अमेरिका में अब सबकी नज़र सेंट्रल बैंक- फेडरल रिजर्व की इस हफ्ते होने वाली बैठक पर है। संभावना है कि इस बैठक के बाद फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में बड़ी बढ़ोतरी का एलान करेगा। देश में महंगाई 40 साल के सबसे ऊंचे स्तर पर है। समझा जाता है कि इस पर काबू पाने के लिए फेडरल रिजर्व के पास अब ब्याज दर बढ़ाना ही एकमात्र रास्ता रह गया है, ताकि बाजार में मुद्रा की आपूर्ति नियंत्रित हो।
फेडरल रिजर्व के ताजा आंकड़ों के मुताबिक खाद्य पदार्थों और ईंधन को छोड़ कर मार्च में अमेरिका में मुद्रास्फीति की दर 5.2 फीसदी। खाद्य पदार्थों और ईंधन के दाम ज्यादा बढ़ने के कारण सकल महंगाई दर 8.5 फीसदी तक पहुंच गई। यूबीएस बैंक से जुड़े विश्लेषकों ने कहा है कि अब इससे ज्यादा महंगाई बढ़ने की संभावना नहीं है।
विश्लेषकों ने कहा है कि महंगाई के मुद्दे पर बाइडन प्रशासन के पास ज्यादा विकल्प नहीं हैं। महंगाई की वजह से सप्लाई चेन संबंधी रुकावटें हैं। यूक्रेन युद्ध के कारण ये समस्या और गहरा गई है। उधर रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण विश्व बाजार में खाद्य पदार्थों और पेट्रोलियम के दाम तेजी से चढ़े हैं।
इस बीच डेमोक्रेटिक पार्टी में ये राय मजबूत होती जा रही है कि अगर जल्द महंगाई से राहत नहीं मिली, तो अगले नवंबर में होने वाले संसदीय चुनाव में पार्टी को हार का मुंह देखना पड़ेगा। मीडिया रिपोर्टों से साफ है कि पहले से ही कई चुनौतियां झेल रही डेमोक्रेटिक पार्टी अब असामान्य महंगाई के कारण बचाव की मुद्रा अपनाने पर मजबूर हो गई है।