अमेरिका में कोरोना वायरस संक्रमण की रोकथाम के लिए फाइजर/ बायोएनटेक के वैक्सीन को लगाने का काम शुरू होते ही एक नई चिंता पैदा हो गई है। ऐसी खबरें मिल रही हैं कि टीकाकरण के क्रम में बड़े घोटाले हो सकते हैं। साथ ही वैक्सीन के वितरण को लेकर कुछ लोग दुष्प्रचार का अभियान चला सकते हैं। कुछ सरकारी एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि कुछ घोटालेबाज टीका लगवाने के बदले संवेदनशील निजी सूचनाएं लोगों से मांग रहे हैं। इसके अलावा कुछ विक्रेता कोविड-19 का इलाज करने का दावा करते हुए फर्जी सामग्रियां बेच रहे हैं।
अमेरिकी खुफिया संस्था एफबीआई ने टीवी चैनल सीएनएन को भेजे एक पत्र में कहा है कि घोटालेबाज कोरोना वायरस के वैक्सीन में लोगों की भारी दिलचस्पी का फायदा उठा रहे हैं। वे विभिन्न प्रकार की स्कीम बेचने का दावा कर रहे हैं और इसके बदले निजी सूचनाएं और धन मांग रहे हैं। एफबीआई ने इसे देखते हुए निगरानी की विशेष योजना बनाई है।
इस बीच सीएनएन की एक खबर के मुताबिक अमेरिका का आव्रजन एवं कस्टम प्रवर्तन (आईसीई) विभाग कोरोना वायरस की ऐसी दवाओं की बिक्री रोकने की कोशिशों में जुटा है, जिन्हें अभी मंजूरी नहीं मिली है। उधर अमेरिका के फेडरल ट्रेड कमीशन ने सात कंपनियों को चेतावनी पत्र भेजा है। इन कंपनियों पर वैज्ञानिक रूप से अमान्य दावे करते हुए दवाएं बेचने का आरोप है। अधिकारियों ने कहा है कि वैक्सीन जारी होने के बाद घोटालेबाज कई तरीकों से फायदा उठाने की कोशिश करेंगे। फर्जी वैक्सीन बेचना भी उनमें एक तरीका है।
जानकारों का कहना है कि जिस किसी चीज को लेकर अनिश्चय होता है और जिसमें लोगों की भारी दिलचस्पी होती है, उसमें घोटाले की संभावना बनी रहती है। कोरोना महामारी इस बात की बेहतर मिसाल है। अधिकारियों ने कहा है कि वे इस स्थिति के लिए पहले से तैयारी कर रहे थे। इसलिए अब मिल रही खबरों से उन्हें कोई अचरज नहीं हुआ है।
सरकारी एजेंसी बेटर बिजनेस ब्यूरो ने लोगों को सलाह दी है कि घोटाले से बचने के लिए वे सावधानी बरतें। लोगों से कहा गया है कि वे अपने निजी डॉक्टर की सलाह पर चलें, तुरंत लाभ दिलाने का दावा करने वाले फोन कॉल्स पर ध्यान ना दें, और किसी भी स्रोत से जो सूचना उन्हें मिले उसकी वे पूरी जांच पड़ताल करें।
अमेरिका में फिलहाल वैक्सीन के 29 लाख डोज पहुंच रहे हैं। लेकिन देश में जितनी मांग है, उसकी तुलना में ये संख्या बेहद कम है। खासकर यह देखते हुए कि हर व्यक्ति को वैक्सीन का दो डोज लेना होगा। फिर सबसे पहले स्वास्थ्य-कर्मियों और सार्वजनिक कर्मचारियों को वैक्सीन लगाए जाएंगे। इसलिए आम लोगों के लिए वैक्सीन की उपलब्धता अभी भी ना के बराबर है।
हालांकि वैक्सीन से जुड़े घोटालों की चिंता अब पैदा हुई है, लेकिन अमेरिका में महामारी के दौरान राहत देने वाले कथित स्कीम पहले से समस्या बने हुए हैँ। जब से महामारी शुरू हुई, फेडरल ट्रेड कमीशन को 20 हजार से ज्यादा शिकायतें मिल चुकी हैं। ये शिकायतें टेस्टिंग किट उपलब्ध कराने, फर्जी चिकित्सा और महामारी से संबंधित सहायता देने के बारे में आए एसएमएस या फोन कॉल्स जुड़ी हुई हैँ।
जानकारों का कहना है कि जिस बात को लेकर लोग डरे हुए हों, उसमें घोटालेबाज कूद पड़ें यह कोई नई बात नहीं है। उनके मुताबिक ऐसे लोगों से धोखा खाने से बचने का एकमात्र तरीका यही है कि खुद को उपलब्ध सही जानकारियों से वाकिफ रखा जाए।