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Nepal Politics: नेपाल में चुनाव के गरमाते माहौल के बीच चीनी नेता की यात्रा से सियासी हलचल

Sat, 09 Jul 2022 03:42 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो

सार

नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टियों पर चीन का स्पष्ट प्रभाव रहा है। कुछ ही दिन पहले पुष्प कमल दहल ने समाजवादी विचारधारा में यकीन रखने वाली पार्टियों का मोर्चा बनाने की बात कही थी। यूएमएल के एक नेता पत्रकारों को बताया है कि लिउ ने जून के तीसरे हफ्ते में दहल और ओली से बातचीत की थी...
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केपी शर्मा ओली और पुष्प कमल दहल - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के अंतरराष्ट्रीय संपर्क विभाग के नए प्रमुख लिउ जियानचाओ की दस जुलाई से होने वाली नेपाल यात्रा ने यहां सियासी हलकों में नई हलचल पैदा कर दी है। लिउ उस समय यहां आ रहे हैं, जब नेपाल में चुनाव का माहौल गरमा रहा है। साथ ही नेपाल की अलग-अलग कम्युनिस्ट पार्टियों के बीच एकता की संभावना भी तलाशी जा रही है।

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लिउ अपनी चार दिन की काठमांडू यात्रा के दौरान कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओइस्ट सेंटर) के अध्यक्ष पुष्प कमल दहल और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) के प्रमुख केपी शर्मा ओली से भी मिलेंगे। कयास लगाए जा रहे हैं कि इस दौरान वे कम्युनिस्ट पार्टियों की एकता पर जोर डालेंगे।

पार्टियों का मोर्चा बनाने की बात

नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टियों पर चीन का स्पष्ट प्रभाव रहा है। कुछ ही दिन पहले पुष्प कमल दहल ने समाजवादी विचारधारा में यकीन रखने वाली पार्टियों का मोर्चा बनाने की बात कही थी। यूएमएल के एक नेता पत्रकारों को बताया है कि लिउ ने जून के तीसरे हफ्ते में दहल और ओली से बातचीत की थी। उस दौरान उन्होंने नेपाल-चीन संबंधों से जुड़े कई पहलुओं पर विचार-विमर्श किया। अब काठमांडू यात्रा के दौरान वे उन मुद्दों पर चर्चा को आगे बढाएंगे।

लिउ की यात्रा के बारे में ब्योरा यूएमएल के उसी वरिष्ठ नेता ने ही दिया है। उन्होंने अखबार काठमांडू पोस्ट को बताया कि रविवार को यहां पहुंचने के बाद लिउ राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी, प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा, दहल, ओली और अन्य नेताओं से मिलेंगे। लिउ के साथ चीन की कम्युनिस्ट पार्टी का एक आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल यहां आ रहा है। लेकिन चीन ने अभी तक इस यात्रा से जुड़े कार्यक्रम की घोषणा नहीं की है।

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चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के विदेश संपर्क विभाग में जून में फेरबदल किया गया। तब सोंग ताओ की जगह लिउ कौ इसका प्रमुख बनाया गया। ये पद संभावना के तुरंत बाद उन्होंने दहल और ओली से वीडियो माध्यम से बातचीत की थी। बीते 30 जून को उन्होंने नेपाल के विदेश मंत्री नारायण खड़का से भी बातचीत की। उसके बाद ही उनके यहां आने का कार्यक्रम बना। पर्यवेक्षकों के मुताबिक उनकी इस यात्रा पर न सिर्फ नेपाल के राजनीतिक विश्लेषकों की नजर रहेगी, बल्कि अमेरिका और नेपाल के पड़ोसी देशों में भी इस पर निगाह रखी जाएगी।

नेपाल में चुनाव का माहौल

नेपाल में चुनाव का माहौल अब बनने लगा है। निर्वाचन आयोग ने अपनी तरफ से संघीय और प्रांतीय विधायिकाओं के आम चुनाव के लिए 18 नवंबर की तारीख का सुझाव सरकार को भेजा है। पांच साल पहले संघीय और प्रांतीय चुनाव दो अलग तारीखों- 26 नवंबर और सात दिसंबर- को कराए गए थे। लेकिन इस बार आयोग ने सारा चुनाव एक चरण में कराने का इरादा जताया है।

निर्वाचन आयोग के अधिकारियों ने इस हफ्ते प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा के साथ अपनी बैठक में चुनाव की तारीख का सुझाव दिया। गुरुवार को इस बारे में मुख्य निर्वाचन आयुक्त दिनेश थपालिया ने मीडिया को जानकारी दी। उन्होंने अखबार काठमांडू पोस्ट से कहा- ‘हम संघीय और प्रांतीय चुनाव एक ही चरण में कराने में पूरी तरह सक्षम हैं।’ थपालिया ने बताया कि प्रधानमंत्री देउबा ने भी एक चरण में चुनाव कराने को लेकर सहमति जताई है।

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