गर्भपात की वैधानिक मान्यता खत्म करने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर अमेरिका को लगातार अंतरराष्ट्रीय शर्मिंदगी का सामना करना पड़ रहा है। अब यूरोपीय संसद ने भी इसके खिलाफ अपनी आवाज उठा दी है। यूरोपीय संसद ने एक प्रस्ताव पारित कर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले की निंदा की है। यूरोपियन यूनियन (ईयू) में गहरा नैतिक प्रभाव रखने वाली संसद में अमेरिका की आलोचना असमान्य बात है।
अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने बीते महीने 1973 के अपने उस फैसले को पलट दिया था, जिसमें गर्भपात को वैध ठहराया गया था। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का हालिया फैसला आने के बाद से दुनिया के अनेक देश उसकी निंदा कर चुके हैं। इजराइल और फ्रांस में तो गर्भपात के अधिकार को पुख्ता बनाने के कदम उठाए जा चुके हैं। अन्य कई देशों में भी ये मांग उठी है कि गर्भपात कराने को संविधान में दर्ज मौलिक अधिकारों का हिस्सा बनाया जाए, ताकि भविष्य में उसे खत्म करना संभव ना रहे। अब यूरोपीय संसद ने भी इस मांग में अपनी आवाज मिलाई है।
यूरोपीय संसद के प्रस्ताव में अमेरिका में गर्भपात के अधिकार के लिए संघर्ष कर रहीं महिलाओं के प्रति एकजुटता जताई गई। साथ ही अमेरिकी कांग्रेस (संसद) से अपील की गई कि वह गर्भपात को फिर से वैध बनाने के लिए संघीय स्तर पर जरूरी कानून पारित करे। प्रस्ताव में कहा गया- ‘ईयू के सदस्य देश गर्भपात की सुरक्षित, वैध, और सुरक्षित सेवाएं उपलब्ध कराते हैं। वे प्रसव पूर्व और मातृ स्वास्थ्य, स्वैच्छिक परिवार नियोजन, युवा अनुकूल सेवाएं, और एचआईवी निरोधक इलाज की सुविधाएं भी बिना किसी भेदभाव के मुहैया कराते हैं।’ प्रस्ताव में कहा गया कि इन सब सेवाओं को अब कानूनी संरक्षण प्रदान करने की जरूरत है।
यूरोप में महिला अधिकारों के समर्थक समूहों ने भी इस मांग का समर्थन किया है। उदारवादी थिंक टैंक रीन्यू यूरोप ग्रुप की अध्यक्ष स्टीफाने सयोर्ने ने कहा है- अमेरिका के उदाहरण ने यह साफ कर दिया है कि ईयू में गर्भपात अधिकार को सुरक्षित करने के लिए हमें हर जरूरी कदम उठाने चाहिए। स्वीडन की राजनेता हेलेन फ्रिट्जॉन ने कहा है- ‘अमेरिकी उदाहरण से हमें एक सबक मिला है- मानवाधिकारों के मामले में कभी भी यह मान कर नहीं चला जा सकता कि हमें सुरक्षित रहेंगे। इसलिए हमें उनकी रक्षा की लड़ाई अवश्य लड़ते रहनी चाहिए।’