ट्रंप ने सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में लिखा कि 'यदि ये सरकारी कर्मचारी राष्ट्रपति के नीतिगत हितों को आगे बढ़ाने से इनकार करते हैं, या भ्रष्ट आचरण करते हैं, तो उन्हें अब नौकरी नहीं मिलनी चाहिए। यह सामान्य सी बात है, और इससे संघीय सरकार को एक व्यवसाय की तरह चलाने में मदद मिलेगी।'
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने जब से सत्ता संभाली है, तब से ही बड़े पैमाने पर संघीय कर्मचारियों की छंटनी की जा रही है। इसे लेकर ट्रंप प्रशासन को खासी आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ा है। हालांकि ट्रंप रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं और अब उन्होंने एक बड़ा नीतिगत बदलाव किया है, जिसके तहत वे बड़े पैमाने पर संघीय कर्मचारियों की छंटनी करने की योजना बना रहे हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने इस संबंध में कार्यकारी आदेश पर पहले ही हस्ताक्षर कर दिए थे, लेकिन यह आदेश शुक्रवार से लागू हुआ है।
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क्या होगा ट्रंप के फैसले का असर
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में लिखा कि 'यदि ये सरकारी कर्मचारी राष्ट्रपति के नीतिगत हितों को आगे बढ़ाने से इनकार करते हैं, या भ्रष्ट आचरण करते हैं, तो उन्हें अब नौकरी नहीं मिलनी चाहिए। यह सामान्य सी बात है, और इससे संघीय सरकार को एक व्यवसाय की तरह चलाने में मदद मिलेगी।' ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों का तर्क है कि इस कदम से कर्मचारियों की जवाबदेही बढ़ाने में मदद मिलेगी। इस बदलाव से उन कर्मचारियों को बदलना आसान हो जाएगा, जिनके पास महत्वपूर्ण नीति निर्धारण, नीति निर्माण के काम हैं।
यह कदम ट्रंप की डीप स्टेट के खिलाफ कार्रवाई माना जा रहा है, जिसने उनके पहले कार्यकाल में उनके लक्ष्यों को विफल कर दिया था। अब ट्रंप संघीय नौकरशाही को नया रूप देने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाएंगे। हालांकि ट्रंप के इस कदम ने श्रमिक संघों और राजनीतिक विरोधियों को परेशान कर दिया है। उन्होंने सरकार के कदम को श्रमिक अधिकारों का उल्लंघन करार दिया है। उन्होंने कहा कि इससे संघीय कर्मचारियों का राजनीतिकरण होगा।