अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से की जा रही ग्रीनलैंड पर कब्जे की बात को लेकर देश में हलचल है। ग्रीनलैंड की संसद ने विदेशी चंदे पर रोक लगाने वाले विधेयक को पारित किया। इसके तहत कोई भी राजनीतिक दल विदेश से चंदा नहीं प्राप्त कर सकेगा।
संसद में पारित विधेयक का उद्देश्य देश की राजनीतिक अखंडता की रक्षा करना है। साथ ही यह तत्काल प्रभाव से लागू होगा। संसदीय दस्तावेज में कहा गया है कि विधेयक को ग्रीनलैंड की मौजूदा राजनीतिक स्थिति के मद्देनजर लाया गया है। ग्रीनलैंड संसद की वरिष्ठ कानूनी अधिकारी केंट फ्रिडबर्ग ने बताया कि अभी यह जानकारी नहीं है कि किसी राजनीतिक दल को विदेश से चंदा मिला भी है या नहीं। हालांकि कुछ रूसी राजनेताओं ने चंदा देने की इच्छा जताई थी।
नए विधेयक के मुताबिक एक पक्ष से कुल 200,000 डेनिश क्रोनर (लगभग 27,700 डॉलर) से अधिक या एकल योगदानकर्ता से 20,000 क्रोनर (लगभग 2,770 डॉलर) से अधिक चंदा प्राप्त करने पर प्रतिबंध लगाया गया है।
डोनाल्ड ट्रंप जूनियर का ग्रीनलैंड दौरा
बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि वह ग्रीनलैंड पर कब्जा करने के लिए टैरिफ या सैन्य बल का इस्तेमाल कर सकते हैं और ये बात ज्यादा प्रकाश में तब आ गई जब ट्रंप के बेटे डोनाल्ड ट्रंप जूनियर ग्रीनलैंड पहुंचे और वहां के लोगों से मिले। साथ ही उन्होंने वहां 'मेक अमेरिका ग्रेट अगेन' लिखी हुई कैप्स भी बांटीं और इसका वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया। इस बात पर ग्रीनलैंड के लोगों ने नाराजगी जताते हुए इसे रिश्वत देने जैसा बताया।
ग्रीनलैंड पर कब्जा, ट्रंप का पुराना सपना
देखा जाए तो ग्रीनलैंड को अमेरिका का हिस्सा बनाना डोनाल्ड ट्रंप का आज का सपना नहीं है। ये बात 2019 से चली आ रही है जब उन्होंने इसे एक रियल स्टेट सौदा बताया था। गौरतलब है कि ग्रीनलैंड अभी डेनमार्क के तहत एक स्वतंत्र राज्य है और इसकी रणनीतिक स्थिति के कारण इसे लेकर अंतरराष्ट्रीय ध्यान है। बता दें कि 1945 में अमेरिका ने द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान ग्रीनलैंड पर कब्जा कर लिया था लेकिन बाद में इसे डेनमार्क को वापस कर दिया। हालांकि आज भी ग्रीनलैंड के उत्तर-पश्चिम में एक अमेरिकी सैन्य अड्डा स्थित है।
संसद में लाया जा चुका प्रस्ताव
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चुनाव के पहले से ही ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करने की इच्छा जता रहे हैं। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया खाते पर भी लिखा था- ग्रीनलैंड एक अद्भुत जगह है। यदि यह हमारे देश का हिस्सा बनता है, तो यहां के लोगों को बहुत लाभ मिलेगा। हमें इसे सुरक्षित रखेंगे और दुनिया से बचाएंगे। अमेरिकी संसद के निचले सदन- हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में रिपब्लिकन सांसदों ने मेक ग्रीनलैंड ग्रेट अगेन विधेयक पेश कर दिया है।
वहीं ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री म्यूटे बुरुप एगेडे ने कहा था कि ग्रीनलैंड को अमेरिका का हिस्सा बनने में कोई रुचि नहीं है और यह द्वीप बिकाऊ नहीं है। ग्रीनलैंड दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है। यह अटलांटिक और आर्कटिक महासागरों के बीच स्थित है और इसका 80 फीसदी हिस्सा बर्फ से ढका हुआ है। यहां एक बड़ा अमेरिकी सैन्य अड्डा भी है।