अमेरिका ने ईरान की समुद्री नाकेबंदी सख्त कर दी है। इस बीच अमेरिकी युद्धपोत ने एक ईरानी मालवाहक जहाज को वापस लौटने पर मजबूर कर दिया। पिछले तीन दिनों में अब तक 10 जहाजों को रोका जा चुका है। इस कार्रवाई का मकसद व्यापारिक रास्ते बंद करके ईरान की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह अलग-थलग करना है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बुधवार को बताया कि उनके मिसाइल विध्वंसक युद्धपोत 'यूएसएस स्प्रुएंस' ने ईरान के झंडे वाले एक मालवाहक जहाज को वापस ईरान लौटने पर मजबूर कर दिया। यह इस क्षेत्र में चल रही अमेरिकी नाकेबंदी के तहत की गई नवीनतम कार्रवाई है।
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CENTCOM ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि यह ईरानी जहाज बंदर अब्बास से निकला था। इसने होर्मुज जलडमरूमध्य से बाहर निकलकर ईरानी तट के साथ आगे बढ़ने की कोशिश की। जहाज ने इस हफ्ते शुरू हुई नाकेबंदी की पाबंदियों से बचने का प्रयास किया। अमेरिकी युद्धपोत 'यूएसएस स्प्रुएंस' ने सफलतापूर्वक इस जहाज का रास्ता बदल दिया। अब यह जहाज वापस ईरान की ओर लौट रहा है।
अमेरिकी सेना ने बताया कि सोमवार को नाकेबंदी शुरू होने के बाद से अब तक कुल 10 जहाजों को वापस भेजा जा चुका है। अभी तक एक भी जहाज इस नाकेबंदी को तोड़कर आगे नहीं बढ़ पाया है। यह नाकेबंदी अब अपने तीसरे दिन में पहुंच गई है। अमेरिकी सेना का दावा है कि ईरानी बंदरगाहों पर आने-जाने वाले समुद्री रास्तों पर उनका पूरा नियंत्रण है।
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इस नाकेबंदी का मुख्य उद्देश्य ईरान के समुद्री व्यापारिक रास्तों को काटकर उसकी अर्थव्यवस्था को कमजोर करना है। आधिकारिक सैन्य संचार के अनुसार, अमेरिकी सेना पूरी तरह तैयार है ताकि इस पाबंदी का सख्ती से पालन हो सके। यह तनाव ऐसे समय में बढ़ा है जब राष्ट्रपति ट्रंप ने एक बड़े समझौते की संभावना जताई है। हालांकि, ओमान की खाड़ी में अमेरिकी नौसेना की भारी मौजूदगी दिखाती है कि अमेरिका तब तक दबाव बनाए रखने के लिए तैयार है जब तक कोई ठोस समझौता नहीं हो जाता।
एक बयान में CENTCOM कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने एक बयान में कहा कि नाकेबंदी शुरू होने के मात्र 36 घंटों के भीतर अमेरिकी सेना ने ईरान के समुद्री व्यापार को प्रभावी ढंग से रोक दिया है। यह नाकेबंदी फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी में स्थित ईरान के सभी बंदरगाहों पर लागू है।
अमेरिकी सेना ने यह भी साफ किया है कि वे केवल ईरानी बंदरगाहों पर जाने वाले जहाजों को रोक रहे हैं। जो जहाज गैर-ईरानी बंदरगाहों की ओर जा रहे हैं, उनके लिए होर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही की पूरी आजादी बनी रहेगी। अमेरिका के इस कदम से अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ गया है।