चीन के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट 'वन बेल्ट वन रोड'(ओबीओआर) पर भारत की चिंताओं को अमेरिका ने भी समझा है। अमेरिका ने कहा कि अरबों डॉलर के इस प्रोजेक्ट पर भारत की चिंता का वह समर्थन करता है। भारत एकमात्र ऐसा देश है जिसने ओबीओआर प्रोजेक्ट का विरोध किया है क्योंकि इससे भारत की संप्रुभता को खतरा है। चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर पीओके से होकर गुजरेगा, जो भारत का अभिन्न अंग है।
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग निजी तौर पर ओबीओआर प्रोजेक्ट को पूरा करना चाहते हैं। इसके माध्यम से एशियाई देशों के अलावा अफ्रीका, चीन और यूरोप के साथ संपर्क बढ़ेगा। दक्षिण व केंद्रीय एशिया मामलों की प्रधान उप सचिव एलिस वेल्स ने कहा कि इस मामले में हम भारत के साथ है। इस प्रोजेक्ट का कोई आर्थिक आधार नहीं है और इससे देशों की संप्रभुता को खतरा होगा।
उन्होंने कहा कि श्रीलंका ने कुछ अहम संपत्तियों पर अपनी संप्रभुता से समझौता किया है। कर्ज तले दबे इस देश ने 2017 में दक्षिण समुद्री बंदरगाह हंबनटोटा को 99 साल के लिए चीन को सौंप दिया है। खास बात यह है कि हंबनटोटा राष्ट्रपति राजपक्षे का गृह नगर है।
ग्वादर पोर्ट के निर्माण पर वेल्स ने कहा कि इससे भारत की चिंता बढ़ेगी क्योंकि इसके व्यावसायिक आधार अभी तक स्पष्ट नहीं है। यह प्रोजेक्ट लंबे समय से चल रहा है और बाहरी लोगों को अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो सकता है कि इस आर्थिक आधार क्या है। उन्होंने कहा कि ओबीओर की योजना ज्यादा मजदूर, ज्यादा पूंजी और ज्यादा उत्पादन सुविधाओं के लिए बनाई गई थी। चीन अपनी घरेलू समस्याओं को सुलझाने के लिए दूसरे देशों के हितों को दांव पर लगा रहा है।