अमेरिका से अवैध अप्रवासियों को लेकर सेना का विमान मंगलवार को ग्वांतानामो बे पहुंचा। अवैध अप्रवासियो को लेकर ग्वांतानामो बे पहुंचा यह अमेरिका का पहला विमान है। अमेरिका अवैध अप्रवासियों को ग्वांतानामो बे की जेल में रखेगा। इसे दुनिया की सबसे खतरनाक जेल माना जाता है और 11 सितंबर 2001 के आतंकी हमले के आरोपियों को इसी जेल में रखा गया था। उस वक्त ग्वांतानामो बे जेल ने पूरी दुनिया में सुर्खियां बटोरीं थी। अवैध अप्रवासियों को ग्वांतानामो बे जेल में रखने के लिए 300 लोगों का एक सपोर्ट स्टाफ तैनात किया गया है। जरूरत पड़ने पर इसमें बढ़ोतरी भी की जा सकती है।
ग्वांतानामो बे जेल में रखे जा सकेंगे 30 हजार अवैध अप्रवासी
ग्वांतानामो बे जेल में एक होल्डिंग सेंटर बनाया गया है, जिसमें 30 हजार लोगों को रखने की क्षमता है। इस होल्डिंग सेंटर का इस्तेमाल अवैध अप्रवासियों को रखने में किया जा रहा है। अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने अवैध प्रवासियों को रखने के लिए ग्वांतानामो बे जेल को सबसे सही जगह बताया है। हालांकि अवैध अप्रवासियों को जेल में रखने के ट्रंप सरकार के फैसले की तीखी आलोचना भी हो रही है। एमनेस्टी इंटरनेशनल यूएसए में शरणार्थी और प्रवासी अधिकार कार्यक्रम की निदेशक एमी फिशर ने ग्वांतानामो बे जेल के इस्तेमाल की निंदा की थी।
अमेरिका ने भारत के अवैध अप्रवासियों को भी निर्वासित किया
एमी फिशर ने कहा कि 'अप्रवासियों को ग्वांतानामो जेल भेजना बेहद निर्दयी और खर्चीला कदम है। इससे लोगों को कानूनी मदद, परिवार और किसी की कोई सहायता नहीं मिल सकेगी। ऐसा लग रहा है कि अमेरिकी सरकार लोगों को अज्ञात और अनंत जगह फेंक रही है और इससे लोगों के मानवाधिकारों का उल्लंघन होगा।' फिशर ने ग्वांतानामो बे जेल को तुरंत बंद करने की मांग की। वहीं भारतीय निर्वासितों को लेकर अमेरिकी सेना का एक विमान भारत भी पहुंचा है। इससे पहले अमेरिका ने अवैध अप्रवासियों को निर्वासित करते हुए इक्वाडोर, गुआम, होंडुरास और पेरु जैसे देशों के लिए भी उड़ान भरी। प्यू रिसर्च सेंटर के अनुसार, अमेरिका में 7,25,000 से ज्यादा भारतीय अवैध अप्रवासी रहते हैं। भारत से ज्यादा सिर्फ मेक्सिको और अल सल्वाडोर के ही अवैध अप्रवासी अमेरिका में रहते हैं।