह मंत्री के बारे में किए गए बेतुके और निराधार आरोपों का सबसे कड़े शब्दों में विरोध करती है।