संयुक्त राज्य अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान कल यानी 18 अगस्त को कैंप डेविड में त्रिपक्षीय शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे। उम्मीद है कि चीन के विरोध के बावजूद इस दौरान तीनों देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा के लिए एक सतत त्रिपक्षीय रक्षा प्रणाली बनाने पर सहमत होंगे। इसके साथ ही तीनों देशों के नेताओं के बीच उत्तर कोरिया, यूक्रेन और अन्य मुद्दों को लेकर सुरक्षा सहयोग पर चर्चा हो सकती है।
इस शिखर सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन, उनके दक्षिण कोरियाई समकक्ष यूं सुक येओल और जापानी प्रधान मंत्री फुमियो किशिदा शामिल होंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका अपनी दो संधि संबंधों को मजबूत करने और क्षेत्र में अपनी भूमिकाओं का विस्तार करने के लिए भी इस बैठक का इस्तेमाल कर सकता है।
जॉर्ज डब्ल्यू बुश प्रशासन के दौरान पूर्वी एशिया और प्रशांत मामलों के लिए कार्यवाहक सहायक सचिव के रूप में काम करने वाले इवांस रेवरे का कहना है कि तीनों नेता एक एक संयुक्त बयान में अपनी योजनाओं को बता सकते हैं। उन्होंने कहा कि बयान यह साफ कर देगा कि उत्तर कोरिया एकमात्र चिंता का विषय नहीं है, जो तीनों देशों को कैंप डेविड में इस त्रिपक्षीय सभा के लिए एक साथ लाया है।
रेवरे ने यह भी कहा कि इस ऐतिहासिक शिखर सम्मेलन में हुए समझौते तीनों देशों को एक स्थायी साझेदारी के करीब ले जाएंगे। ये साझेदारी खुफिया और सूचना साझा करने, मिसाइल रक्षा, संयुक्त सैन्य अभ्यास, साइबर सुरक्षा, प्रारंभिक चेतावनी सहयोग और बढ़ी हुई परमाणु निरोध पर केंद्रित है।
गौरतलब है कि अमेरिका लंबे समय से इस प्रयास में है कि दक्षिण कोरिया और जापान की कोशिशों को एक सतत साझेदारी का रूप दिया जाए। अब जबकि दोनों देशों के नेताओं ने मार्च में बिगड़े संबंधों को सुधार लिया है। अमेरिका की कोशिश साकार रूप ले सकती है।
बीते अक्टूबर, फरवरी, अप्रैल और जुलाई में उत्तर कोरिया के मिसाइल प्रक्षेपण के जवाब में अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान ने संयुक्त बैलिस्टिक मिसाइल अभ्यास किया था। इन युद्धाभ्यासों को उत्तर कोरिया के खिलाफ तीनों देशों के सहयोग में और गहराई के रूप में देखा जा रहा है। अब, सियोल और टोक्यो से उम्मीद की जाती है कि वे अपने दो निरंकुश पड़ोसियों से खतरों के खिलाफ अपने प्रयासों को मजबूत करेंगे। इससे पहले, यून ने मंगलवार को अपने राष्ट्रीय मुक्ति दिवस भाषण में इस बात पर जोर दिया कि उत्तर कोरियाई हमले से बचाव में जापान की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि अगर प्रायद्वीप पर लड़ाई छिड़ती है तो जापानी अड्डे दक्षिण कोरिया में तैनात अमेरिकी नेतृत्व वाली संयुक्त राष्ट्र कमान के लिए जमीन, समुद्र और हवाई क्षमताएं प्रदान करेंगे।
पूर्वी एशिया और प्रशांत मामलों के सहायक अमेरिकी विदेश मंत्री के रूप में काम कर चुके डैनियल रसेल ने कहा कि तीनों देशों की राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा रणनीतियां पहले से ही एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। तीनों नेता तेजी से बढ़ते चीनी सैन्य अतिक्रमण से उत्पन्न खतरों से चिंतित हैं। ऐसे में वे निश्चित रूप से प्रतिरोध को मजबूत करने और किसी घटना के जोखिम को कम करने के व्यावहारिक तरीकों पर चर्चा करेंगे।
अपने दक्षिण कोरियाई और जापानी समकक्षों के साथ एक आभासी बैठक के बाद मंगलवार को एक संवाददाता सम्मेलन में एंटनी ब्लिंकन ने कहा था कि त्रिपक्षीय सहयोग का विस्तार किया जाएगा। साथ ही वरिष्ठ स्तरों पर नियमित बैठकों के माध्यम से इसे भविष्य में संस्थागत बनाया जाएगा।
बता दें कि अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता वेदांत पटेल ने मंगलवार को एक प्रेस ब्रीफिंग में कहा था कि इस शिखर सम्मेलन का उद्देश्य चीन के साथ भड़काऊ या तनाव भड़काना नहीं है। बावजूद इसके बीजिंग इसे शत्रुतापूर्ण मानता है। चीनी दूतावास के प्रवक्ता लियू पेंग्यू ने कहा है कि चीन इस तरह की प्रथाओं का दृढ़ता से विरोध करता है।"