पहले जानें- अमेरिका में ईरान संघर्ष को लेकर पर्दे के पीछे क्या-क्या हो रहा?
अमेरिका में ईरान संघर्ष को लेकर पर्दे के पीछे रणनीतिक, सैन्य और राजनीतिक स्तर पर कई गोपनीय गतिविधियां चल रही हैं।
गुप्त बैठकों का दौर कब-कहां हुआ?
- उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कैंप डेविड में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वरिष्ठ राष्ट्रीय सुरक्षा टीम की कई घंटे लंबी अघोषित बैठक की अध्यक्षता की।
- बैठक में विदेश मंत्री मार्को रुबियो, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ, सीआईए निदेशक जॉन रैटक्लिफ और शीर्ष सैन्य प्रमुख डैन केन शामिल थे।
- बैठक में ईरान नीति के साथ-साथ यमन में सऊदी-हूती संघर्ष पर गोपनीय चर्चा की गई और आगे के रणनीतिक विकल्पों को अंतिम रूप दिया गया।
अमेरिका ने पश्चिम एशिया में बढ़ाई सैनिकों की तैनाती।
- फोटो : अमर उजाला
जनमत और राष्ट्रपति की अप्रूवल रेटिंग
- क्विनिपियाक पोल के मुताबिक, पंजीकृत मतदाताओं में से सिर्फ 28% ट्रंप की ओर से युद्ध से निपटने के तरीके का समर्थन करते हैं, जबकि 66% लोग इसे नापसंद करते हैं। इसका असर मध्यावधि चुनाव में पड़ने की आशंका है।
- डेमोक्रेटिक नेताओं, जैसे सीनेटर मार्क केली का आरोप है कि प्रशासन ने बिना किसी स्पष्ट रणनीतिक लक्ष्य या 'एग्जिट प्लान' के युद्ध शुरू किया, जिससे गोला-बारूद खत्म हो रहा है और जनता पर महंगाई का बोझ पड़ा है।
अमेरिका में हालिया समय में हुए सर्वेक्षणों में ट्रंप की ईरान नीति की भारी आलोचना हो रही है। सीएनएन और एसएसआरएस के एक हालिया सर्वे में सामने आया है कि अमेरिका में हर तीन में से दो लोगों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन ईरान के खिलाफ युद्ध नहीं जीत रहा है और राष्ट्रपति इस संघर्ष को खत्म करने के लिए जरूरी कदम नहीं उठा पा रहे हैं। बताया जा रहा है कि अमेरिकियों की ट्रंप से युद्ध को लेकर इस नाखुशी का नतीजा मध्यावधि चुनाव में दिख सकता है। अमेरिकी संसद के दोनों सदनों- प्रतिनिधि सभा और सीनेट की सीटों पर होने वाले चुनावों में ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
अमेरिका-ईरान युद्ध को लेकर ट्रंप की गिरती लोकप्रियता।
- फोटो : अमर उजाला
सैन्य समुदायों और चुनावी क्षेत्रों पर असर
यह संघर्ष विशेष रूप से सैन्य बहुल क्षेत्रों में बड़ा चुनावी मुद्दा बन गया है। उदाहरण के लिए, वर्जीनिया के दूसरे कांग्रेस क्षेत्र (विश्व के सबसे बड़े नौसेना बेस नॉरफोक के पास) में रिपब्लिकन सांसद जेन किगन्स, जो युद्ध का समर्थन करती हैं और पूर्व डेमोक्रेटिक सांसद एलेन लुरिया, जो युद्ध का विरोध कर रही हैं के बीच कड़ा मुकाबला है।
सैन्य कार्रवाई का समय और राजनीतिक रणनीति
- ट्रंप ने कहा है कि युद्ध चुनाव के ठीक बाद या उससे पहले भी जीता जा सकता है। तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप भी चुनाव के आसपास ही क्षेत्र में पहुंच रहा है।
- ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट के अनुसार, ट्रंप जानते थे कि उनके फैसलों से अल्पकालिक रूप से ऊर्जा की कीमतें बढ़ेंगी, लेकिन उन्होंने राजनीतिक लाभ के बजाय रणनीतिक फायदे को प्राथमिकता दी।
तो क्या राजनयिक कोशिशों का दौर अब खत्म हुआ?
अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध को खत्म करने के कूटनीतिक प्रयास पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं, लेकिन यह प्रक्रिया फिलहाल गंभीर गतिरोध का सामना कर रही है।
अमेरिका की दोहरी रणनीति बनी संघर्ष बढ़ने की वजह
- अमेरिका के ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन कूटनीतिक बातचीत और सैन्य व आर्थिक दबाव, दोनों रास्तों को हर समय खुला रखे हुए है।
- अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि डोनाल्ड ट्रंप हमेशा रणनीतिक संभावनाओं की योजना बनाने के साथ-साथ सौदेबाजी का रास्ता भी खुला रखते हैं।
- संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाग लेने अमेरिका आए ईरानी प्रतिनिधिमंडल के दो सदस्यों को देश छोड़ने का आदेश मिलने के बाद दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ता देखा गया है।
मध्यस्थता की नाकाम कोशिशें
कतर ने अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते लागू करने और मतभेदों को कम करने की कोशिश में लगा हुआ है। हालांकि, उसे अभी इसमें कोई खास सफलता नहीं मिली है।
अमेरिका की गुप्त योजनाओं को लेकर ईरान क्या कर रहा है?
अमेरिका की बढ़ती सैन्य तैनाती और कैंप डेविड की बैठकों के जवाब में ईरान भी कई मोर्चों पर रणनीतिक और सैन्य तैयारी में जुट चुका है।
- तेहरान के पास बड़ी संख्या में मिसाइलें और ड्रोन मौजूद हैं। उसकी तरफ से स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि अगर अमेरिका बड़े पैमाने पर फिर से सैन्य हमले शुरू करता है, तो वह और भी कड़ा और तीव्र जवाबी प्रहार करेगा।
- ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ का कहना है कि जब तक अमेरिका समझौते की शर्तें पूरी नहीं करता, तब तक होर्मुज जलडमरूमध्य बंद रहेगा।
- अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद ईरान कूटनीतिक मेज पर अपनी शर्तों पर अड़ा हुआ है। खासकर अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर उसका रुख बिल्कुल स्पष्ट है कि वह इन्हें छोड़ेगा नहीं, लेकिन इसे हथियार बनाने के स्तर पर भी नहीं ले जाएगा।