अमेरिका में ट्रंप प्रशासन ने ट्रांसजेंडर बच्चों के लिए दी जाने वाली लिंग-पुष्टि उपचार (जेंडर-अफर्मिंग केयर) को लगभग पूरी तरह बंद करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अमेरिकी स्वास्थ्य एवं मानव सेवा विभाग (एचएचएस) ने गुरुवार को ऐसे प्रस्तावित नियमों की घोषणा की, जिनका उद्देश्य नाबालिगों के लिए इस तरह के इलाज पर प्रभावी प्रतिबंध लगाना है। इन प्रस्तावों के तहत उन अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों को मेडिकेयर और मेडिकेड जैसी संघीय स्वास्थ्य योजनाओं से मिलने वाली फंडिंग बंद की जा सकती है, जो बच्चों को जेंडर-अफर्मिंग केयर प्रदान करते हैं। साथ ही, मेडिकेड की संघीय राशि का इस्तेमाल इस तरह के इलाज पर करने पर भी रोक लगाने का प्रस्ताव है।
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प्रस्ताव लागू होने से पहले किया जाएगा जनसुनवाई और संशोधन
हालांकि, ये प्रस्ताव अभी अंतिम नहीं हैं और कानूनी रूप से बाध्यकारी भी नहीं हैं। इन्हें लागू करने से पहले सरकार को लंबी नियम-निर्माण प्रक्रिया से गुजरना होगा, जिसमें जनसुनवाई और संशोधन शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन प्रस्तावों को अदालतों में चुनौती भी दी जाएगी। इसके बावजूद, इन नियमों की घोषणा मात्र से ही कई अस्पताल और डॉक्टर बच्चों को यह इलाज देने से पीछे हट सकते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ अस्पतालों ने पहले ही संभावित संघीय कार्रवाई के डर से यह सेवाएं बंद कर दी हैं।
अस्पतालों के अस्तित्व पर आ सकता संकट
अमेरिका के लगभग सभी अस्पताल मेडिकेयर और मेडिकेड कार्यक्रमों से जुड़े हैं, जो बुजुर्गों, दिव्यांगों और कम आय वाले लोगों के लिए सबसे बड़ी सरकारी स्वास्थ्य योजनाएं हैं। इन योजनाओं की फंडिंग बंद होने से अधिकांश अस्पतालों के अस्तित्व पर संकट आ सकता है। यही नियम स्टेट चिल्ड्रन हेल्थ इंश्योरेंस प्रोग्राम (एससीएचआईपी) पर भी लागू होंगे। ट्रंप प्रशासन का यह रुख अमेरिकी मेडिकल संगठनों की सलाह के विपरीत है। अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन (एएमए) समेत कई प्रमुख संस्थाओं ने राज्यों से अपील की है कि जेंडर डिस्फोरिया से जुड़ी चिकित्सा पर रोक न लगाई जाए।
क्या है ट्रांसजेंडर केयर?
आमतौर पर, जो बच्चे या किशोर अपने जन्म के समय निर्धारित लिंग से अलग पहचान महसूस करते हैं, उनका पहले विशेषज्ञों की एक टीम द्वारा मूल्यांकन किया जाता है। कुछ बच्चे सामाजिक बदलाव अपनाते हैं, जैसे नाम, हेयरस्टाइल या सर्वनाम बदलना। कुछ मामलों में, किशोरों को यौवन रोकने वाली दवाएं या हार्मोन थेरेपी दी जाती है। सर्जरी नाबालिगों में बेहद दुर्लभ है। वर्तमान में, अमेरिका के लगभग आधे राज्यों में मेडिकेड जेंडर-अफर्मिंग केयर को कवर करता है। वहीं, कम से कम 27 राज्यों ने इस इलाज को प्रतिबंधित या सीमित करने वाले कानून बनाए हैं। अर्कांसस और मोंटाना में संघीय अदालतों ने ऐसे प्रतिबंधों को असंवैधानिक करार दिया है, हालांकि वहां कानूनी लड़ाई अब भी जारी है।
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'सरकार की तरफ से थोपा गया एकतरफा फैसला'
ट्रेवर प्रोजेक्ट के वरिष्ठ उपाध्यक्ष रोड्रिगो हेंग-लेहटिनेन ने इन प्रस्तावों की आलोचना करते हुए कहा कि यह 'संघीय सरकार की तरफ से थोपा गया एकतरफा फैसला' है, जबकि यह निर्णय डॉक्टर और मरीज के बीच होना चाहिए। उन्होंने कहा, 'ट्रांसजेंडर और नॉन-बाइनरी युवाओं से उनकी जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं छीनने के लिए किए जा रहे प्रयास बेहद चिंताजनक हैं।' यह मुद्दा अमेरिका में न सिर्फ स्वास्थ्य नीति, बल्कि सामाजिक और कानूनी बहस का केंद्र बना हुआ है।
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