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US: 'यूक्रेन नहीं जाएंगे अमेरिकी सैनिक', व्हाइट हाउस ने बताया राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत पर क्यों लगाया प्रतिबंध

Wed, 20 Aug 2025 08:03 AM IST
पवन पांडेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन

सार

Russia-Ukraine War: अमेरिका रूस-यूक्रेन युद्ध रोकने के लिए अपने तमाम प्रयासों के तहत कई बड़े कदम उठा रहा है। इस कड़ी में अमेरिका ने तय किया है कि वो यूक्रेन में अपने सैनिक नहीं भेजेगा। वहीं व्हाइट हाउस की तरफ ये भी बताया गया है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत पर प्रतिबंध क्यों लगाया है।
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कैरोलिन लेविट, अमेरिकी व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव - फोटो : ANI
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विस्तार
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व्हाइट हाउस प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने मंगलवार को कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कर दिया है कि यूक्रेन की जंग में अमेरिकी सैनिकों को सीधे मैदान में नहीं भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका सुरक्षा गारंटी देने के दूसरे रास्तों पर विचार कर रहा है, जिनमें हवाई मदद भी शामिल हो सकती है।
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'सैनिक नहीं जाएंगे, लेकिन मदद जारी रहेगी'
कैरोलिन लेविट ने प्रेस ब्रीफिंग में आगे कहा, 'राष्ट्रपति ने साफ कहा है कि अमेरिकी सैनिक यूक्रेन की जमीन पर कदम नहीं रखेंगे। लेकिन अमेरिका यूरोपीय सहयोगियों के साथ मिलकर अन्य सुरक्षा विकल्प उपलब्ध कराने पर विचार करेगा। सुरक्षा गारंटी स्थायी शांति के लिए बेहद जरूरी हैं और इसी दिशा में राष्ट्रपति ने अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम को काम करने का निर्देश दिया है।'

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हवाई सुरक्षा विकल्प भी खुले- कैरोलिन लेविट
वहीं जब पत्रकारों ने पूछा कि क्या 'हवाई मदद' भी सुरक्षा गारंटी का हिस्सा हो सकती है, इस पर कैरोलिन लेविट ने कहा, 'यह विकल्प भी खुला है। मैं कुछ खारिज नहीं करूंगी। राष्ट्रपति के पास तमाम सैन्य विकल्प मौजूद हैं। लेकिन एक बात तय है- अमेरिकी सैनिक जमीनी स्तर पर यूक्रेन में नहीं जाएंगे।'

नाटो से हथियार खरीदेगा यूक्रेन
इस दौरान पत्रकारों ने जब अमेरिकी टैक्सपेयर्स के पैसे की चिंता जताई, तो व्हाइट हाउस प्रेस सचिव ने कहा कि ट्रंप ने नया फार्मूला निकाला है। 'राष्ट्रपति अमेरिकी करदाताओं का बोझ नहीं बढ़ाना चाहते। इसलिए उन्होंने समाधान दिया कि नाटो अमेरिकी हथियार खरीदे और उसे यूक्रेन को उपलब्ध कराए। अमेरिकी हथियार दुनिया में सबसे बेहतरीन हैं। इसी से यूक्रेन की जरूरत पूरी की जाएगी।'

ट्रंप-पूतिन-जेलेंस्की संवाद की कोशिश
कैरोलिन लेविट ने कहा कि ट्रंप ने रूस और यूक्रेन के बीच सीधी बातचीत शुरू कराने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। 'राष्ट्रपति ट्रंप ने पिछले हफ्ते राष्ट्रपति पुतिन से मुलाकात की और दर्जनों बार राष्ट्रपति जेलेंस्की से फोन पर बात की। उनकी कोशिश से दोनों देशों के बीच वर्षों बाद बातचीत शुरू हुई है।' ट्रंप का मानना है कि कोई भी शांति समझौता तभी सफल होगा, जब दोनों देशों को थोड़ा-थोड़ा त्याग करना पड़े। 'राष्ट्रपति हमेशा कहते हैं कि अच्छी डील में दोनों पक्ष थोड़े असंतुष्ट रहते हैं। यही स्थायी समाधान का रास्ता है।'

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भारत पर भी लगाए गए ट्रंप के 'प्रतिबंध'
इस मौके पर कैरोलिन लेविट ने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने रूस पर दबाव बनाने के लिए भारत पर भी टैरिफ बढ़ाया है। उन्होंने कहा, 'राष्ट्रपति ने भारत पर 25% अतिरिक्त शुल्क लगाकर कुल 50% टैरिफ कर दिया है। इसका मकसद रूस पर द्वितीयक दबाव डालना है, ताकि वह युद्ध रोकने पर मजबूर हो।'
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'अगर ट्रंप पहले होते तो युद्ध शुरू ही न होता'
इस दौरान कैरोलिन लेविट ने दोहराया कि राष्ट्रपति ट्रंप मानते हैं कि अगर वे पहले से सत्ता में होते तो रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू ही नहीं होता। उन्होंने दावा किया कि खुद पुतिन ने भी यह बात स्वीकार की है। व्हाइट हाउस की तरफ से कहा गया है कि राष्ट्रपति ट्रंप यूरोपीय नेताओं और नाटो से लगातार चर्चा कर रहे हैं ताकि युद्ध खत्म हो और स्थायी शांति सुनिश्चित की जा सके।

भारत-पाकिस्तान शांति का दावा भी किया
वहीं राष्ट्रपति ट्रंप की तरह कैरोलिन लेविट ने प्रेस वार्ता में यह भी कहा कि ट्रंप ने पहले भी कई जगह शांति स्थापित करवाई है। उन्होंने ये भी दावा किया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान के बीच शांति समझौता कराया था, जो परमाणु युद्ध को रोकने में मददगार साबित हुआ।
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