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US: ट्रंप के दबाव से सक्रिय हुआ न्याय विभाग, एपस्टीन मामले के ग्रैंड जूरी रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की तैयारी

Sat, 19 Jul 2025 09:43 AM IST
हिमांशु चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन

सार

अमेरिका के न्याय विभाग ने कोर्ट से मांग की है कि जेफ्री एपस्टीन और घिसलेन मैक्सवेल केस के ग्रैंड जूरी रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाएं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश के बाद यह कदम उठाया गया है। ट्रंप ने एक आपत्तिजनक पत्र को झूठा बताते हुए डब्ल्यूएसजे की रिपोर्ट को मानहानिपूर्ण बताया। कोर्ट रिकॉर्ड जारी करने से पहले पीड़ितों की पहचान छुपाने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
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डोनाल्ड ट्रंप - फोटो : PTI
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विस्तार
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जेफ्री एपस्टीन मामले में अमेरिका की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। ट्रंप प्रशासन की भूमिका पर उठते सवालों के बीच अब अमेरिकी न्याय विभाग ने एक बड़ा कदम उठाया है। विभाग ने अदालत से अनुरोध किया है कि वह एपस्टीन और उनकी सहयोगी घिसलेन मैक्सवेल से जुड़े ग्रैंड जूरी रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की अनुमति दे।
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यह कार्रवाई तब शुरू हुई जब द वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि 2003 में एपस्टीन के जन्मदिन पर एक ऐसा पत्र सामने आया है जिस पर ट्रंप का नाम है और उसमें अश्लील भाषा का प्रयोग किया गया है। हालांकि ट्रंप ने इस पत्र को पूरी तरह फर्जी और बदनाम करने वाला बताया है।

ट्रंप के निर्देश पर न्याय विभाग की पहल
न्याय विभाग के डिप्टी अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लांच ने शुक्रवार को अदालत में आवेदन दायर कर ग्रैंड जूरी की गवाही से संबंधित रिकॉर्ड को सार्वजनिक करने की मांग की। इन रिकॉर्ड्स में एपस्टीन के साथ-साथ घिसलेन मैक्सवेल केस की ग्रैंड जूरी ट्रांसक्रिप्ट भी शामिल हैं। यह कार्रवाई राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस निर्देश के बाद हुई जिसमें उन्होंने कहा था कि ऐसे सभी रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाएं।गौरतलब है कि पिछले हफ्ते ही न्याय विभाग ने घोषणा की थी कि वह एपस्टीन की जांच से संबंधित कोई और दस्तावेज सार्वजनिक नहीं करेगा, जिसके बाद प्रशासन की आलोचना तेज हो गई थी।
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पत्र को लेकर मचा बवाल, ट्रंप ने दी सफाई
इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब वॉल स्ट्रीट जर्नल ने एक 2003 के एल्बम का ज़िक्र किया, जिसमें एपस्टीन के जन्मदिन पर दिए गए उपहारों और पत्रों का संग्रह था। उसी एल्बम में ट्रंप के नाम वाला एक पत्र सामने आया, जिसमें महिलाओं के बारे में आपत्तिजनक बातें लिखी थीं। ट्रंप ने साफ शब्दों में इस पत्र से किसी भी तरह के संबंध से इनकार करते हुए कहा कि उन्होंने ऐसा कुछ कभी नहीं लिखा और यह पूरी तरह झूठा, दुर्भावनापूर्ण और मानहानिपूर्ण है।

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जस्टिस डिपार्टमेंट करेगा जरूरी जानकारी को सुरक्षित
न्याय विभाग ने कोर्ट से कहा है कि अगर ट्रांसक्रिप्ट्स को सार्वजनिक करने की अनुमति मिलती है तो वे न्यूयॉर्क के अभियोजकों के साथ मिलकर पीड़ितों से जुड़ी निजी जानकारियों और अन्य संवेदनशील विवरणों को हटाने का काम करेंगे। ग्रैंड जूरी की गवाही आमतौर पर अदालत की निगरानी में सीलबंद रहती है, और केवल तभी सामने लाई जाती है जब वह किसी न्यायिक कार्रवाई के लिए जरूरी हो।

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कानूनी प्रक्रिया में कितना समय लगेगा?
हालांकि न्याय विभाग की सिफारिश के बावजूद, इन रिकॉर्ड्स के सार्वजनिक होने में कई हफ्तों या महीनों का समय लग सकता है। कानूनी प्रक्रियाओं के तहत कोर्ट को यह तय करना होगा कि क्या-क्या जानकारी जारी की जाए और किन हिस्सों को गोपनीय रखा जाए। ऐसे में यह भी देखा जाएगा कि कहीं किसी गवाह की सुरक्षा या पीड़ितों की गोपनीयता को खतरा तो नहीं होगा। इन मामलों में कोर्ट पूरी सतर्कता के साथ निर्णय लेती है।

मैक्सवेल केस से भी जुड़ा है मामला
गौरतलब है कि ब्रिटिश सोशलाइट घिसलेन मैक्सवेल को पहले ही नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण के मामलों में दोषी ठहराया जा चुका है। एपस्टीन और मैक्सवेल पर आरोप था कि उन्होंने कई वर्षों तक अमीर और शक्तिशाली लोगों के लिए नाबालिग लड़कियों की तस्करी की। अब जब ट्रंप का नाम भी एक दस्तावेज के जरिए इस मामले से जोड़ा जा रहा है, तो यह मामला और भी अधिक संवेदनशील हो गया है। आने वाले समय में इस केस की गूंज अमेरिकी राजनीति में और तेज हो सकती है।

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