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ट्रंप समर्थकों ने लगाई फर्जी मतदान के आरोप वाली याचिकाओं की झड़ी, दुनिया के कई नेताओं ने नहीं दी बाइडन को बधाई

Tue, 10 Nov 2020 04:52 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन

सार

  • पूरे अमेरिका में ट्रंप समर्थकों ने बनाई व्यापक स्तर पर रैलियों की योजना
  • रूस, चीन, तुर्की, ब्राजील समेत कई देशों ने बाइडन को बधाई देने से खुद को रोका
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डोनाल्ड ट्रंप (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
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विस्तार
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अमेरिका में चुनाव से पहले जताई गई आशंकाएं अब सच साबित होती लग रही हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी ने चुनाव नतीजों के खिलाफ जबरदस्त अभियान छेड़ दिया है। रिपब्लिकन पार्टी समर्थक मीडिया और सोशल मीडिया पर फर्जी मतदान के आरोप जोर-शोर से लगाए जा रहे हैं। डाक से आए वोटों की वैधता पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। रिपब्लिकन पार्टी ने अलग-अलग राज्यों में चुनाव याचिकाओं की झड़ी लगा दी है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की एक खबर के मुताबिक ट्रंप अब जगह रैलियां करने की योजना बना रहे हैं। उनके समर्थक पहले से कई शहरों में सड़कों पर आकर विरोध जता रहे हैं। अमेरिका के इतिहास में ऐसा नजारा देखने को कभी नहीं मिला।

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ट्रंप समर्थक फॉक्स न्यूज और न्यूमैक्स जैसे चैनलों पर पिछले दो-तीन दिन में चुनाव नतीजों पर सवाल उठाने और उन्हें संदिग्ध बनाने का अभियान काफी तेज हो गया है। दोनों चैनलों पर रिपब्लिकन पार्टी के प्रवक्ताओं और नेताओं को उनका पक्ष रखने के पूरे मौके दिए गए हैं। ट्रंप खुद अपने ट्विटर हैंडल से उनके क्लिप जारी कर रहे हैं।

चुनाव के पहले ये चर्चा थी कि हारने की स्थिति में ट्रंप उसे स्वीकार नहीं करेंगे और राजनीतिक संकट पैदा कर देंगे। न्यायपालिका में कंजरवेटिव जजों की बहुतायत के कारण ये अंदेशा है कि इस मुहिम में ट्रंप को सफलता मिल सकती है। इन्हीं हालात को ध्यान में रखते हुए कई देशों के नेताओं ने मीडिया के अनुमानों के मुताबिक विजेता बताए गए डेमोक्रेटिक पार्टी के जो बाइडन को अब तक बधाई नहीं दी है।
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बल्कि उनकी तरफ से ये साफ कहा गया है कि जब तक कानूनी मामले खत्म होने के बाद आखिरी तौर पर नतीजे का एलान नहीं होता, वे बधाई देने की औपचारिकता नहीं निभाएंगे। अमेरिका के संदर्भ में यह भी पहली बार ही हुआ है। जिन नेताओं ने बधाई रोक रखी है, उनमें रूस के राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, तुर्की के राष्ट्रपति, रजिब तैयिब अर्दोआन और ब्राजील के राष्ट्रपति जायर बोलसेनारो शामिल हैं।

वैसे मीडिया रिपोर्टों में यह ध्यान दिलाया गया है कि ये तमाम नेता वो हैं, जिनको ट्रंप के शासनकाल में अपनी रणनीति को आगे बढ़ाने का मौका मिल रहा था। हालांकि अपने कार्यकाल के आखिरी दिनों में ट्रंप ने चीन के खिलाफ मुहिम चला दी थी, लेकिन पिछले साल तक वे शी के अधिनायकवादी तौर-तरीकों की प्रशंसा कर रहे थे। 2017 में जब चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ने दो कार्यकाल से अधिक समय तक राष्ट्रपति ना रहने की समय सीमा हटा ली थी, तब ट्रंप ने इस कदम की तारीफ की थी। पुतिन का डोनाल्ड ट्रंप से लगाव जग-जाहिर रहा है।

दरअसल, ट्रंप के बारे में ये बात चर्चित है कि उनका अधिनायकवादी नेताओं से ज्यादा बनती है। इन नेताओं में अर्दोआन और बोलसेनारो भी हैं। बोलसेनारो तो ट्रंप की हार से इतने दुखी हुए कि उन्होंने खुद दोबारा चुनाव ना लड़ने का एलान कर दिया है। उन्होंने कहा है कि उत्तर और दक्षिण अमेरिका में फिर से “वामपंथी” ताकतों का दौर आ रहा है और ऐसे में चुनाव लड़ने की उनकी इच्छा नहीं बची है।

इन प्रतिक्रियाओं से अमेरिका में ट्रंप समर्थकों का मनोबल बढ़ा है। जिन देशों का अमेरिका से सीधा आर्थिक हित जुड़ा है, उन्होंने भी प्रतिक्रिया देने में सावधानी बरती है। इसकी मिसाल मेक्सिको के राष्ट्रपति आंद्रे मानुएल लपोजे ओर्बादोर भी हैं, जिन्होंने कहा कि वे कुछ कहने के बाद कानूनी मुद्दे हल होने का इंतजार करेंगे। ट्रंप अब राजनीतिक संकट को अंतिम सीमा तक ले जाने की रणनीति पर चल रहे हैं।

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