डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से उपराष्ट्रपति पद के लिए कमला हैरिस की उम्मीदवारी को लेकर प्रभावशाली भारतीय-अमेरिकियों ने मिली-जुली प्रतिक्रिया दी है।
ज्यादातर मतदाताओं का मानना हैं कि उनके पास इस बात की समझ ही नहीं है कि वह किस मुद्दे के लिए खड़ी हैं और वह ना ही खुद को भारतीय मूल की महिला मानती हैं। हालांकि विभिन्न भारतीय-अमेरिकी समूहों को उनपर गर्व भी है, लेकिन लोगों को संदेह है कि हैरिस भारत से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों से निपटने में सक्षम होंगी। हैरिस के चयन के बाद 39 लाख भारतीय-अमेरिकियों की मिश्रित प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
प्रतिष्ठित ओक्लाहोमा स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर पद्म श्री पुरस्कार विजेता सुभाष काक हैरिस के चयन से प्रसन्न हैं, लेकिन उनके राजनीतिक जुड़ाव से वह खुश नहीं हैं। उन्होंने कहा कि मैं उनके राजनीतिक स्थिति से निराश हूं जो भारत के अनुकूल नहीं हैं।
अमेरिका में हिंदुओं के हितों का प्रतिनिधित्व करने वाली अमेरिकन फॉर हिन्दू के संस्थापक आदित्य सत्संगी मानते हैं कि हैरिस को भारतीय-अमेरिकी वोटों को विभाजित करने के लिए डेमोक्रेट द्वारा योजनाबद्ध तरीके से लाया गया है।
उन्होंने कहा कि हैरिस ने हमेशा भारतीय के बजाय अफ्रीकी मूल के होने का दावा किया है और कैलिफोर्निया में एक वकील के रूप में उनका रिकॉर्ड बेहद संदिग्ध है।