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US-China: 'दोनों देशों के संबंध जटिल, टकराव का खतरा भी बरकरार', बाइडन-जिनपिंग शिखर वार्ता से पहले NSA सुलिवन

Tue, 14 Nov 2023 06:01 PM IST
ज्योति भास्कर वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन

सार

अमेरिका और चीन के संबंधों की तल्खी किसी से छिपी नहीं। ताजा घटनाक्रम में अमेरिका के बड़े पदाधिकारी- जैक सुलिवन ने कहा है कि दोनों देशों के संबंध बेहद जटिल और प्रतिस्पर्धी हैं। ऐसे में दोनों देशों के बीच टकराव की आशंका बेबुनियाद नहीं है।
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अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन, चीनी समकक्ष जिनपिंग और NSA जेक सुलिवन (फाइल) - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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अमेरिका-चीन संबंध आसानी से संघर्ष की ओर बढ़ सकते हैं। ये मानना है अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन का। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर दोनों देशों के रिश्तों को अच्छी तरह से प्रबंधित नहीं किया गया तो अमेरिका और चीन के बीच टकराव होने की आशंका बिल्कुल निराधार नहीं है। बता दें कि सुलिवन का यह बयान राष्ट्रपति जो बाइडन और उनके चीनी समकक्ष शी जिनपिंग के बीच होने वाली बहुप्रतीक्षित शिखर वार्ता से कुछ घंटे पहले आया है। सुलिवन ने अमेरिका-चीन रिश्तों को "जटिल और प्रतिस्पर्धी" करार दिया। 
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गौरतलब है कि बाइडन और शी जिनपिंग बुधवार को सैन फ्रांसिस्को में एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (एपीईसी) लीडरशिप समिट के मौके पर मिलने वाले हैं। दोनों शीर्ष नेताओं की आखिरी मुलाकात नवंबर 2022 में जी20 शिखर सम्मेलन, बाली में हुई थी। यह भी दिलचस्प है कि 80 वर्षीय बाइडन और 70 वर्षीय शी जिनपिंग राष्ट्रपति बनने से पहले से एक दूसरे को जानते रहे हैं। 2021 में बाइडन के राष्ट्रपति बनने से पहले दोनों एक दशक से अधिक समय से एक-दूसरे से परिचित हैं।

एपीईसी शिखर वार्ता से पहले सुलिवन ने सोमवार को कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति के पास इस बात पर चर्चा करने का अवसर है कि वे ताइवान जलडमरूमध्य (Strait) में शांति और स्थिरता को प्रभावी ढंग से कैसे प्रबंधित करते हैं। दोनों पक्षों के बीच हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की आक्रामक कार्रवाइयों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है।
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सुलिवन ने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि "यह एक जटिल और प्रतिस्पर्धी रिश्ता है। अगर संबंधों को अच्छी तरह से प्रबंधित नहीं किया गया तो अमेरिकी और चीन के बीच आसानी से संघर्ष या टकराव होने का खतरा है।" उन्होंने कहा, रिश्ते को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करना राष्ट्रपति के साथ-साथ दोनों देशों के रिश्तों पर काम करने वाले सभी लोगों की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।"

ताइवान उन विषयों की सूची में सबसे ऊपर रह सकता है, जिस पर चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग बाइडन के साथ चर्चा करने को उत्सुक होंगे। बता दें कि बीजिंग स्व-शासित द्वीप- ताइवान पर संप्रभुता का दावा करता है। यहां अगले साल की शुरुआत में चुनाव होने वाले हैं। चीन ने हाल के महीनों में ताइवान के आसपास उत्तेजक सैन्य अभ्यास किया है। चीन की इस कार्रवाई का मकसद द्वीप को स्वतंत्र घोषित करने के लिए कोई भी कदम उठाने के खिलाफ चेतावनी देना माना गया। बाइडन और जिनपिंग की बैठक के दौरान इस्राइल-हमास युद्ध, यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध, मानवाधिकार और व्यापारिक विवादों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है।

बता दें कि पिछले अगस्त में अमेरिका-चीन द्विपक्षीय संबंध काफी निचले स्तर पर पहुंच गए थे। बीजिंग ने ताइवान की उच्च स्तरीय अमेरिकी यात्रा के प्रतिशोध में वॉशिंगटन के साथ प्रमुख संचार माध्यमों को बंद कर दिया था। इस फरवरी में बातचीत बहाल करने के प्रयास तब पटरी से उतर गए जब एक अमेरिकी लड़ाकू जेट ने अमेरिकी हवाई क्षेत्र में एक चीनी निगरानी गुब्बारे को मार गिराया। इस कार्रवाई के बाद से, अमेरिका ने अपने सबसे बड़े रणनीतिक प्रतिद्वंद्वी चीन के साथ संवाद कायम करने की कोशिश में कई महीने बिताए हैं। 

इन प्रयासों में हाल के महीनों में चार कैबिनेट स्तर के अधिकारियों को बीजिंग भेजना भी शामिल है। दोनों देशों के बीच कथित तनाव को लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने कहा, "ये कुछ ऐसे मुद्दे हैं, जिनका समाधान गहन कूटनीति के माध्यम से हो सकता है। अमेरिका इसे प्रबंधित करने में सक्षम रहा है।"

उन्होंने कहा कि अमेरिका चीन के साथ द्विपक्षीय वार्ता से  सकारात्मक परिणाम उत्पन्न करने के अवसरों की तलाश करेगा। सुलिवन ने कहा, हम आने वाले सप्ताह में कुछ प्रगति देखने की उम्मीद कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच अन्य मुद्दों पर भी सहयोग के दरवाजे खुल सकते हैं, जहां सिर्फ चीजों का प्रबंधन नहीं, बल्कि वास्तव में ठोस परिणाम मिलेंगे।
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