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गलवां घाटी संघर्ष: हिंसक झड़प चीन की सुनियोजित साजिश थी, अमेरिकी रिपोर्ट में दावा

Thu, 03 Dec 2020 08:24 AM IST
Sneha Baluni वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
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लद्दाख की गलवां घाटी (फाइल फोटो) - फोटो : Amar Ujala
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एक शीर्ष अमेरिकी आयोग ने अमेरिकी संसद को दी अपनी रिपोर्ट में चीन पर पड़ोसियों के खिलाफ आक्रामक अभियान को तेज करने का आरोप लगाया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इसी साल जून में भारत के लद्दाख की गलवां घाटी में दोनों देशों की सेनाओं के बीच हुआ हिंसक संघर्ष चीन सरकार की सुनियोजित साजिश था। बीजिंग ने करीब आधी सदी बाद चीन-भारत सीमा पर पहले घातक संघर्ष के लिए उकसाया।

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धमकाने के लिए सैन्य अभ्यास
अमेरिका-चीन आर्थिक एवं सुरक्षा समीक्षा आयोग ने देश की संसद को दी अपनी हालिया नवीनतम रिपोर्ट में कहा कि चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी ने शांति के समय में अपने सशस्त्र बलों का दमनकारी उपयोग किया और ताइवान तथा दक्षिण चीन सागर के पास बड़े पैमाने पर धमकाने वाले अभ्यास किए।

बढ़ती आक्रामकता पर अमेरिकी नजर
रिपोर्ट में कहा गया है, 'इस साल चीन ने भारत सीमा पर करीब आधी सदी में पहले घातक संघर्ष के लिए उकसाया। चीन की बढ़ती आक्रामकता पर नजर है।' एक दिसंबर को जारी रिपोर्ट में कहा गया कि चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) और भारतीय सेना के बीच जून में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास गलवां घाटी में आमने-सामने लड़ाई हुई।
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इस संघर्ष से पहले मई की शुरुआत में एलएसी के कई सेक्टर में कई गतिरोध हुए। गलवां घाटी में कम से कम 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए और कई चीनी सैनिक भी मारे गए। 1975 के बाद दोनों देशों के बीच हुए किसी संघर्ष में पहली बार सैनिक मारे गए। रिपोर्ट में कहा गया है, 'कुछ साक्ष्यों से पता चलता है कि चीन की सरकार ने घटना की योजना बनाई थी, इसमें सैनिकों के शहीद होने की संभावना भी शामिल थी।' 
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पहले चीनी रक्षा मंत्री ने बयान दिया
उदाहरणस्वरूप संघर्ष से कई हफ्ते पहले चीन के रक्षा मंत्री जनरल वेई फेंगे ने एक बयान दिया जिसमें बीजिंग को 'स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए लड़ाई' के लिए प्रोत्साहित किया गया। इसके बाद चीन के सरकारी टैबलॉयड ‘ग्लोबल टाइम्स’ में प्रकाशित एक संपादकीय में चेतावनी दी गई कि भारत अगर 'अमेरिकी-चीन प्रतिद्वंद्विता में शामिल होता है तो उसके वाणिज्य एवं आर्थिक संबंधों को करारा नुकसान पहुंचेगा।'

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