US Election Results 2020: Donald Trump and Joe Biden
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अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव अपने रोमांचक दौर में पहुंच चुका है। डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार जो बिडेन अभी इलेक्टोरल वोट की रेस में आगे हैं। वहीं, उनके प्रतिद्वंद्वी और वर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हार मारने के लिए तैयार नहीं हैं। ट्रंप ने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा है कि चुनावों में धांधली हो रही है। ट्रंप इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गए हैं।
ऐसे में लोगों के बीच इस बात को लेकर चर्चा हो रही है कि क्या अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट चुनाव के नतीजों को तय कर सकता है। बता दें कि अमेरिका के चुनावी इतिहास में दो बार ही ऐसा मौका आया है, जब चुनावी परिणाम सुप्रीम कोर्ट ने तय किया है। इसके बाद ही राष्ट्रपति शपथ ले पाया है।
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जॉर्ज बुश ने 2000 में खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा
सुप्रीम कोर्ट जाने का सबसे हालिया मामला 20 साल पुराना है। साल 2000 के अमेरिकी चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर जॉर्ज बुश मैदान में थे। वहीं, डेमोक्रेट्स ने एल गोर को चुनावी मैदान में उतारा था। राष्ट्रपति चुनावों के नतीजे फ्लोरिडा में आकर फंस गए।
उस दौरान फ्लोरिडा में जॉर्ज बुश 537 वोटों से आगे चल रहे थे। लेकिन एल गोर ने राज्य में दोबारा से वोटों की गिनती की मांग रखी। विवाद बढ़ा और बुश ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और वोटों की दोबारा गिनती को रोकने की मांग की गई। सुप्रीम कोर्ट का फैसला बुश के पक्ष में आया। अमेरिका की शीर्ष अदालत ने वोटों की दोबारा गिनती पर रोक लगा दी और बुश को विजेता घोषित किया गया।
दूसरा मामला 144 साल पुराना
सुप्रीम कोर्ट जाने का दूसरा मामला 144 साल पुराना है। साल 1876 में अंतिम नतीजों के लिए कांग्रेस ने एक कमीशन का गठन किया। इस कमीशन के सदस्य के रूप में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश, हाउस ऑफ रिप्रेंजेटेटिव, सीनेटर और अन्य लोगों को चुना गया। इन लोगों ने वोटिंग के आधार पर देश के अगले राष्ट्रपति का चुनाव किया। इस चुनाव में रुदरफोर्ड बी. हेयस एक वोट से डेमोक्रेट्स के सैमुअल टिल्डन से जीते थे। इस तरह रदरफोर्ड बी. हेयस देश के 19वें राष्ट्रपति चुने गए।
ऐसे में एक बार फिर ट्रंप द्वारा चुनावी नतीजों के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना चिंता का विषय है। यहां गौर करने वाली बात यह है कि कुछ दिनों पहले ही ट्रंप ने एमी कोने बेनेट को सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश नामित किया था। बेनेट के नामांकन को लेकर देश में खासा विवाद हुआ था।