एक अमेरिकी न्यायाधीश ने ट्रंप प्रशासन को ग्वाटेमाला के उन बच्चों को निर्वासित करने से अस्थायी रूप से रोक दिया, जो बिना परिवार के सीमा पार कर अमेरिका पहुंचे थे। न्यायाधीश ने आदेश दिया कि इन बच्चों को कम से कम 14 दिनों तक निर्वासित नहीं किया जा सकता।
अदालत से ट्रंप प्रशासन को झटका लगा है। एक अमेरिकी न्यायाधीश ने रविवार (स्थानीय समयानुसार) को अस्थायी रूप से ट्रंप प्रशासन को ग्वाटेमाला के उन बच्चों को निर्वासित करने से रोक दिया, जो बिना परिवार के सीमा पार कर अमेरिका पहुंचे थे। बच्चों के वकीलों ने अदालत को बताया कि इन्हें रातों-रात विमानों में बैठाकर वापस भेजा जा रहा था, जबकि कानून ऐसे प्रवासी बच्चों को खास सुरक्षा देता है। ऐसा करना कानून का उल्लंघन है।
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10 ग्वाटेमाला के 10 से 17 वर्ष की आयु के नाबालिगों के वकीलों ने शनिवार देर रात (स्थानीय समयानुसार) अदालत में दस्तावेज दायर किए, जिसमें कहा गया है कि ऐसे खबरें थीं कि कुछ घंटों के भीतर ही बच्चों को लेकर विमान ग्वाटेमाला रवाना होने वाले थे।
बच्चों को 14 दिनों तक निर्वासित न करने का आदेश
हालांकि, वाशिंगटन की एक संघीय न्यायाधीश ने आदेश दिया कि इन बच्चों को कम से कम 14 दिनों तक निर्वासित नहीं किया जा सकता। रविवार (स्थानीय समयानुसार) को त्वरित सुनवाई के बाद न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि बच्चों को विमान से उतारकर फिर से शरणार्थी पुनर्वास केंद्र कार्यालयों में रखा जाए, जब तक कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती।
ग्वाटेमाला के सभी नाबालिगों पर लागू होता है आदेश
न्यायाधीश स्पार्कल एल. सूकननन ने कहा, 'मैं नहीं चाहती कि इसमें कोई भ्रम रहे।' उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आदेश उन सभी ग्वाटेमाला के नाबालिगों पर लागू होता है, जो अमेरिका बिना माता-पिता या अभिभावक के पहुंचे हैं।
सरकारी वकीलों का दावा- माता-पिता के अनुरोध पर वापस भेजे जा रहे थे बच्चे
इस बीच, सरकारी वकीलों का कहना है कि बच्चों को निर्वासित नहीं जा रहा था, बल्कि उनके माता-पिता या अभिभावकों के अनुरोध पर वापस भेजा जा रहा था। हालांकि, बच्चों के वकीलों ने इस दावे पर सवाल उठाए हैं और कहा कि कई मामलों में यह सही नहीं है।