जो बाइडन प्रशासन की स्पष्ट घोषणा के बावजूद ज्यादातर पर्यवेक्षकों को इस बात पर भरोसा नहीं है कि इस बार सचमुच ग्वांतानामो बे स्थित जेल को बंद कर दिया जाएगा। गौरतलब है कि 2008 में बराक ओबामा ने ऐसा करने का वादा करते हुए राष्ट्रपति चुनाव जीता था। लेकिन अपने आठ साल के कार्यकाल में वे ये वादा पूरा करने से हिचकते रहे। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अमेरिकी सीमा से बाहर जेल कायम रखने के समर्थक हैं। इसलिए उनके कार्यकाल में इस जेल को बंद करने की बात एजेंडे से बाहर रही।
ग्वांतामानो बे अमेरिकी सीमा से बाहर समुद्री तट है, जिस पर अमेरिका कब्जा है। इस जेल को 11 सितंबर 2001 को अमेरिका पर हुए आतंकवादी हमलों के बाद बनाया गया था। जॉर्ज बुश जूनियर प्रशासन के दौरान पकड़े गए कथित आतंकवादियों को यहां इसलिए रखा गया, ताकि अमेरिकी कानूनों के तहत जिन नागरिक अधिकारों की व्यवस्था है, उसके लाभ से वे वंचित रहें।
अमेरिका में यातना देना गैर-कानूनी है। आरोप है कि ग्वांतानामो बे में रखे गए कैदियों को अमानवीय यातनाएं दी गईं। इस जेल ने नागरिक अधिकारों के रक्षक के रूप में अमेरिकी दावे और उसकी प्रतिष्ठा को सबसे गहरी चोट पहुंचाई।
अब जो बाइडन प्रशासन ने कहा है कि वह ग्वांतानामो बे स्थित जेल की पूरी समीक्षा करेगा। इसके तहत इसे बंद करने पर भी विचार किया जाएगा। व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी जेन साकी से पूछा गया कि क्या समीक्षा में जेल को बंद करने की बात भी आएगी। इस पर उन्होंने कहा- ‘निश्चित रूप से। यही हमारा मकसद और इरादा है।’
इसके पहले अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की प्रवक्ता एमिली हॉर्न ने कहा था कि ग्वांतानामो बे स्थित जेल को बंद करने के बाइडन प्रशासन के व्यापक उद्देश्य के अनुरूप इस बारे में पूरी समीक्षा की जाएगी। इस जेल में अभी 40 कैदी हैं। इन सभी लोगों को बिना कोई मुकदमा चलाए लंबे समय से यहां बंद करके रखा गया है।
जो बाइडन ने पिछले चुनाव अभियान के दौरान वादा किया था कि राष्ट्रपति बनने पर वे इस जेल को बंद कर देंगे। लेकिन उनकी बात पर तब ज्यादा भरोसा नहीं किया गया। बाइडन बराक ओबामा के जमाने में उप-राष्ट्रपति थे। तब ओबामा-बाइडन प्रशासन ने इस मामले में वादाखिलाफी की थी। इसलिए बाइडन ने जब ये वादा किया, तो माना गया था कि वे नागरिक अधिकार समर्थक समूहों को लुभाने के लिए ये बात कह रहे हैं।
बराक ओबामा ने 2007 में कहा था- ‘अबू गरैब के अंधेरे कमरों और ग्वांतानामो के हिरासत केंद्रों में हमने अपने सबसे बहुमूल्य उसूलों से समझौता किया है।’ उस समय ओबामा सीनेट के सदस्य थे। अबू गरैब इराक में एक अस्थायी जेल थी, जहां इराक युद्ध के दौरान अमेरिकी फौजियों ने बंदी बनाकर रखे गए लोगों पर अकथनीय अत्याचार किए थे।
2009 में राष्ट्रपति बनने के बाद दूसरे ही दिन ओबामा प्रशासन ने एक ऑर्डर जारी किया था, जिसमें साल भर के अंदर ग्वांतानामो बे जेल को बंद करने का निर्देश दिया गया था। उन्होंने सीआईए को उन तमाम जेलों को बंद करने का निर्देश भी दिया था, जहां कैदियों को यातनाएं दी जाती थीं। लेकिन इस आदेश पर अमल नहीं हुआ।
ओबामा प्रशासन के न्याय मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और कांग्रेस (अमेरिकी संसद) के कई सदस्यों के विरोध के कारण 2011 तक ओबामा को अपना ये इरादा छोड़ना पड़ा। 2015 में अपने एक भाषणा में ओबामा ने कहा- ‘काश, मैं अपने कार्यकाल के पहले दिन ग्वांतानामो बे जेल को बंद कर पाता। लेकिन इस पर हुई राजनीति बहुत सख्त साबित हुई। इस कारण इसे हमें साल-दर-साल टालना पड़ा।’ ओबामा ने जब ट्रंप प्रशासन को सत्ता सौंपी, उस समय भी ग्वांतानामो बे में 41 कैदी मौजूद थे।
इसीलिए अब 12 साल बाद ओबामा कार्यकाल में उपराष्ट्रपति रहे बाइडन के प्रशासन ने जब समीक्षा की बात कही है, तो इस पर शक बना हुआ है कि सचमुच इस बार ये जेल बंद हो पाएगी। सवाल यह उठाया है कि क्या एक बार फिर अमेरिका का सिक्युरिटी एस्टैब्लिशमेंट राष्ट्रपति की इच्छा पर भारी पड़ेगा? वैसे भी ये जेल अब अगर बंद होती भी है, तब भी अमेरिका के लिए वो प्रतिष्ठा वापस पाना मुश्किल होगा, जिसे इस जेल के कारण उसे गंवानी पड़ी है।