अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को देश के सरकारी सहायता प्राप्त मीडिया समूह- वॉइस ऑफ अमेरिका (VoA) को बड़ा झटका दिया। ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर कर वीओए को सरकारी आर्थिक मदद पर रोक लगा दी। साथ ही इस संस्थान पर ट्रंप विरोधी होने के आरोप भी लगाए। व्हाइट हाउस की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया कि इस आदेश से यह तय होगा कि अमेरिकी टैक्स प्रदाताओं की रकम कट्टरपंथी प्रोपगैंडा फैलाने के काम न आ सकें। इस बयान में दक्षिणपंथी नेताओं और मीडिया के वीओए की आलोचना वाले बयानों का भी जिक्र किया गया।
अमेरिका में एक सरकारी मदद से चलने वाले मीडिया संस्थान पर बंदी की तलवार लटकने के बाद दुनियाभर में ट्रंप के इस कदम की चर्चा है। दरअसल, वॉइस ऑफ अमेरिका, जो कि मुख्यतः रेडियो सेवा के तौर पर काम करता है, को तब स्थापित किया गया था जब दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी के नाजी शासन का प्रोपगैंडा तेजी से फैल रहा था। ऐसे में अमेरिका ने वीओए को तेजी से बढ़ावा दिया। दुश्मनों के खिलाफ नैरेटिव सेट करने और सहयोगी देशों की आवाज करोड़ों लोगों तक पहुंचाने के लिए वॉइस ऑफ अमेरिका की अहम भूमिका मानी जाती है। हालांकि, बीते कुछ वर्षों में यह संस्थान लगातार विवादों में घिरा है। फिर चाहे वह ट्रंप का पहला कार्यकाल हो, या जो बाइडन का पिछला कार्यकाल और या फिर ट्रंप का मौजूदा शासन। हर बार वीओए चर्चा का केंद्र बना है।
डोनाल्ड ट्रंप ने वॉइस ऑफ अमेरिका की फंडिंग रोकने से जुड़े आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं।
- फोटो : PTI/Cold War Radio Museum
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को देश के सरकारी सहायता प्राप्त मीडिया समूह- वॉइस ऑफ अमेरिका (VoA) को बड़ा झटका दिया। ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर कर वीओए को सरकारी आर्थिक मदद पर रोक लगा दी। साथ ही इस संस्थान पर ट्रंप विरोधी होने के आरोप भी लगाए। व्हाइट हाउस की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया कि इस आदेश से यह तय होगा कि अमेरिकी टैक्स प्रदाताओं की रकम कट्टरपंथी प्रोपगैंडा फैलाने के काम न आ सकें। इस बयान में दक्षिणपंथी नेताओं और मीडिया के वीओए की आलोचना वाले बयानों का भी जिक्र किया गया।
अमेरिका में एक सरकारी मदद से चलने वाले मीडिया संस्थान पर बंदी की तलवार लटकने के बाद दुनियाभर में ट्रंप के इस कदम की चर्चा है। दरअसल, वॉइस ऑफ अमेरिका, जो कि मुख्यतः रेडियो सेवा के तौर पर काम करता है, को तब स्थापित किया गया था जब दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी के नाजी शासन का प्रोपगैंडा तेजी से फैल रहा था। ऐसे में अमेरिका ने वीओए को तेजी से बढ़ावा दिया। दुश्मनों के खिलाफ नैरेटिव सेट करने और सहयोगी देशों की आवाज करोड़ों लोगों तक पहुंचाने के लिए वॉइस ऑफ अमेरिका की अहम भूमिका मानी जाती है। हालांकि, बीते कुछ वर्षों में यह संस्थान लगातार विवादों में घिरा है। फिर चाहे वह ट्रंप का पहला कार्यकाल हो, या जो बाइडन का पिछला कार्यकाल और या फिर ट्रंप का मौजूदा शासन। हर बार वीओए चर्चा का केंद्र बना है।
ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर वॉइस ऑफ अमेरिका क्या है? अमेरिका की आवाज दुनिया तक पहुंचाने में इस मीडिया संगठन की क्या भूमिका रही थी? भारत में वीओए ने कब से कब तक सेवाएं दीं? इसके अलावा यह संस्थान कब-कब विवादों में घिरा? ट्रंप और बाइडन सरकार में हुए विवाद कैसे वीओए के लिए मुश्किल बढ़ाने वाले साबित हुए? आइये जानते हैं...
क्या है वॉइस ऑफ अमेरिका, इसका इतिहास?
1. दूसरा विश्व युद्ध
वॉइस ऑफ अमेरिका को पूरी तरह सरकारी मीडिया समूह नहीं कहा जा सकता। विश्व युद्ध की शुरुआत में सरकारी नियंत्रण में लिए जाने से पहले तक अमेरिका के सभी रेडियो चैनल निजी हाथ में थे। हालांकि, 1941 में जब दूसरा विश्व युद्ध चरम पर था, तब राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी रूजावेल्ट (एफडीआर) ने एक विदेशी सूचना सेवा (एफआईएस) की शुरुआत की। रॉबर्ट शेरवुड इसके पहले निदेशक बने। फरवरी 1942 तक एफआईएस ने अपना प्रसार क्षेत्र यूरोप तक बढ़ा दिया। इस दौरान एक मौका ऐसा आया, जब शेरवुड ने कहा कि अमेरिका आपके लिए सच सामने लाएगा। चाहे वह अच्छा हो या बुरा। यह सच होगा वॉइस ऑफ अमेरिका।
द्वितीय विश्व युद्ध में वॉइस ऑफ अमेरिका ने अमेरिकी परिप्रेक्ष्य का प्रसार जारी रखा। माना जाता है कि जर्मनी और जापान जैसे देशों के खिलाफ अलायड फोर्सेज (गठबंधन सेना) के सैनिकों का हौसला बढ़ाने में वीओए ने अहम भूमिका निभाई। हालांकि, विश्व युद्ध के बाद एक बार फिर वीओए किनारे लगा दिया गया।
Trump: ट्रंप ने वित्तपोषित समाचार एजेंसी वॉयस ऑफ अमेरिका को बंद करने का दिया आदेश, पक्षपाती होने का लगाया आरोप
2. शीत युद्ध
वॉइस ऑफ अमेरिका का उदय एक बार फिर तब हुआ, जब अमेरिका एक और संकट से जूझ रहा था। यह समस्या थी सोवियत संघ के साथ शीत युद्ध की। वीओए के जरिए तब अमेरिका ने सोवियत समर्थक देशों में लोकतंत्र का सपना पहुंचाया और वामपंथ का विरोध शुरू कर दिया। अमेरिकी विदेश नीति के प्रसार के लिए वॉइस ऑफ अमेरिका अहम हथियार साबित हुआ।
1976 में तत्कालीन राष्ट्रपति गेराल्ड फोर्ड ने इसे चार्टर के जरिए सरकारी मदद के लिए चिह्नित समूह बना लिया था। वीओए की पूरी फंडिंग अमेरिका की एजेंसी फॉर ग्लोबल मीडिया (USAGM) संभालती है, जो कि संसद की मंजूरी के बाद हर साल फंड्स जारी करती है।
3. शीत युद्ध के बाद
वॉइस ऑफ अमेरिका की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शीत युद्ध में अमेरिकी सरकार के एजेंडे के प्रसार का यह जरिया काफी प्रचलित हुआ। आखिरकार 1980 के दशक में जब सोवियत संघ का टूटना शुरू हुआ, तब अमेरिकी सरकार ने वीओए को और बढ़ावा दिया इस मीडिया संस्थान ने तिब्बत, कुर्दिश (ईरान से इराक), सर्बो-क्रोएशियाई (क्रोएशिया, सर्बिया और बोस्निया), मैसेडोनिया और रवांडा-रुंडी में अपनी सेवाओं को शुरू किया।
पहले कब हुई बंद करने की कोशिश?
1993 में सोवियत संघ का विघटन पूरा हो जाने के बाद राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने वॉइस ऑफ अमेरिका के अंतर्गत शुरू किए गए दो संस्थानों- रेडियो फ्री यूरोप/रेडियो लिबर्टी की फंडिंग कम करने का फैसला किया था। हालांकि, अमेरिका में क्लिंटन के इस प्रस्ताव की आलोचना शुरू हो गई।
कब-कब विवादों में घिरा VoA और इससे जुड़ी सेवाएं?
1. खराब प्रबंधन और ताकत का गलत इस्तेमाल
- 12 जून 2024 को अमेरिकी संसद की विदेश मामलों की समिति ने वॉइस ऑफ अमेरिका की फारसी सेवा के पूर्व निदेशक पर लगे भ्रष्टाचार के कथित आरोपों पर सबूतों को तथ्यात्मक तौर पर सही माना था। उन पर निजी हित के लिए मीडिया संस्थान के गलत इस्तेमाल और कुछ कर्मचारियों को फायदा पहुंचाने के आरोप लगे थे।
- इसी तरह वीओए के अप्रैल 2007 में ईरान के सुन्नी-सलफी मुस्लिम समूह- जुनदुल्लाह के प्रमुख अब्दुल मलिक रिगी का इंटरव्यू करने पर विवाद हो चुका है। रिगी के अल-कायदा से कथित संबंधों को लेकर अमेरिकी मीडिया समूह को आलोचना का सामना करना पड़ा था।
2. ट्रंप के पहले कार्यकाल में राजनीतिकरण के आरोप
2017 में जब डोनाल्ड ट्रंप राष्ट्रपति बने, तब वीओए के कुछ ट्वीट्स को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। वीओए ने व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव के कुछ बयानों का समर्थन किया था, जिसे पक्षपाती मीडिया कवरेज कहा गया। हालांकि, वॉइस ऑफ अमेरिका ने इसे लेकर बाद में सफाई भी जारी की थी।
इसके बाद ट्रंप पर वॉइस ऑफ अमेरिका में अपने एजेंडे को प्रसारित कराने की कोशिशों के भी आरोप लगे। इतना ही नहीं ट्रंप प्रशासन के कुछ अधिकारियों पर भी दक्षिणपंथी एजेंडे को थोपने के आरोप लगने लगे। अमेरिका के कई निजी मीडिया समूहों ने इसे लेकर खबरें छापीं। आखिरकार 2021 में बाइडन ने राष्ट्रपति बनने के बाद वीओए में की गई कई नियुक्तियों और ट्रंप के कुछ फैसलों को पलट दिया।
3. चीन को लेकर लगे आरोपों पर
- वॉइस ऑफ अमेरिका के प्रसारण के तरीकों पर चीन ने भी सवाल उठाए हैं। खासकर तिब्बत में अमेरिकी एजेंडा प्रसारित करने और यहां के लोगों को भड़काने को लेकर चीन ने कई आरोप लगाए।
- इतना ही नहीं वॉइस ऑफ अमेरिका की मंदारिन (चीन की भाषा) सेवा चीन के रियल एस्टेट टाइकून गुओ वेनगुई के इंटरव्यू को लेकर भी विवादों में घिर चुकी है। दरअसल, गुओ ने एक समय आरोप लगाया था कि उनके पास चीन के सबसे ताकतवर राजनीतिक संस्थान- पोलितब्यूरो स्टैंडिंग कमेटी के सदस्यों के खिलाफ भ्रष्टाचार के सबूत हैं। चीन ने इस इंटरव्यू को लेकर वीओए को चेतावनी भी दी थी।