फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Nobel Prize: ट्रंप का दर्द छलका, कहा- कुछ भी करूं, नोबेल नहीं मिलेगा; PAK ने अमेरिकी राष्ट्रपति को नामित किया

Sat, 21 Jun 2025 04:40 AM IST
शुभम कुमार वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन

सार

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर कहा है कि उन्होंने दुनिया में शांति लाने के कई काम किए, जैसे भारत-पाक युद्ध रोकना, मिडिल ईस्ट में समझौते कराना, फिर भी उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा कि लोगों को सब पता है, वही मेरे लिए काफी है। हालांकि, ये भी दिलचस्प है कि पाकिस्तान ने ट्रंप को नोबेल के लिए नामित किया है।

विज्ञापन
डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति - फोटो : ANI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पाकिस्तान 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को नामित करेगा। पाकिस्तान का कहना है कि भारत-पाकिस्तान जंग के दौरान ट्रंप के कूटनीतिक दखल और मध्यस्थता ने एक बड़े युद्ध को टालने में मदद की। हालांकि ट्रंप ने कहा कि मैं कितने भी युद्ध रोक लूं, कुछ भी कर लूं लेकिन मुझे नोबेल सम्मान नहीं मिलेगा।

पाकिस्तान सरकार ने शनिवार को कहा कि उसने हाल ही में भारत-पाकिस्तान संघर्ष के दौरान निर्णायक कूटनीतिक हस्तक्षेप और महत्वपूर्ण नेतृत्व के लिए 2026 के नोबल शांति पुरस्कार के लिए डोनाल्ड ट्रंप के नाम की औपचारिक रूप से सिफारिश करने का फैसला किया है। यह एलान ट्रंप के व्हाइट हाउस में पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर की मेजबानी के तीन दिन बाद की गई। सूत्रों का दावा है कि पाकिस्तान की ओर से नोबेल शांति पुरस्कार के लिए ट्रंप को नामित करने के वादे पर ही मुनीर को व्हाइट हाउस में आमंत्रित किया गया था। ट्रंप लगातार यह दावा करते रहे हैं कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष को रुकवाया। हालांकि भारत उनके दावे को सिरे से खारिज कर चुका है और कहा कि भारतीय सुरक्षा बलों के भीषण जवाबी हमले के कारण पाकिस्तान को जंग रोकने के लिए गुहार लगानी पड़ी।

 पाकिस्तान ने कहा, ट्रंप ने दो परमाणु संपन्न देशों के बीच व्यापक संघर्ष को टाला

विज्ञापन

पाकिस्तान ने अपनी पोस्ट में कहा कि क्षेत्रीय अशांति बढ़ने के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने पाकिस्तान और भारत के साथ मजबूत कूटनीतिक जुड़ाव के जरिये शानदार रणनीतिक दूरदर्शिता और शानदार राजनेता के रूप में परिचय दिया। उन्होंने तेजी से बिगड़ती स्थिति को संभाला। इससे आखिरकार युद्धविराम सुनिश्चित किया जा सका और दो परमाणु संपन्न देशों के बीच व्यापक संघर्ष को टाला जा सका। इसके क्षेत्र तथा उससे परे लाखों लोगों के लिए विनाशकारी परिणाम हो सकते थे। यह भी कहा कि यह हस्तक्षेप वास्तविक शांतिदूत के रूप में ट्रंप की भूमिका और बातचीत के जरिये संघर्ष के समाधान के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रमाण है।

 कश्मीर मुद्दे पर ट्रंप की पेशकश को भी स्वीकारा
पाकिस्तान ने कश्मीर मुद्दे को हल करने में मदद करने के लिए ट्रंप की गंभीर पेशकश को भी स्वीकार किया। पाकिस्तान ने पोस्ट में कहा कि पाकिस्तान-भारत संकट के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप का नेतृत्व व्यावहारिक कूटनीति और प्रभावी शांति-निर्माण की उनकी विरासत की निरंतरता को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। इसमें कहा गया कि पाकिस्तान को उम्मीद है कि ट्रंप के ईमानदार प्रयास क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता में योगदान देते रहेंगे, खासकर पश्चिम एशिया में जारी संकटों के संदर्भ में जिसमें गाजा में हो रही मानवीय त्रासदी और ईरान से जुड़ी बिगड़ती स्थिति शामिल है।

 मुझे अब तक 4-5 बार नोबेल पुरस्कार मिल जाना चाहिए था: ट्रंप

विज्ञापन

 इससे पहले ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच ट्रूथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा कि मुझे यह बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि मैं विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ मिलकर कांगो और रवांडा के बीच संघर्ष रोकने के लिए एक अद्भुत संधि करा रहा हूं। इस संघर्ष को अन्य युद्धों की तुलना में कहीं अधिक हिंसक रक्तपात और मौतों के लिए जाना जाता है और दशकों तक यह जारी रहा। उन्होंने कहा कि रवांडा और कांगो के प्रतिनिधि दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने के लिए सोमवार को वाशिंगटन में होंगे। यह अफ्रीका और पूरी दुनिया के लिए महान दिन है। हालांकि उन्होंने कहा कि मुझे इसके लिए नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिलेगा। मुझे भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध रोकने के लिए नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिलेगा, मुझे सर्बिया और कोसोवो के बीच युद्ध रुकवाने के लिए पुरस्कार नहीं मिलेगा। मुझे मिस्र और इथियोपिया के बीच शांति बनाए रखने के लिए पुरस्कार नहीं मिलेगा। मुझे पश्चिम एशिया में अब्राहम समझौते के लिए नोबल शांति पुरस्कार नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा कि यदि सब कुछ ठीक रहा तो बहुत देशों के हस्ताक्षर इस समझौते पर होंगे और युगों में पहली बार पश्चिम एशिया को एकीकृत करेगा। उन्होंने कहा कि मुझे अब तक नोबल शांति पुरस्कार 4-5 बार मिल जाना चाहिए था लेकिन वे मुझे यह पुरस्कार नहीं देंगे क्योंकि वे इसे केवल लिबरल को देते हैं। उन्होंने कहा कि मैं चाहे कुछ भी कर लूं, चाहे रूस-यूक्रेन और इस्राइल-ईरान हो, परिणाम जो भी हों मुझे नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिलेगा।
 

नोबेल शांति पुरस्कार के लिए ऐसे होता है नामांकन
नोबेल शांति पुरस्कार के लिए कोई भी व्यक्ति किसी को नामित नहीं कर सकता है। किसी देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, सांसद, अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के न्यायाधीश, नोबेल शांति पुरस्कार के पूर्व विजेता, यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर, नोबेल समिति के मौजूदा व पूर्व सदस्य, कुछ विशेष संगठनों-संस्थाओं के प्रमुख किसी व्यक्ति या संगठन-संस्था को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित कर सकते हैं। इस पुरस्कार के लिए पंजीकरण सितंबर में शुरू होगा। इसकी आखिरी तारीख का अभी एलान नहीं किया गया है। 2025 के नोबल शांति पुरस्कार के लिए नामांकन की आखिरी तारीख 31 जनवरी थी।


ये भी पढ़ें:- Voice of America: बंद होने के कगार पर 83 साल पुराना अमेरिकी न्यूज चैनल, ट्रंप प्रशासन ने 639 पत्रकारों को निकाला

ईरान के मुद्दे पर ट्रंप ने अपनी ही खुफिया एजेंसी को बताया गलत
वहीं दूसरी ओर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के परमाणु हथियार को लेकर उनकी खुफिया एजेंसी की जानकारी गलत है। पत्रकारों ने ट्रंप से इस पर सवाल पूछा तो उन्होंने कहा कि तो मेरी खुफिया एजेंसी गलत है। जब बताया गया कि ये बात तुलसी गबार्ड ने कही है, तो ट्रंप ने साफ कहा, वो गलत हैं। बता दें कि अमेरिका की खुफिया एजेंसी की प्रमुख तुलसी गबार्ड ने मार्च में संसद में बताया था कि अमेरिका की एजेंसियों के मुताबिक ईरान ने अब तक परमाणु बम बनाने का कोई फैसला नहीं किया है। बता दें कि हाल ही में ट्रंप के साथ लंच करने व्हाइट हाउस गए पाकिस्तानी सेना प्रमुख ने भी ट्रंप को नोबेल दिए जाने का समर्थन किया था। इसी बीच पाकिस्तान ने औपचारिक रूप से भी ट्रंप को नामित कर दिया है, ऐसी खबरें सामने आई हैं।

विज्ञापन


ये भी पढ़ें:- Iran vs US: 'मुस्लिम देशों की संप्रभुता के लिए खतरा हैं अमेरिकी सैन्य अड्डे', ईरान ने की इन्हें हटाने की अपील

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें