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म्यांमार: एशिया की तेल और गैस कंपनियां जुटी हैं प्रतिबंधों को धता बताने में

Sat, 19 Mar 2022 05:52 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, यंगून

सार

एक अनुमान के मुताबिक म्यांमार के सैनिक शासन को 2022 में तेल और गैस उद्योग से 1.5 बिलियन डॉलर की आमदनी होगी। देश में लोकतंत्र बहाली के लिए आंदोलन चला रहे संगठन विदेशी कंपनियों लगातार मांग करते रहे हैं कि वे म्यांमार में तेल और गैस का अपना कारोबार रोक दें। इन संगठनों का कहना है कि ये क्षेत्र सैनिक शासकों के राजस्व का सबसे बड़ा जरिया है...
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म्यांमार में तख्तापलट - फोटो : PTI (File Photo)
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विस्तार
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ऊर्जा क्षेत्र की एशियाई कंपनियों ने म्यांमार में अपना कारोबार जारी रखा है। आशंका है कि इस वजह से म्यांमार पर हाल में यूरोपियन यूनियन (ईयू) की तरफ से लगाए गए प्रतिबंध बेअसर हो सकते हैं। ईयू ने अपने ताजा प्रतिबंधों में म्यांमार के प्राकृतिक गैस और कच्चे तेल उद्योग को खास निशाना बनाया है। ईयू ने कहा है कि म्यांमार के तेल और गैस उद्यमों को धन मुहैया कराने वाली कंपनियों और व्यक्तियों को वह प्रतिबंधित कर देगा। साथ ही यूरोप में मौजूद उनके धन जब्त कर लिए जाएंगे।

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एक अनुमान के मुताबिक म्यांमार के सैनिक शासन को 2022 में तेल और गैस उद्योग से 1.5 बिलियन डॉलर की आमदनी होगी। देश में लोकतंत्र बहाली के लिए आंदोलन चला रहे संगठन विदेशी कंपनियों लगातार मांग करते रहे हैं कि वे म्यांमार में तेल और गैस का अपना कारोबार रोक दें। इन संगठनों का कहना है कि ये क्षेत्र सैनिक शासकों के राजस्व का सबसे बड़ा जरिया है।

कई पश्चिमी कंपनियों ने कारोबार समेटा

इस साल जनवरी से कई पश्चिमी कंपनियां म्यांमार में अपना कारोबार समेटने का एलान कर चुकी हैं। उनमें फ्रांस की टोटल एनर्जीज और अमेरिका की शेवरन भी है। लेकिन अभी तक किसी एशियाई कंपनी ने ऐसा कदम नहीं उठाया है। दक्षिण कोरिया की स्टील निर्माता कंपनी पोस्को ने म्यांमार के पश्चिमी तट पर स्थित श्वे गैस फील्ड में भारी निवेश कर रखा है। वहां उसकी हिस्सेदारी 51 फीसदी है। पोस्को ने यहां से अपना निवेश निकालने से साफ इनकार कर रखा है। उसका कहना है कि अगर उसने यहां से गैस सप्लाई रोकी, तो उससे म्यांमार में ईंधन और बिजली की आपूर्ति पर बहुत बुरा असर होगा। उससे आम नागरिक प्रभावित होंगे।

थाईलैंड की कंपनी पीटीटी एक्सप्लोरेशन एंड प्रोडक्शन ने इसी हफ्ते कहा कि वह टोटल एनर्जीज से यादाना गैस फील्ड का कारोबार खरीद लेगी। इस कंपनी की दलील है कि यादाना प्रोजेक्ट म्यांमार और थाईलैंड में प्राकृतिक गैस की सप्लाई और सैकड़ों लोगों की आजीविका का स्रोत है। थाईलैंड अपनी जरूरत के 15 फीसदी प्राकृतिक गैस के लिए म्यांमार पर निर्भर है। विश्लेषकों ने ध्यान दिलाया है कि म्यांमार से पाइपलाइन के जरिए गैस की सप्लाई सिर्फ चीन और थाईलैंड को होती है। इन दोनों में से किसी देश ने इस पर रोक लगाने का संकेत नहीं दिया है।

ऊर्जा कंपनियों पर कोई प्रतिबंध नहीं

अमेरिका की गैर-सरकारी संस्था अर्थराइट्स इंटरनेशनल ने म्यांमार छोड़ने वाली यूरोपीय कंपनियों के अपनाए तरीकों की आलोचना की है। उसने कहा कि टोटल एनर्जीज ने अपने शेयर बेच दिए। जबकि म्यांमार से निकलते वक्त उसे सुनिश्चित करना चाहिए था कि उसके प्रोजेक्ट का गैस राजस्व देश के बाहर ऐसे किसी खाते में जमा हो, जिस तक सैनिक शासकों की पहुंच ना हो।

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लोकतंत्र समर्थक कार्यकर्ताओं ने इस मामले में अमेरिका के रुख की भी आलोचना की है। उन्होंने ध्यान दिलाया है कि अमेरिका ने म्यांमार में कारोबार करने वाली ऊर्जा कंपनियों पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया है। अगर वह ऐसा करता, तो इन कंपनियों के लिए डॉलर में भुगतान करना मुश्किल हो जाता। लेकिन अभी यहां कार्यरत कंपनियों का धंधा निर्बाध ढंग से चल रहा है।

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